
दिखावे से परे: जब सुंदरता छिपे हुए विज्ञान और प्राकृतिक बदलावों में बसती है
एक मेकअप वीडियो से लेकर मांस के रंग और सफ़ेद बालों तक, दुनिया भर में लोग अब दिखावे की बजाय समझदारी और प्राकृतिक प्रक्रियाओं को अपना रहे हैं।
स्पेन की मेकअप आर्टिस्ट मारियोना फेर्रे के इंस्टाग्राम वीडियो में एक हाथ धीरे-धीरे पलक उठाकर, पेंसिल की नोक से पलकों की जड़ों के बीच खाली जगहों को भरता है। कैप्शन है: 'एल आईलाइनर इनविज़िबल'—अदृश्य आईलाइनर। कोई स्पष्ट रेखा नहीं, बस आँखें गहरी और जागी हुई लगती हैं। यह छोटा-सा इशारा दुनिया भर में फैल रहे एक बड़े सांस्कृतिक बदलाव का हिस्सा है, जहाँ लोग दिखावे की चमक-दमक से हटकर, चीज़ों के पीछे के विज्ञान और प्राकृतिक बदलावों को समझने लगे हैं।
अर्जेंटीना के कसाई की दुकान पर खड़ा ग्राहक चमकीले लाल मांस को ताज़ा समझकर चुनता है, जबकि वैक्यूम पैक गहरे बैंगनी रंग का टुकड़ा छोड़ देता है। लेकिन ब्राज़ील की पोषण विशेषज्ञ निकोली फ़रेरा कास्त्रो और अर्जेंटीना की खाद्य एजेंसी सेनासा बताते हैं कि रंग भ्रामक हो सकता है—मायोग्लोबिन प्रोटीन ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर रंग बदलती है, और गहरा मांस पूरी तरह ताज़ा हो सकता है। इसी तरह, बालों की दुनिया में भी एक शांत क्रांति चल रही है। अर्जेंटीना और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों में 'ग्रे ब्लेंडिंग' तकनीक लोकप्रिय हो रही है, जहाँ सफ़ेद बालों को पूरी तरह ढकने की बजाय, बेबीलाइट्स और बैलेज़ से उन्हें प्राकृतिक हाइलाइट्स की तरह मिलाया जाता है।
इंडोनेशिया के डिज़ाइनर कमरों को रोशन करने के लिए चमकीले सफ़ेद की जगह ऑफ-व्हाइट, बेज और ग्रेज जैसे रंग सुझाते हैं, जो प्रकाश को परावर्तित करते हुए गर्माहट भी देते हैं। ब्राज़ील में, पलकों की सर्जरी—ब्लेफ़ारोप्लास्टी—दुनिया की सबसे ज़्यादा की जाने वाली कॉस्मेटिक सर्जरी बन गई है, लेकिन नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मारियाना फ़ोन्सेका ज़ोर देती हैं कि यह केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि झुकती पलकों से घटी दृष्टि को सुधारने के लिए भी ज़रूरी है।
केन्या की राजधानी नैरोबी में पादप विक्रेता पायस गितोंगा और रोज़ लोसेंजा ग्राहकों को समझाते हैं कि हर पौधे के लिए सही कमरा चुनना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पानी देना। लिविंग रूम की अप्रत्यक्ष रोशनी में गोल्डन पोथोस फलता-फूलता है, जबकि एंट्रीवे का सूखापन गोल्डन पाम के लिए बेहतर है। पत्तियों का पीला पड़ना या झड़ना अक्सर ग़लत जगह का संकेत होता है, न कि माली की कमी का।
ये सब कहानियाँ एक ही सूत्र में बँधती हैं: दिखावे की जगह समझ, कठोर हस्तक्षेप की जगह सहज स्वीकार्यता। चाहे वह आँखों की अदृश्य रेखा हो, मांस का गहरा रंग, सफ़ेद बालों की चाँदी जैसी चमक, दीवार का मटियाला शेड, या सही कोने में रखा पौधा—हर जगह लोग अब सतह के नीचे झाँक रहे हैं। एक महिला के बालों में सफ़ेद लटें अब छिपाने की नहीं, बल्कि रोशनी पकड़ने की चीज़ बन गई हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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लैटिन अमेरिकी प्रेस सूक्ष्म सौंदर्य की जीत का जश्न मनाता है: सफ़ेद बालों को छुपाने वाली रंगत, अदृश्य आईलाइनर, और यह समझ कि मांस का रंग उसकी गुणवत्ता नहीं तय करता। यह कठोरता रहित लालित्य की ओर एक रुझान है, जहाँ फीका पड़ना और घुलना-मिलना शैली का हिस्सा बन जाते हैं।
दक्षिण-पूर्व एशियाई मीडिया घरेलू वातावरण पर केंद्रित है, ऐसे पेंट रंग सुझाता है जो कृत्रिम रोशनी के बिना कमरों को उज्ज्वल करते हैं। प्रकाश परावर्तन का अदृश्य गुण एक व्यावहारिक, ऊर्जा-बचत सौंदर्य उपाय बन जाता है।
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