
रूस की संपत्ति वृद्धि में दूसरा स्थान, लेकिन असली कहानी अरबपतियों की बढ़त की
यूबीएस रिपोर्ट के अनुसार रूस प्रति वयस्क औसत संपत्ति वृद्धि में दूसरे स्थान पर, परंतु यह वृद्धि अधिकांश नागरिकों की स्थिति नहीं दर्शाती।
स्विस बैंक यूबीएस की वार्षिक संपत्ति रिपोर्ट के अनुसार, 2020-2025 के बीच रूस में प्रति वयस्क औसत शुद्ध संपत्ति में 37% की वृद्धि हुई, जो दक्षिण कोरिया (55%) के बाद दुनिया में दूसरी सबसे तेज़ गति है। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि औसत संपत्ति में उछाल अक्सर अति-धनी वर्ग के कारण होता है, जिससे सामान्य नागरिकों की वास्तविक स्थिति छिप जाती है। यह चेतावनी रूसी संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार 2026 की पहली छमाही में ही शीर्ष अरबपतियों की संयुक्त संपत्ति 4.82 अरब डॉलर बढ़ गई।
वैश्विक स्तर पर, अरबपतियों की संख्या और संपत्ति रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। यूबीएस के अनुसार अप्रैल 2026 तक दुनिया में 3,302 अरबपति थे, जो पिछले वर्ष से 13% अधिक है। अमेरिका में सर्वाधिक 1,000 से अधिक अरबपति हैं, जबकि चीन (562), भारत (211), जर्मनी (193) और रूस (122) शीर्ष पाँच में शामिल हैं। दक्षिण कोरिया में अरबपतियों की संख्या 31 से बढ़कर 52 हो गई और उनकी कुल संपत्ति में 139% का इज़ाफ़ा हुआ। इसके विपरीत, सऊदी अरब और थाईलैंड में अरबपतियों की संख्या घटी। ऑक्सफैम के अनुसार, 2015 से अरबपतियों की संपत्ति में 6.5 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 14.6% है, जबकि जी7 देशों की मानवीय सहायता में 2026 में 28% की कटौती होने वाली है।
रूसी अरबपतियों की संपत्ति में यह वृद्धि व्यापक नहीं है। ब्लूमबर्ग इंडेक्स के अनुसार, एलेक्सी मोर्दाशोव (28.6 अरब डॉलर), लियोनिद मिखेलसन (25.5 अरब) और आंद्रेई मेल्निचेंको (20.6 अरब) जैसे उद्योगपतियों की संपत्ति में भारी इज़ाफ़ा हुआ, जबकि मिखाइल प्रोखोरोव की संपत्ति 5.46 अरब डॉलर घट गई और टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव की संपत्ति में 2.21 अरब डॉलर की गिरावट आई। यह असमानता दर्शाती है कि कच्चे माल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगपतियों को लाभ हुआ है, जबकि तकनीकी क्षेत्र के कुछ निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा।
ऑस्ट्रेलिया का मामला एक अलग विसंगति प्रस्तुत करता है। यूबीएस रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की माध्यिका वयस्क संपत्ति विश्व में तीसरे स्थान पर है, लेकिन स्थानीय शेयर बाज़ार का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। वित्त वर्ष 2026 में एएसएक्स 200 सूचकांक मात्र 2.8% बढ़ा, जबकि अमेरिकी एसएंडपी 500 में 20.8% और यूरोपीय स्टॉक्स 600 में 19% की तेज़ी रही। इसका कारण ऑस्ट्रेलियाई बाज़ार का खनन और बैंकिंग क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता है, जबकि तकनीकी शेयरों में भारी गिरावट आई। उदाहरण के लिए, सीएसएल के शेयर 52% और कोक्लियर के 59.6% टूट गए।
इटली के हफपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अत्यधिक गरीबी में कमी आई है—2000 में 75% वयस्कों की संपत्ति 10,000 डॉलर से कम थी, जो 2025 में घटकर 41% रह गई। लेकिन यह प्रगति असमानता के बढ़ते अंतर को छिपा नहीं सकती। नाइट फ्रैंक के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले पाँच वर्षों में वैश्विक अरबपतियों की संख्या 25% बढ़कर 3,915 तक पहुँच सकती है, जिसमें इंडोनेशिया, पोलैंड और वियतनाम जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएँ प्रमुख चालक होंगी। यह प्रवृत्ति नीति-निर्माताओं के लिए संपत्ति पुनर्वितरण और सामाजिक सुरक्षा पर नए सिरे से विचार करने का संकेत है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूसी राज्य मीडिया ने UBS रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि रूस दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से अमीर होता देश है। वे इस आंकड़े को राष्ट्रीय सफलता के रूप में पेश करते हैं, आंतरिक असमानताओं की पड़ताल किए बिना।
स्वतंत्र रूसी मीडिया विजयी कथा को खारिज करता है, यह दिखाते हुए कि विकास केवल अति-धनी लोगों द्वारा संचालित है। वे इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि अरबपतियों ने अरबों कमाए जबकि आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिला।
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