
नीदरलैंड में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे की पहली इच्छामृत्यु, 2024 के कानूनी विस्तार के बाद पहला मामला
डच सरकार ने संसद को सूचित किया कि एक गंभीर रूप से बीमार बच्चे की इच्छामृत्यु की गई, जिसकी कानूनी प्रक्रिया की अब अभियोजन पक्ष समीक्षा करेगा।
नीदरलैंड ने 12 वर्ष से कम आयु के एक बच्चे की इच्छामृत्यु का पहला मामला दर्ज किया है। डच स्वास्थ्य मंत्री सोफी हरमन्स ने संसद को बताया कि यह प्रक्रिया 2025 के अंत में एक ऐसे बच्चे पर की गई जो असाध्य रोग से पीड़ित था और जिसकी पीड़ा असहनीय थी तथा ठीक होने की कोई संभावना नहीं थी। बच्चे की सटीक आयु, लिंग और चिकित्सीय स्थिति को गोपनीय रखा गया है। यह मामला फरवरी 2024 में लागू हुए कानूनी संशोधन के तहत सामने आया, जिसने एक से बारह वर्ष के बच्चों के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। सरकार के अनुसार, मामले की समीक्षा एक विशेष समिति द्वारा की गई और अब इसे लोक अभियोजन सेवा को भेजा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चिकित्सक ने सभी कानूनी आवश्यकताओं का पालन किया।
डच स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस आयु वर्ग में इच्छामृत्यु केवल उन्हीं मामलों में स्वीकार्य है जहाँ चिकित्सकीय दृष्टि से कोई विकल्प शेष न हो, माता-पिता या अभिभावक सहमत हों, और कम से कम एक स्वतंत्र चिकित्सक पुष्टि करे कि पीड़ा असहनीय है और उपशामक देखभाल से भी राहत संभव नहीं। यूरोपीय चिकित्सा संगठनों ने इस कदम को अत्यंत सीमित परिस्थितियों में अंतिम विकल्प बताया है, जबकि नीदरलैंड के भीतर धार्मिक और रूढ़िवादी समूहों ने इसकी नैतिक सीमाओं पर प्रश्न उठाए हैं। वैश्विक स्तर पर, बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, स्पेन, पुर्तगाल, कनाडा और कोलंबिया जैसे देशों में इच्छामृत्यु कानूनी है, जबकि जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड केवल सहायता प्राप्त आत्महत्या की अनुमति देते हैं।
इस घटनाक्रम ने बाल इच्छामृत्यु की नैतिक सीमाओं पर वैश्विक बहस को फिर से तेज़ कर दिया है। दक्षिण एशिया में, भारत का सर्वोच्च न्यायालय 2018 से निष्क्रिय इच्छामृत्यु (जीवन रक्षक प्रणाली हटाने) की अनुमति देता है, लेकिन सक्रिय इच्छामृत्यु अवैध है। भारतीय कानूनी विशेषज्ञ बताते हैं कि यह मामला उन न्यायक्षेत्रों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है जो अक्षम रोगियों के लिए जीवन के अंत के निर्णयों पर विधायी ढाँचे पर विचार कर रहे हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश में इच्छामृत्यु पूरी तरह प्रतिबंधित है, और धार्मिक संस्थाएँ इसे जीवन के प्रति अनादर मानती हैं।
नीदरलैंड ने 2002 में स्वैच्छिक इच्छामृत्यु को वैध किया था और 2014 में 12 वर्ष से अधिक आयु के अवयस्कों तथा एक वर्ष से कम के शिशुओं के लिए इसका विस्तार किया। 2024 का संशोधन विशेष रूप से उन बच्चों के लिए लाया गया जो जन्मजात गंभीर विकृतियों या चयापचय रोगों से पीड़ित हों। सरकारी अनुमान के अनुसार, प्रतिवर्ष पाँच से दस बच्चे ही इस श्रेणी में आ सकते हैं। 2024 में देश में कुल 9,958 इच्छामृत्यु के मामले दर्ज हुए, जो कुल मृत्यु का 5.8% थे। अब लोक अभियोजक यह निर्धारित करेगा कि चिकित्सक ने कानून का पालन किया या नहीं, और समीक्षा समिति की राय शीघ्र सार्वजनिक की जाएगी।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.40 | critical |
The Netherlands expands the right to euthanasia with procedural rigor, confirming its tradition of advanced bioethical regulation.
The decision is normalized by framing it as a logical extension of existing laws, using technical-legal vocabulary that neutralizes emotional charge.
The Netherlands crosses an ethical red line by applying euthanasia to children, raising questions about consent and the protection of minors.
A hierarchy of threats is built: from the specific case to a general danger for Western values, using expert testimonies and personal stories to amplify urgency.
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