
यूरोप में वीगन स्टेक पर बहस, गाज़ा में समुद्र का प्रदूषित सहारा
जहाँ यूरोपीय संघ खाद्य प्रौद्योगिकी के भविष्य पर नियम बना रहा है, वहीं गाज़ा के विस्थापित परिवार भीषण गर्मी से बचने के लिए सीवेज-युक्त समुद्र में उतर रहे हैं।
गाज़ा शहर के एक तंबू में 56 वर्षीय नाहेद हमूदा गत्ते के टुकड़े से खुद को हवा कर रहे थे। बाहर सुबह का तापमान 31 डिग्री तक पहुँच चुका था, लेकिन प्लास्टिक और कपड़े की अस्थायी दीवारों के भीतर हवा ओवन की तरह तप रही थी। न बिजली थी, न पंखा, न पीने का साफ पानी। "खाना भी ऐसा है कि निगला नहीं जाता," उन्होंने रॉयटर्स से कहा। यह दृश्य गाज़ा पट्टी के लाखों विस्थापितों की नई सामान्य स्थिति है, जो दो साल के युद्ध के बाद समुद्र के किनारे एक संकरी पट्टी पर सिमट गए हैं। उनका एकमात्र राहत-स्थल है भूमध्य सागर का वही तट, जो कभी छुट्टियाँ बिताने की जगह था, अब सीवेज और कचरे से भरा हुआ है।
ठीक उसी समय, ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के नीति-निर्माता खाद्य प्रौद्योगिकी के भविष्य पर निर्णय ले रहे थे। एएनएसए की रिपोर्ट के अनुसार, संघ ने वीगन स्टेक और नई जीनोमिक तकनीकों पर नवीनतम नियमों को अंतिम रूप दिया—पादप-आधारित मांस की लेबलिंग कैसे हो, और जीन-संपादित फसलों को स्थायी कृषि के लिए कितनी छूट मिले। यह विरोधाभास एक ऐसी दुनिया को उजागर करता है जहाँ एक छोर पर भोजन के नैतिक और पर्यावरणीय आयामों पर दार्शनिक बहस हो रही है, और दूसरे छोर पर लाखों लोगों के लिए किसी भी भोजन और पानी तक पहुँच ही जीवन-मृत्यु का प्रश्न बन गई है।
गाज़ा का समुद्र हमेशा से एक सांस्कृतिक सहारा रहा है। युद्ध से पहले यह तट विश्राम और पारिवारिक मिलन का स्थल था। अब 36 वर्षीय वदीअ अल-रास जैसे लोग कहते हैं, "उत्तर से दक्षिण तक पूरी पट्टी में यही एकमात्र मलजल है।" यहाँ तक कि सर्फ़िंग जैसे खेल ने भी हार नहीं मानी। 23 वर्षीय तहसीन अबू अस्सी ने अपने पिता से सर्फ़िंग सीखी और बताया कि लहर पकड़ने का एहसास "शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।" लेकिन सर्फ़ वैक्स उपलब्ध नहीं है, इसलिए वे मोमबत्ती के मोम से बोर्ड को रगड़ते हैं। 19 वर्षीय अब्देल रहीम अल-उस्ताद के लिए पुराने बोर्ड "खज़ाने" हैं, क्योंकि कोई भी बोर्ड खोने का मतलब खेल जारी रखने की क्षमता खत्म होना है। युद्ध से पहले 17 सर्फ़रों की टीम थी, अब सिर्फ तीन बचे हैं।
नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल की एक रिपोर्ट बताती है कि लगभग दस लाख लोग अब भी तंबुओं में रहते हैं, और 8.5 लाख के पास प्लास्टिक शीट, प्लाइवुड या रस्सी जैसी बुनियादी आपातकालीन सामग्री नहीं है। इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि सहायता भेजी जा रही है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार आश्रय सामग्री पर प्रतिबंध जारी है। यह स्थिति दक्षिण एशिया के पाठकों के लिए एक परिचित चिंता जगाती है—भारत और पड़ोसी देशों में हर साल लू और जल संकट ऐसे ही कमज़ोर समुदायों को सबसे पहले प्रभावित करते हैं। गाज़ा की तस्वीरें एक वैश्विक चेतावनी हैं कि बुनियादी ढाँचे का पतन किस तरह समुद्र को भी ज़हरीला बना सकता है।
शाम ढलने पर गाज़ा का तट एक विचित्र शांति से भर जाता है। बच्चे उथले पानी में छपाके मारते हैं, महिलाएँ कपड़े धोती हैं, और कुछ युवा मोम से चमकते बोर्ड लेकर लहरों की ओर बढ़ते हैं। सीवेज की गंध और त्वचा पर चिपकते कीटाणुओं के बावजूद, यह समुद्र ही है जो गाज़ा को एक आखिरी सांस देता है। जैसा कि 18 वर्षीय सर्फ़र खलील अबू जियाब ने कहा, "गाज़ा में समुद्र के अलावा वास्तव में कुछ भी ऐसा नहीं है जिसका इंतज़ार किया जा सके। इसके बिना, जीवन बहुत पहले खत्म हो गया होता।"
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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गर्मी के बढ़ते तापमान और ताजे पानी की कमी के कारण, विस्थापित गाज़ावासी अपने दमघोंटू तंबुओं से निकलकर प्रदूषित भूमध्यसागरीय तट पर नहाने और कपड़े धोने जा रहे हैं। कुछ लोगों के लिए, सर्फिंग आज़ादी का एक अवर्णनीय एहसास और युद्ध की कठिनाइयों से एक संक्षिप्त पलायन प्रदान करती है।
गाज़ा के मलबे में, युवा सर्फ़रों का एक समूह नष्ट हुई इमारतों के पार अपने बोर्ड ले जाकर लहरों में सांत्वना ढूंढता है। वे इस खेल को साँस लेने का एक तरीका बताते हैं, एक अवर्णनीय अनुभूति जो उन्हें पल भर के लिए चारों ओर की तबाही से ऊपर उठा देती है।
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