
मोसाद ने अहमदीनेजाद को ईरान का भावी नेता बनाने की योजना बनाई: रिपोर्ट
न्यूयॉर्क टाइम्स और हारेत्ज़ की जांच में दावा किया गया है कि इज़राइल ने पूर्व राष्ट्रपति को भर्ती कर शासन परिवर्तन की एक विस्तृत कार्रवाई का खाका तैयार किया था, जो फरवरी में विफल हो गई।
अमेरिकी और इज़राइली मीडिया में प्रकाशित जांच रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को वर्षों तक एक गुप्त परिसंपत्ति के रूप में विकसित किया और शासन परिवर्तन की स्थिति में उन्हें देश का अगला नेता बनाने की योजना बनाई। 'ऑपरेशन पुस इन बूट्स' नामक इस योजना के तहत, फरवरी 2024 में युद्ध शुरू होने पर इज़राइली हवाई हमलों के बाद कुर्द लड़ाकों को ईरान के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में प्रवेश कराना था, जिससे एक व्यापक विद्रोह की शुरुआत होती और अंततः तेहरान तक पहुंचा जाता।
इज़राइली चैनल 13 और जेरूसलम पोस्ट के विवरण के अनुसार, मोसाद ने अनुमान लगाया था कि हज़ारों युवा कुर्द इस अभियान से जुड़ेंगे और यह आंदोलन लाखों लोगों के विद्रोह में बदल जाएगा। इसके लिए इज़राइल ने ईरान-इराक सीमा पर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों को निशाना बनाने, हमास और हिज़्बुल्लाह से जब्त हथियार कुर्द बलों को देने और हवाई सुरक्षा प्रदान करने की तैयारी की थी। हालांकि, तुर्की के हस्तक्षेप को इस विफलता का प्रमुख कारण बताया गया है—इज़राइली सैन्य खुफिया के पूर्व प्रमुख तामिर हेमैन के अनुसार, राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने कुर्दों को रणनीतिक खतरा मानते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को योजना रद्द करने के लिए राजी कर लिया। साथ ही, इज़राइली विश्लेषकों ने सफलता की संभावना कम आंकी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तज़ाची हानेगबी ने इसके कुछ हिस्सों को 'विज्ञान कथा' करार दिया।
ईरानी पक्ष ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। सरकारी मीडिया और अहमदीनेजाद के कार्यालय ने इसे 'हॉलीवुड शैली के आरोप' और मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा बताया। अहमदीनेजाद के प्रवक्ता ने कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पूरी तरह झूठी है और इसका उद्देश्य ईरान में आंतरिक विभाजन पैदा करना है। इस बीच, अहमदीनेजाद सार्वजनिक रूप से सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल हुए, जिसे ईरानी टेलीविजन ने प्रसारित किया—यह फरवरी के बाद उनकी दूसरी पुष्ट सार्वजनिक उपस्थिति थी।
अमेरिकी और इज़राइली अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि अहमदीनेजाद का मोसाद के साथ संपर्क 2022 के आसपास शुरू हुआ, जब वे पर्यावरण सम्मेलनों के बहाने बुडापेस्ट और ग्वाटेमाला की यात्राओं पर गए। बुडापेस्ट की लुडोविका यूनिवर्सिटी के रेक्टर ने पुष्टि की कि उन्हें एक उच्च हंगेरियन अधिकारी ने अहमदीनेजाद को आमंत्रित करने को कहा था, ताकि 'दो दुश्मन आपस में बात कर सकें'। मोसाद के तत्कालीन प्रमुख डेविड बार्निया ने स्वयं बुडापेस्ट में उनसे मुलाकात की। रिपोर्टों के अनुसार, अहमदीनेजाद स्वयं को एक 'फारसी बोरिस येल्तसिन' के रूप में देखते थे और मानते थे कि वर्तमान व्यवस्था के रहते सत्ता में वापसी असंभव है।
वर्तमान में अहमदीनेजाद की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि वे नज़रबंद हैं, जबकि उनके कार्यालय ने इसे खारिज किया है। योजना के विफल होने के बाद, इस बात की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्या वास्तव में ऐसा कोई ऑपरेशन अस्तित्व में था या यह खुफिया एजेंसियों के बीच सूचना संचालन का हिस्सा है। फिलहाल, ईरानी शासन ने अहमदीनेजाद को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर यह संकेत देने का प्रयास किया है कि सब कुछ सामान्य है, जबकि क्षेत्रीय शक्तियों के बीच कुर्द कारक को लेकर तनाव बना हुआ है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.80 | critical |
| इज़राइली प्रेस | 0.00 | neutral |
The Mossad operation was a failed gamble, and Ahmadinejad ended up a hostage of the regime he was supposed to overthrow.
The paradox is highlighted: the man who wanted to wipe out Israel is recruited by Israel, but the plan fails and he remains a prisoner of the regime. The irony of fate makes the narrative plausible.
The military details of the plan (attacks on IRGC, Kurdish incursion) and Ahmadinejad's denial are omitted, which would complicate the reading of a simple failure.
The Mossad hatched a plot to destroy Iran, using Ahmadinejad as a puppet and the Kurds as mercenaries.
The plan is described in the most threatening details (targeted attacks, Kurdish invasion) to evoke fear and indignation, presenting Iran as a defenseless target of an external conspiracy.
The fact that the operation allegedly failed and that Ahmadinejad is now under regime control is omitted, elements that would reduce the perception of an immediate threat.
The Mossad tried to recruit Ahmadinejad, but he appeared in public and denied everything.
A concrete fact (the public appearance) is juxtaposed with the sensational revelation, creating an effect of doubt. The reporting of recent events weakens the thesis of a successful recruitment.
The details of the military plan and the analysis of the operation's failure are missing, which would give more weight to the NYT version.
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