
ट्रंप के ऐलान से इंटेल-एपल चिप गठबंधन की उम्मीद, वैश्विक बाज़ार में हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद इंटेल के शेयर 10% उछले, एपल TSMC पर निर्भरता घटाने को तैयार, लेकिन दोनों कंपनियों ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि एपल ने इंटेल के साथ मिलकर अमेरिकी धरती पर चिप्स डिज़ाइन और निर्माण करने की सहमति दे दी है। इस घोषणा के तुरंत बाद नैस्डैक प्रीमार्केट में इंटेल के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की तेज़ी दर्ज की गई, जो बाद में थोड़ी नरम पड़ी। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने इंटेल को एनवीडिया और एलन मस्क की टेराफैब जैसी साझेदारियाँ दिलाने में मदद की है। हालाँकि, एपल और इंटेल दोनों ने इस बयान पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है, जिससे बाज़ार की उत्सुकता और अनिश्चितता दोनों बनी हुई है।
यह घटनाक्रम कोई आकस्मिक नहीं है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मई में ही ख़बर दी थी कि एक साल से अधिक चली बातचीत के बाद इंटेल और एपल के बीच कुछ चिप्स के निर्माण के लिए प्रारंभिक समझौता हुआ है। एपल की यह रणनीति उसकी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की बड़ी ज़रूरत से उपजी है। फ़िलहाल कंपनी अपने उन्नत प्रोसेसरों के लिए ताइवान की टीएसएमसी पर अत्यधिक निर्भर है, जिसकी उत्पादन लाइनें एनवीडिया और एएमडी जैसी एआई चिप निर्माताओं की भारी माँग से जूझ रही हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सरकार ने 2025 में चिप्स अधिनियम के तहत 8.9 अरब डॉलर की सब्सिडी को इक्विटी में बदलकर इंटेल में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी ले ली थी, जो वाशिंगटन की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की महत्वाकांक्षा को रेखांकित करता है।
भू-राजनीतिक नज़रिए से देखें तो यह क़दम अमेरिका की उस चिंता को दर्शाता है जो ट्रंप ने अपने बयान में ज़ाहिर की—पिछले प्रशासनों ने ताइवान और अन्य देशों को अमेरिकी सेमीकंडक्टर कारख़ाने हथियाने दिए। ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच, वैश्विक चिप आपूर्ति का एकाधिकार टीएसएमसी के हाथों में होना कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए जोखिम बन चुका है। भारत जैसे देश, जो अपनी सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता खड़ी करने में अरबों डॉलर लगा रहे हैं, इस बदलाव को गहराई से महसूस करेंगे। यदि इंटेल सफलतापूर्वक एपल जैसे दिग्गज ग्राहक को जोड़ती है, तो इससे वैश्विक चिप उत्पादन का भूगोल पुनर्संतुलित हो सकता है और भारत की महत्वाकांक्षी फ़ैब परियोजनाओं के लिए नई प्रतिस्पर्धा या सहयोग के रास्ते खुल सकते हैं।
फ़िलहाल, आधिकारिक पुष्टि के अभाव में बाज़ार की प्रतिक्रिया काफ़ी हद तक ट्रंप के बयान के भरोसे टिकी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह साझेदारी मूर्त रूप लेती है, तो इससे इंटेल की फ़ाउंड्री सेवाओं को वह विश्वसनीयता मिलेगी जिसकी उसे सालों की गिरावट के बाद सख़्त ज़रूरत है। एपल के लिए यह टीएसएमसी पर निर्भरता घटाने का एक रणनीतिक विकल्प होगा, लेकिन इंटेल की उन्नत नोड क्षमता अभी भी सवालों के घेरे में है। दक्षिण एशिया के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह अमेरिकी पुनरुत्थान वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक खंडित करेगा, या भारत जैसे उभरते केंद्रों को निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के नए अवसर देगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ट्रंप का दावा है कि एपल और इंटेल अमेरिका में चिप डिजाइन और उत्पादन के लिए साथ काम करेंगे, लेकिन कंपनियों ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। यह घोषणा एक साल से अधिक चली बातचीत की मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है, और बाजार आधिकारिक पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं।
ट्रंप द्वारा एपल के साथ अमेरिका में चिप उत्पादन के लिए साझेदारी की घोषणा के बाद इंटेल के शेयरों में लगभग 10% की उछाल आई। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने इंटेल की मदद की, जिसमें सरकार की 10% हिस्सेदारी है, और एपल, एनवीडिया और एलन मस्क की टेराफैब के साथ भागीदार बन गया है।
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