
अमेरिका ने ईरानी टीम को सिएटल में मिस्र के खिलाफ निर्णायक मुकाबले से पहले दो दिन की छूट दी
विश्व कप के ग्रुप जी में शीर्ष पर काबिज मिस्र और दो ड्रॉ के बाद दूसरे स्थान पर मौजूद ईरान के बीच शुक्रवार को होने वाला मुकाबला अब यात्रा प्रतिबंधों में ढील के बाद नए समीकरणों के साथ खेला जाएगा।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने मंगलवार को घोषणा की कि ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को सिएटल में मिस्र के खिलाफ 26 जून को होने वाले अपने तीसरे ग्रुप मैच से दो दिन पहले देश में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। यह ढील पिछले दो मुकाबलों के लिए लागू 24 घंटे की सख्त समयसीमा से दोगुनी है, हालांकि टीम को मैच खत्म होते ही अमेरिकी धरती छोड़नी होगी। विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल अपरिवर्तित हैं और यह कदम लंबी यात्रा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
ईरानी टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान मैक्सिको के तिहुआना शहर में बेस कैंप बनाए हुए है, जबकि उसके सभी ग्रुप मैच अमेरिकी धरती पर हो रहे हैं। शुरुआत में टक्सन, एरिज़ोना में ठिकाना बनाने की योजना थी, लेकिन अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वीज़ा और सुरक्षा संबंधी दिक्कतों ने उसे मैक्सिको स्थानांतरित करने पर मजबूर कर दिया। लॉस एंजिल्स में पहले दो मैचों—न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 2-2 और बेल्जियम के खिलाफ 0-0—से ठीक एक दिन पहले ही टीम को अमेरिका आने दिया गया और मैच के बाद तुरंत लौटना पड़ा। कोच अमीर ग़लेनोई ने इसे “पूरे विश्व कप की सबसे प्रताड़ित टीम” करार दिया और खिलाड़ियों ने शारीरिक रिकवरी के लिए पर्याप्त समय न मिलने की शिकायत की। ईरानी फुटबॉल महासंघ ने फीफा में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की मंशा जताई थी।
दूसरी ओर, मिस्र की टीम को भी यात्रा संबंधी अप्रत्याशित रुकावट का सामना करना पड़ा। न्यूज़ीलैंड को वैंकूवर में 3-1 से हराने के बाद मिस्र का दल सीधे सिएटल जाकर ईरान के खिलाफ तैयारी शुरू करना चाहता था, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें शहर में रुकने की अनुमति नहीं दी। मजबूरन टीम को अपने बेस स्पोकेन लौटना पड़ा, जो सिएटल से लगभग 450 किलोमीटर दूर है। कोच होसाम हसन ने कहा कि यह निर्णय खिलाड़ियों की शारीरिक थकान को कम करने की रणनीति के विपरीत गया।
ग्रुप जी में मिस्र चार अंकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि ईरान और बेल्जियम दो-दो अंक लेकर दूसरे-तीसरे स्थान पर हैं। न्यूज़ीलैंड एक अंक के साथ सबसे नीचे है। ईरान ने दोनों मैच ड्रॉ खेले हैं और अगर वह मिस्र को हराता है तो पहली बार नॉकआउट चरण में प्रवेश कर सकता है; ड्रॉ की स्थिति में भी अन्य परिणामों के आधार पर क्वालीफिकेशन की संभावना बनी रहेगी। मिस्र के लिए जीत या ड्रॉ ग्रुप विजेता के रूप में अगले दौर में जाने का रास्ता सुनिश्चित करेगा।
सिएटल के ल्यूमन फील्ड में होने वाला यह मुकाबला सिर्फ अंकगणित तक सीमित नहीं है। मेज़बान शहर ने इसे ‘प्राइड गेम’ घोषित किया है, जिसके तहत स्टेडियम के आसपास समलैंगिक समुदाय के प्रतीकों और इंद्रधनुषी झंडों के प्रदर्शन की योजना है। ईरान और मिस्र दोनों के फुटबॉल महासंघों ने फीफा की राजनीतिक तटस्थता की धाराओं का हवाला देते हुए इसका विरोध किया है और स्टेडियम में इंद्रधनुषी झंडों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की है। फीफा ने अब तक स्थानीय आयोजन समिति के अधिकार क्षेत्र का हवाला दिया है। इन सबके बीच, शुक्रवार की रात दोनों टीमें मैदान पर उतरेंगी जहाँ एक ओर ईरान इतिहास रचने की कोशिश करेगा, वहीं मिस्र ग्रुप शीर्ष पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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मिस्र की राष्ट्रीय टीम को न्यूजीलैंड को हराने के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के खिलाफ मैच से पहले सिएटल में रहने की अनुमति नहीं दी। टीम को अपनी यात्रा योजनाएं बदलनी पड़ीं और तैयारी में बाधा आई।
व्हाइट हाउस विश्व कप के लिए ईरान पर लगाए गए सख्त यात्रा प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल मैच से एक दिन पहले प्रवेश और उसी दिन निकासी की अनुमति देते हैं। ईरानी कोच ने अपनी टीम को टूर्नामेंट की 'सबसे उत्पीड़ित' टीम बताया, जबकि सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों से बदलाव पर चर्चा हो रही है।
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