
कैफीन और सेहत: भारत में 21 करोड़ माइग्रेन पीड़ितों के लिए चिकित्सकीय सलाह और वैश्विक अध्ययन
दुनियाभर में दूसरी सबसे बड़ी विकलांगता का कारण बन चुके माइग्रेन और रक्तचाप पर कैफीन के प्रभावों को लेकर नए तथ्य सामने आए हैं।
भारत में लगभग 21.3 करोड़ लोग माइग्रेन से पीड़ित हैं, जो वैश्विक मरीज़ों का लगभग छठा हिस्सा है। यह स्नायु-विकार अब विकलांगता का दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है, जो विशेषकर किशोरों और युवा वयस्कों को प्रभावित करता है। केरल में हुए एक अध्ययन के अनुसार, 37.5 प्रतिशत कॉलेज छात्र इससे ग्रस्त हैं, जिनमें से 22 प्रतिशत को कई दिनों तक कक्षाएँ छोड़नी पड़ती हैं। महिलाएँ पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुनी प्रभावित होती हैं, और हार्मोनल बदलाव इस अंतर को और बढ़ा देते हैं। शिक्षा और करियर निर्माण के नाज़ुक दौर में होने वाला यह विकार दीर्घकालिक उत्पादकता और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है, जिससे भारत जैसे युवा-बहुल देश की आर्थिक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
कैफीन का माइग्रेन से एक जटिल रिश्ता है। इंडोनेशिया के यूनिवर्सिटी ऑफ इंडोनेशिया हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रामदिनल एविसेना ज़ैरिनल बताते हैं कि यह एक ओर दर्द निवारक की तरह काम कर सकता है, लेकिन इसकी खुराक या सेवन के पैटर्न में अचानक बदलाव माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। जो लोग रोज़ एक-दो कप कॉफ़ी पीते हैं, अगर अचानक चार-पाँच कप पीने लगें या एकदम बंद कर दें, तो सिरदर्द शुरू हो सकता है। यह ‘विदड्रॉअल’ प्रभाव कहलाता है। उनके अनुसार, समस्या कैफीन में नहीं, बल्कि उसके उपयोग के ढंग में है। यह निष्कर्ष नैदानिक अवलोकनों पर आधारित हैं, जिनमें मरीज़ों के व्यक्तिगत ट्रिगर – जैसे थकान, तनाव, खाद्य प्रत्युर्जता और हार्मोनल उतार-चढ़ाव – की भूमिका भी अहम पाई गई है।
ईरानी विशेषज्ञों के हालिया शोध इस विविधता को आनुवंशिक और मस्तिष्कीय क्रियाविधि से समझाते हैं। हमशहरी ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों का शरीर कैफीन को तेज़ी से तोड़ता है, जबकि अन्य में यह देर तक रक्त में रहकर बेचैनी और अनिद्रा पैदा करता है। ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार (एडीएचडी) से ग्रस्त व्यक्तियों में कैफीन एकाग्रता और शांति का अनुभव करा सकता है, क्योंकि यह ध्यान से जुड़े तंत्रिका-पथों को सक्रिय करता है। यह भिन्नता बताती है कि एक ही मात्रा में कॉफ़ी पीने पर भी लोगों की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग क्यों हो सकती है।
रूसी गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट विक्टोरिया स्टेपानोवा गर्म मौसम में कॉफ़ी के ख़तरे की चेतावनी देती हैं – गर्मी में यह दोहरा निर्जलीकरण कर सकती है, रक्त को गाढ़ा कर अतालता का जोखिम बढ़ा सकती है और पेट की समस्याएँ पैदा कर सकती है। उधर, रक्तचाप से जूझ रहे लोगों के लिए अमेरिकी पोषण विशेषज्ञ डैनी लेबोविट्ज़ हिबिस्कस चाय, चुकंदर का रस, अनार का रस और आलूबुखारे का जूस सुझाते हैं, जो पॉलीफेनॉल और नाइट्रेट के ज़रिए धमनियों को शिथिल करते हैं और रक्त प्रवाह सुधारते हैं। ये सुझाव छोटे पैमाने के नैदानिक अध्ययनों और अवलोकनों पर आधारित हैं, जिनमें प्रतिदिन 250-500 मिलीलीटर सेवन से सिस्टोलिक दबाव में कमी देखी गई।
विशेषज्ञ एकमत हैं कि कैफीन का असर पूरी तरह व्यक्तिगत है और इसे लेकर कोई एक सलाह सबके लिए उपयुक्त नहीं। भारत में अगला क़दम माइग्रेन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्कूल-कॉलेज स्तर पर स्क्रीनिंग को शामिल करना हो सकता है। साथ ही, कैफीन सेवन के पैटर्न को स्थिर रखने और अपने निजी ट्रिगर पहचानने पर ज़ोर दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में भारतीय आबादी पर माइग्रेन के आर्थिक बोझ और कैफीन के दीर्घकालिक प्रभावों पर अधिक विस्तृत अनुदैर्ध्य अध्ययनों की आवश्यकता होगी, ताकि साक्ष्य-आधारित दिशानिर्देश तैयार किए जा सकें।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Coffee consumption in hot weather poses a risk to the heart, doctors warn. Caffeine aggravates dehydration and increases load on the cardiovascular system. It's better to avoid the drink during heatwaves.
Why some people feel calm after coffee while others get anxious? Research shows genetics plays a key role in caffeine metabolism. Individual factors determine how coffee affects your body.
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