
शेख हमद के निधन पर दोहा में शोक संवेदनाओं का सिलसिला, अरब जगत से परे वैश्विक नेताओं की उपस्थिति
पूर्व अमीर के निधन के बाद तीन दिवसीय राजकीय शोक के दौरान लुसैल पैलेस में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने संवेदना व्यक्त की, जो कतर की कूटनीतिक हैसियत को रेखांकित करता है।
कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के रविवार को 74 वर्ष की आयु में निधन के बाद सोमवार से लुसैल पैलेस में तीन दिवसीय औपचारिक शोक संवेदना सत्र शुरू हुआ। अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने पहले दिन लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन, मॉरिटानिया के राष्ट्रपति मोहम्मद औलद शेख अल-ग़ज़वानी, लीबिया की राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख मोहम्मद यूनुस अल-मनफ़ी और रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागामे सहित कई राष्ट्राध्यक्षों व शासनाध्यक्षों की शोक संवेदनाएं स्वीकार कीं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री नवाफ़ सलाम भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
अरब क्षेत्र से संवेदना प्रकट करने वालों में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल विशेष रूप से चर्चा में रहे। अमीरात की ओर से उपराष्ट्रपति शेख मंसूर बिन ज़ायद अल नाहयान और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाहयान ने दोहा पहुंचकर शोक जताया, जबकि बहरीन के युवराज सलमान बिन हमद अल खलीफा ने भी लुसैल पैलेस में उपस्थिति दर्ज कराई। कूटनीतिक हलकों में इसे इस संदर्भ में देखा जा रहा है कि 2017 में कतर के खिलाफ नाकेबंदी का नेतृत्व करने वाले ये देश अब एक पूर्व नेता के निधन पर औपचारिक एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं। अल्जीरिया ने राष्ट्रपति अब्दुल मजीद तब्बून के निर्देश पर राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष अज़्ज़ूज़ नासिरी के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय शिष्टमंडल भेजा, जिसमें आंतरिक मंत्री और रक्षा मंत्रालय के महासचिव शामिल थे।
लेबनान की ओर से शोक संवेदनाओं का दायरा व्यापक रहा। राष्ट्रपति आउन के अलावा, संसद अध्यक्ष नबीह बेरी के प्रतिनिधि के रूप में अमल आंदोलन के एक प्रतिनिधिमंडल ने दोहा में और बेरूत स्थित कतरी दूतावास में शोक व्यक्त किया। अमल नेताओं ने अपने संवेदना पत्र में इस बात पर जोर दिया कि “लेबनानी, विशेषकर दक्षिण के लोग, कठिनतम परिस्थितियों में दिवंगत अमीर के साथ खड़े रहने को कभी नहीं भूलेंगे।” लेबनान के रक्षा मंत्री मिशेल मंसी ने भी बेरूत स्थित दूतावास में जाकर 2006 के युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और 2008 के दोहा समझौते में शेख हमद की भूमिका को याद किया। ईरान से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने तेहरान स्थित कतरी दूतावास में शोक संदेश भिजवाया, जिसमें दिवंगत अमीर की कतर के विकास में सेवाओं का उल्लेख किया गया।
क्षेत्रीय विश्लेषकों के अनुसार, शोक संवेदनाओं का यह व्यापक भौगोलिक और राजनीतिक विस्तार शेख हमद की विरासत को रेखांकित करता है, जिन्होंने 1995 में सत्ता संभालने के बाद कतर को एक प्रमुख मध्यस्थ और ऊर्जा निर्यातक के रूप में स्थापित किया। अल्जीरियाई प्रधानमंत्री सैफी ग़रीब ने अल्जीयर्स स्थित कतरी दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि दिवंगत अमीर ने “संवाद और मध्यस्थता को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिससे दोहा अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का केंद्र बन गया।” उन्होंने अल्जीरियाई क्रांति में शेख हमद की प्रारंभिक रुचि और अल्जीरिया के बयाद प्रांत से उनके विशेष लगाव का भी जिक्र किया।
राजकीय शोक की अवधि बुधवार तक जारी रहेगी, जिसके दौरान और अधिक प्रतिनिधिमंडलों के दोहा पहुंचने की संभावना है। कतर सरकार ने चार दिनों के राष्ट्रीय शोक और झंडे आधे झुकाए रखने की घोषणा की है। दक्षिण एशिया के संदर्भ में, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की उपस्थिति कतर के साथ द्विपक्षीय संबंधों—विशेषकर ऊर्जा सहयोग और श्रम समझौतों—के महत्व को इंगित करती है, जबकि भारत की ओर से अभी तक किसी उच्च-स्तरीय यात्रा की सूचना नहीं है, हालांकि राजनयिक सूत्रों के अनुसार नई दिल्ली द्वारा उचित माध्यम से शोक संवेदना प्रेषित की जा चुकी है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +0.70 | aligned |
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Lebanon and Algeria pay homage to the father emir as a protector and mediator, highlighting his crucial role in times of crisis.
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