
अमेरिकी सरकार ने रोके उन्नत एआई मॉडल, स्वास्थ्य और शिक्षा पर गहराता संकट
ओपनएआई और एंथ्रोपिक के नए मॉडलों पर पाबंदी, चिकित्सीय दावों पर सवाल, और एआई पर निर्भरता से सीखने की क्षमता में गिरावट—सभी मोर्चों पर बहस तेज़।
अमेरिकी सरकार ने प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों को अपने सबसे उन्नत मॉडलों को रिलीज़ से 30 दिन पहले समीक्षा हेतु प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस कदम के बाद ओपनएआई ने जीपीटी-5.6 (सोल, टेरा, लूना) का पूर्वावलोकन केवल सरकार से स्वीकृत साझेदारों तक सीमित कर दिया, जबकि एंथ्रोपिक ने अपने फेबल 5 मॉडल को विदेशी उपयोगकर्ताओं से पूरी तरह हटा लिया। पूर्व व्हाइट हाउस सलाहकार डीन बॉल ने चेतावनी दी कि ऐसे प्रतिबंध वास्तविक लाइसेंसिंग व्यवस्था बना सकते हैं और चीन को एआई दौड़ में अनुचित लाभ पहुंचा सकते हैं।
इसी दौरान, दोनों कंपनियाँ स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आक्रामक विस्तार कर रही हैं। ओपनएआई के चैटजीपीटी हेल्थ ने कंपनी के अपने हेल्थबेंच मानकों पर चिकित्सीय त्रुटि दर में 71 प्रतिशत गिरावट का दावा किया है, लेकिन इसका स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ। एंथ्रोपिक का क्लॉड फॉर हेल्थकेयर सिम्युलेटेड केसों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, फिर भी विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि असली क्लिनिकल परिस्थितियों में एआई की विश्वसनीयता साबित नहीं हुई। मानसिक स्वास्थ्य सलाह के लिए करोड़ों लोग सामान्य प्रयोजन वाले एआई का उपयोग कर रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ मॉडल भी बाज़ार में आ रहे हैं—पर डेटा के बिखराव और उपयोग में अचानक बदलाव की दिक्कतें बरकरार हैं।
शैक्षिक और संज्ञानात्मक स्तर पर भी चुनौतियाँ गहरा रही हैं। एमआईटी के 2023 के एक अध्ययन में पाया गया कि एआई टूल से काम करने वाले प्रोग्रामर नए प्रकार की त्रुटियाँ पहचानने में कमज़ोर पड़ गए; स्टैनफोर्ड के शोध में छात्रों ने गलत उत्तरों को भी आत्मविश्वासपूर्ण भाषा के कारण स्वीकार कर लिया। दूसरी ओर, उद्योग जगत में ‘लूप इंजीनियरिंग’ के कारण एआई एजेंट स्वतः कार्य कर रहे हैं, लेकिन टोकन खर्च अप्रत्याशित रूप से बढ़ने से एक्सेंचर जैसी कंपनियों को पीडीएफ को प्रेज़ेंटेशन में बदलने जैसे मामूली कामों पर एआई इस्तेमाल रोकना पड़ा है। कंपनियाँ अब ‘ज़्यादा से ज़्यादा उपयोग’ की बजाय हर खर्च का औचित्य माँग रही हैं।
इस बीच, एआई के दार्शनिक पहलू भी उभर रहे हैं—बिना भावनाओं या शारीरिक अनुभव के उत्पन्न सामग्री रचनात्मकता और जवाबदेही की पारंपरिक अवधारणाओं को चुनौती देती है। जब एआई न्याय और भर्ती जैसी प्रणालियों में प्रवेश करता है तो पूर्वाग्रह का खतरा वास्तविक है, जैसा अमेरिकी अदालतों के कॉम्पास सॉफ़्टवेयर ने दिखाया। अगली निर्णायक घड़ी अमेरिकी सरकार की मॉडल समीक्षा के नतीजों और संभावित अंतरराष्ट्रीय मानकों की बनेगी, जो भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों की एआई पहुंच और नीतियों को भी प्रभावित करेगी।
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