
होर्मुज में ईरानी हमले से भारतीय नाविक की मौत, भारत ने तेहरान से कड़ा विरोध दर्ज कराया
यूएई के दो टैंकरों पर क्रूज मिसाइल हमले के बाद भारत ने ईरानी राजनयिक को तलब कर वाणिज्यिक जहाजरानी पर हमले रोकने और क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत की अपील की।
होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी मार्ग में ओमानी जलक्षेत्र के भीतर ईरानी क्रूज मिसाइलों ने सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों—मोम्बासा और अल बहियाह—को निशाना बनाया, जिसमें एक भारतीय चालक दल सदस्य की मौत हो गई और दस अन्य घायल हो गए। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमले में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक जख्मी हुए, जिनमें चार की हालत गंभीर बनी हुई है। दोनों जहाजों पर आग लग गई थी, जिसे बाद में नियंत्रित कर लिया गया।
यूएई ने इस हमले को “अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन” और “क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” बताते हुए जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखा। वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने टेलीग्राम पर जारी बयान में कहा कि इन “उल्लंघनकारी सुपरटैंकरों” ने चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया, नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिए थे और एक खनन-युक्त मार्ग से गुज़रने का प्रयास कर रहे थे। आईआरजीसी के अनुसार, अमेरिका ने इन जहाजों को ओमानी जलक्षेत्र के दक्षिणी रास्ते पर भेजकर “धोखा” दिया।
भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ईरानी उप-राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया और “नाविकों को निशाना बनाने वाली हिंसा” की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने बताया कि दोनों जहाजों पर सवार 46 सदस्यीय दल में 30 भारतीय थे; अल बहियाह पर सवार 12 में से एक की मौत और एक घायल हुआ, जबकि मोम्बासा पर 18 में से नौ घायल हुए, जिनमें दो गंभीर हैं। भारत ने होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में मुक्त और सुरक्षित नौवहन बहाल करने तथा वाणिज्यिक जहाजरानी पर हमले तत्काल रोकने का आह्वान किया।
यह घटना अमेरिका-ईरान युद्धविराम टूटने के बाद बढ़ते तनाव के बीच हुई, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी फिर लागू करने और जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के पांचवें हिस्से का मार्ग है और फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ही अमेरिका व ईरान के बीच तनाव का केंद्र बना हुआ है। इस संघर्ष में अब तक कम से कम चौदह भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 9 प्रतिशत से अधिक उछलकर 83 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव दर्शाता है।
भारत ने पश्चिम एशिया में फिर से भड़की हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और बातचीत व कूटनीति की ओर लौटने का आग्रह किया है। भारतीय मिशन यूएई प्रशासन के संपर्क में प्रभावित नाविकों की सहायता में जुटे हैं। फिलहाल, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां जारी हैं और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −1.00 | critical |
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| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.80 | critical |
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भारत ईरान से तुरंत वाणिज्यिक शिपिंग पर हमले बंद करने की मांग करता है, तेहरान को अपने नागरिक की मौत और अपने नाविकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ठहराता है।
प्रभावित भारतीय नागरिकों की सटीक संख्या और राजनयिक समन का बार-बार उल्लेख करके, भारत खुद को सीधे पीड़ित पक्ष के रूप में स्थापित करता है जिसके पास जवाबदेही मांगने का अधिकार है।
हमले से पहले ईरान पर अमेरिकी हमलों के संदर्भ को छोड़ दिया गया है, जिससे घटना को एक अकारण ईरानी आक्रमण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यूएई ने ईरान पर अपने जहाजों पर 'बेशर्म' और अकारण हमले का आरोप लगाया, नागरिक हताहतों और समुद्री सुरक्षा में व्यवधान पर प्रकाश डाला।
मजबूत नैतिक भाषा ('बेशर्म') का उपयोग करके और निर्दोष जीवन की कीमत पर जोर देकर, कथा ईरानी कार्यों को अवैध ठहराती है और हमले को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत करती है।
ईरान का दावा कि टैंकरों ने चेतावनियों को नजरअंदाज किया और खदान वाले क्षेत्र में थे, को छोड़ दिया गया है, साथ ही अमेरिकी हमलों का संदर्भ भी जो हमले को भड़का सकता था।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड टैंकर हमलों को अमेरिकी आक्रमण की आवश्यक प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है, दावा करता है कि जहाजों ने चेतावनियों को नजरअंदाज किया और खदान वाले क्षेत्र में प्रवेश किया।
अमेरिकी हमलों के साथ ईरान के सैन्य औचित्य का हवाला देकर, कथा एक सममित संघर्ष बनाती है जहां प्रत्येक पक्ष के कार्यों को प्रतिक्रियाओं के रूप में समझाया जाता है।
यह तथ्य कि यूएई और भारत हमले को अकारण बताकर निंदा करते हैं, को कम करके दिखाया गया है, साथ ही नागरिक हताहत को भी।
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