
ईरान-अमेरिका वार्ता: प्रगति के दावे के बीच ट्रंप की धमकियों पर ईरान का विरोध, प्रतिनिधिमंडल का स्थल से बहिर्गमन
स्विट्ज़रलैंड में उच्च-स्तरीय वार्ता के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने बड़ी प्रगति की बात कही, लेकिन लेबनान संघर्ष और यूरेनियम संवर्धन अधिकार पर मतभेद बने रहे और ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विरोध में बैठक स्थल छोड़ दिया।
स्विट्ज़रलैंड के लुसर्न झील के तट पर रविवार को शुरू हुई अमेरिका-ईरान वार्ता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने "बड़ी प्रगति" का दावा किया, परंतु कुछ ही घंटों बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताज़ा सैन्य धमकियों के विरोध में बैठक स्थल छोड़ दिया। कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह 'लुसर्न झील शिखर सम्मेलन' एक पूर्व-निर्धारित समझौता ज्ञापन के तहत आयोजित हुआ, जिसमें अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के साथ पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थ भी शामिल थे।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार, वार्ता का प्राथमिक लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पारदर्शिता सुनिश्चित करना और क्षेत्र में व्यापक युद्धविराम की दिशा में बढ़ना है। वेंस ने कहा कि तकनीकी विचार-विमर्श से दोनों पक्षों को पहली बार सीधे समाधान पर काम करने का अवसर मिलेगा। वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बग़ाई ने स्पष्ट किया कि तेहरान के लिए सबसे अहम मुद्दा लेबनान में हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच जारी लड़ाई को रोकना है, जिसके बिना अंतिम समझौते की ओर बढ़ना संभव नहीं होगा। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने दोहराया कि ईरान यूरेनियम संवर्धन का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा, हालांकि वह लिखित आश्वासन देने को तैयार है कि वह परमाणु बम नहीं बनाएगा।
इन वार्ताओं की पृष्ठभूमि में लेबनान संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति ने तनाव बढ़ा रखा है। ईरानी सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इज़राइली हमलों के जवाब में होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से बंद कर दिया गया है, जिसका अमेरिकी केंद्रीय कमान ने खंडन करते हुए कहा कि यातायात सामान्य है और अमेरिकी सेना स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हो रही इस प्रक्रिया के तहत 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता होना है, लेकिन ट्रंप द्वारा हिज़्बुल्लाह को 'ईरान के परोक्ष योद्धा' बताकर कड़ी कार्रवाई की धमकी देने के बाद स्थिति और जटिल हो गई। ईरानी मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर क़ालीबाफ़ ने कहा कि ऐसी धमकियों को वार्ता में स्वीकार नहीं किया जाएगा और सशस्त्र बल जवाब देने को तैयार हैं।
अभी यह स्थिति स्पष्ट नहीं है कि वार्ता पूरी तरह स्थगित हुई है या केवल बाधित। कुछ ईरानी मीडिया ने प्रतिनिधिमंडल के पूर्ण बहिर्गमन की सूचना दी, जबकि एक अन्य ईरानी स्रोत के हवाले से बताया गया कि बातचीत अटकी है पर समाप्त नहीं हुई। कतरी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद बिन मोहम्मद अल-अंसारी ने कहा कि मध्यस्थ सभी पक्षों के साथ सकारात्मक माहौल बनाने के लिए काम जारी रखे हैं। समझौता ज्ञापन के अंतर्गत परमाणु, आर्थिक और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित सभी पहलुओं पर विशेषज्ञ समूहों की बैठकें अपेक्षित हैं, लेकिन ट्रंप की धमकियों और लेबनान में जारी हिंसा के कारण इनका भविष्य अनिश्चित है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति के प्रगति के दावों के बावजूद, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने लेबनान पर ट्रंप की धमकियों के विरोध में वार्ता से बहिर्गमन कर लिया। ईरान यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार पर अड़ा है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
अमेरिका और ईरान ने स्विट्जरलैंड में वार्ता में बड़ी प्रगति की है, उपराष्ट्रपति ने संबंधों में बदलाव का स्वागत किया। तनाव जारी रहने के बावजूद, दीर्घकालिक शांति समझौते की कोशिश की जा रही है।