
रूस-चीन का 11वां संयुक्त हवाई गश्त: जापान सागर से प्रशांत महासागर तक छह घंटे की उड़ान
मॉस्को और बीजिंग ने इसे वार्षिक सैन्य सहयोग का हिस्सा बताया, जबकि सियोल ने अपने वायु रक्षा क्षेत्र में प्रवेश पर लड़ाकू विमान तैनात किए।
रूस और चीन ने 27 जून को जापान सागर, पूर्वी चीन सागर और पश्चिमी प्रशांत महासागर के ऊपर लगभग छह घंटे तक संयुक्त सामरिक हवाई गश्त की। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान में रूस के टीयू-95एमएस और चीन के एच-6के बमवर्षक विमान शामिल थे, जिन्हें पूरे मार्ग पर सुखोई-30एसएम, सुखोई-35एस और जे-16 लड़ाकू विमानों से सुरक्षा मिली। मंत्रालय ने बताया कि कुछ चरणों में विदेशी लड़ाकू विमानों ने भी इनकी निगरानी की, लेकिन किसी भी देश के वायु क्षेत्र का उल्लंघन नहीं हुआ।
मॉस्को और बीजिंग ने इस गश्त को 2026 की वार्षिक सैन्य सहयोग योजना का हिस्सा करार दिया और कहा कि यह किसी तीसरे देश के विरुद्ध नहीं है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस ऑपरेशन ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को संयुक्त रूप से बनाए रखने की उनकी प्रतिबद्धता और क्षमता को प्रदर्शित किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सभी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप थीं और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से असंबद्ध थीं।
दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ ने पुष्टि की कि चीनी और रूसी विमानों ने पूर्वी सागर और दक्षिणी सागर के ऊपर कोरियाई वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (केएडीआईजेड) में प्रवेश किया और बाद में बाहर निकल गए। सियोल ने कहा कि उसने एहतियातन वायु सेना के लड़ाकू विमान तैनात किए, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरियाई वायु क्षेत्र का उल्लंघन नहीं हुआ। इससे पहले दिसंबर 2025 में हुई 10वीं संयुक्त गश्त के दौरान सियोल और टोक्यो ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसमें नौ विमानों ने केएडीआईजेड में प्रवेश किया था।
यह 2019 के बाद से दोनों देशों का 11वां संयुक्त हवाई गश्त है, जो रूस-चीन सैन्य समन्वय की गहराई को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अभियान अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में होते हैं और कानूनी रूप से पूर्व सूचना अनिवार्य नहीं है, फिर भी ये क्षेत्रीय राजधानियों में नियमित कूटनीतिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। मॉस्को और बीजिंग इसे पारंपरिक साझेदारी का विस्तार बताते हैं, जबकि सियोल और टोक्यो इसे अपनी सुरक्षा चिंताओं से जोड़कर देखते हैं। अगला प्रमुख संयुक्त अभ्यास अगस्त 2026 में जापान सागर में 'समुद्री संपर्क-2025' के रूप में प्रस्तावित है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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यह संयुक्त गश्त एक नियमित अभियान था जो रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वायु सेनाओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्ण अनुपालन में काम किया और यह किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं था। ग्यारहवां ऐसा मिशन द्विपक्षीय सैन्य सहयोग की गहराई को रेखांकित करता है।
जापान के आसपास चीनी और रूसी बमवर्षकों की संयुक्त उड़ान एक उकसाने वाला शक्ति प्रदर्शन है जो गंभीर सुरक्षा चिंताएँ पैदा करता है। जापान के रक्षा मंत्रालय ने गहरी बेचैनी व्यक्त की और निगरानी बढ़ा दी। इस घटना को बीजिंग और मॉस्को के बीच गहराते सैन्य तालमेल को दिखाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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