
अंकारा शिखर सम्मेलन से पूर्व ट्रंप का नाटो पर तीखा हमला: अमेरिकी समर्थन को बताया ‘हास्यास्पद’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूरोपीय सहयोगियों पर ईरान युद्ध में सहयोग न करने का आरोप लगाया और सैन्य खर्च को लेकर असंतोष जताया, जबकि पेंटागन में बल कटौती की योजना पर आंतरिक मतभेद सामने आए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 जुलाई 2026 को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के साथ वाशिंगटन के मौजूदा संबंधों को ‘हास्यास्पद’ और ‘एकतरफा’ करार दिया। यह बयान तुर्की की राजधानी अंकारा में 7-8 जुलाई को होने वाले 32 सदस्यीय गठबंधन के शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले आया है। ट्रंप ने एक ग्राफिक भी साझा किया जिसमें अमेरिकी रक्षा व्यय को कुछ अन्य सदस्य देशों की तुलना में कहीं अधिक दर्शाया गया, और लिखा कि यूरोपीय सहयोगी ‘हमारे साथ नहीं खड़े हुए’ तथा संबंध ‘पारस्परिक नहीं’ है।
यूरोपीय सहयोगियों के प्रति ट्रंप का आक्रोश मुख्यतः ईरान युद्ध के दौरान उनकी प्रतिक्रिया को लेकर है। कई यूरोपीय देशों ने अमेरिकी सेनाओं के लिए अपने सैन्य अड्डों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। सीबीएस न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने इस युद्ध की आर्थिक और सुरक्षा संबंधी परिणामों की योजना में यूरोपीय देशों से न तो पूर्व परामर्श किया था और न ही उन्हें शामिल किया था। व्हाइट हाउस का स्पष्ट रुख है कि यूरोप को अपनी रक्षा की अगुवाई स्वयं करनी चाहिए, और वाशिंगटन पहले ही अपनी प्रतिबद्धताओं में कटौती की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।
अमेरिकी प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर गहरे मतभेद उजागर हुए हैं। इतालवी समाचार एजेंसी एडनक्रोनोस ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से बताया कि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ पिछले माह ब्रुसेल्स में नाटो सैन्य बैठक के दौरान यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में नई और महत्वपूर्ण कटौती की घोषणा करना चाहते थे, परंतु विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित शीर्ष अधिकारियों ने इस योजना को रोक दिया। इसके बजाय, हेगसेथ ने छह माह तक चलने वाली बल संरचना समीक्षा की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। पेंटागन प्रवक्ता के अनुसार, हेगसेथ यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनका संदेश राष्ट्रपति के एजेंडे के अनुरूप हो और राष्ट्रपति के निर्णय की स्वतंत्रता को सीमित न करे।
नाटो की स्थापना 1949 में सोवियत संघ को रोकने और यूरोप में स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाली रक्षा शक्ति के रूप में हुई थी। ट्रंप के दबाव में पिछले वर्ष नाटो नेताओं ने 2035 तक रक्षा व्यय को सकल घरेलू उत्पाद के पाँच प्रतिशत तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अमेरिका को गठबंधन से बाहर निकालने की संभावना जताई है, हालाँकि ऐसे किसी कदम के लिए उन्हें कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
दक्षिण एशिया के लिए यह घटनाक्रम वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत है। यूरोप में अमेरिकी सुरक्षा छत्र के कमजोर पड़ने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी संसाधनों का पुनर्आवंटन संभव है, जिसका सीधा प्रभाव भारत और उसके पड़ोसी देशों की सामरिक स्थिति पर पड़ सकता है। अंकारा शिखर सम्मेलन में इस बात पर स्पष्टता आने की उम्मीद है कि सदस्य देश सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं और व्यय लक्ष्यों पर किस प्रकार आगे बढ़ेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अंकारा शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले, ट्रंप ने नाटो पर तीखा हमला करते हुए अमेरिका की एकतरफा प्रतिबद्धता को हास्यास्पद बताया। पर्दे के पीछे की रिपोर्टों से अमेरिकी प्रशासन में अंदरूनी कलह का पता चलता है, रक्षा सचिव यूरोप में सैनिकों की और कटौती पर जोर दे रहे हैं, लेकिन विदेश मंत्री ने रोक दिया। इस घटना से यूरोपीय राजधानियों में ट्रान्साटलांटिक गठबंधन के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर नाटो सहयोगियों पर निशाना साधा, अमेरिकी समर्थन के मौजूदा स्तर को 'हास्यास्पद' बताया और अधिक पारस्परिकता की मांग की। साझेदारों से परामर्श किए बिना दिए गए उनके बयान, अंकारा शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आए हैं और यूरोपीय रक्षा खर्च पर उनकी लंबे समय से चली आ रही नाराजगी को रेखांकित करते हैं। लहजा गठबंधन की एकजुटता को लेकर हल्की चिंता का है, लेकिन खुले तौर पर चेतावनी नहीं है।
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