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मैनचेस्टर से मॉन्ट्रियल तक: स्टेडियम और कोचिंग के बड़े फैसलों का सप्ताहईरान का दावा: हॉरमुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बरकरार, अमेरिका से बातचीत के बाद भी पूर्व-युद्ध स्थिति में वापसी से इनकारयूरोज़ोन में मुद्रास्फीति ऊंची बनी रह सकती है, शांति समझौते के बावजूद: ईसीबी अधिकारीअमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू का स्वतंत्र रक्षा उत्पादन पर जोरOracle ने एक साल में 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की, AI पर 70 अरब डॉलर खर्च की योजनाहालैंड की दोहरी मार से नॉर्वे ने सेनेगल को हराया, 28 साल बाद नॉकआउट में जगह बनाईसंयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने को नरसंहार करार दियाहार के बाद जीत की ज़रूरत: पनामा और क्रोएशिया के लिए टोरंटो में करो या मरो का मुक़ाबलामैनचेस्टर से मॉन्ट्रियल तक: स्टेडियम और कोचिंग के बड़े फैसलों का सप्ताहईरान का दावा: हॉरमुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बरकरार, अमेरिका से बातचीत के बाद भी पूर्व-युद्ध स्थिति में वापसी से इनकारयूरोज़ोन में मुद्रास्फीति ऊंची बनी रह सकती है, शांति समझौते के बावजूद: ईसीबी अधिकारीअमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू का स्वतंत्र रक्षा उत्पादन पर जोरOracle ने एक साल में 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की, AI पर 70 अरब डॉलर खर्च की योजनाहालैंड की दोहरी मार से नॉर्वे ने सेनेगल को हराया, 28 साल बाद नॉकआउट में जगह बनाईसंयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने को नरसंहार करार दियाहार के बाद जीत की ज़रूरत: पनामा और क्रोएशिया के लिए टोरंटो में करो या मरो का मुक़ाबला
रक्षा एवं सुरक्षासोमवार, 22 जून 2026

अमेरिका ने भारत को 482 मिलियन डॉलर के रक्षा समर्थन की अधिसूचना दी, यूएई से ब्रह्मोस सौदे पर बातचीत तेज

भारत एक ओर अमेरिकी सैन्य सहायता प्राप्त कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों को स्वदेशी हथियार निर्यात करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जबकि बांग्लादेश चीनी लड़ाकू विमानों और ब्राजील यूरोपीय वायु रक्षा प्रणाली की ओर झुक रहा है।

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) ने 17 जून को भारत के अपाचे हेलीकॉप्टरों और एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के लिए 48.22 करोड़ डॉलर के रखरखाव सहायता पैकेज की औपचारिक अधिसूचना जारी की। इसके समानांतर, भारत सरकार के चार सूत्रों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली बेचने के लिए बातचीत प्रारंभिक चरण में तेजी से आगे बढ़ रही है। यह दोहरी भूमिका भारत की बढ़ती रक्षा कूटनीति को रेखांकित करती है, जहां वह एक प्रमुख खरीदार के साथ-साथ उभरता निर्यातक भी है।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह प्रस्तावित बिक्री भारत की वर्तमान और भविष्य की खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाएगी तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साझेदार को मजबूत करेगी। वहीं यूएई की रुचि के पीछे पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ईरानी हमलों का अनुभव और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की आवश्यकता बताई जाती है। भारतीय सूत्रों का कहना है कि ब्रह्मोस के लिए रूस की मंजूरी आवश्यक है, परंतु मॉस्को और अबू धाबी के घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए इसमें बाधा आने की संभावना कम है। दूसरी ओर, इंडोनेशिया में भारत से 45 करोड़ डॉलर की ब्रह्मोस खरीद की योजना को लेकर संदेह उठ रहे हैं। जनरल अचमद यानी विश्वविद्यालय के रक्षा विशेषज्ञ योहानेस सुलेमान ने राजकोषीय दबाव और मिसाइल की 290 किलोमीटर से कम सीमित मारक क्षमता का हवाला देते हुए सौदा रद्द करने की मांग की है।

इन घटनाक्रमों से वैश्विक हथियार बाजार में पुनर्संरेखण के संकेत मिलते हैं। बांग्लादेश अपने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान 24 चीनी जे-10सीई लड़ाकू विमानों की खरीद को अंतिम रूप देने की उम्मीद कर रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 4 करोड़ डॉलर प्रति विमान है। ढाका और बीजिंग के बीच 17 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर अपेक्षित हैं, जिनमें रक्षा सहयोग के अलावा तीस्ता परियोजना और शी जिनपिंग की चार प्रमुख पहलें शामिल हैं। ब्राजील में, सेना इतालवी कंपनी एमबीडीए से उन्नत मॉड्यूलर वायु रक्षा प्रणाली ईएमएडीएस की खरीद के अंतिम चरण में है, जिसकी कीमत लगभग 60 करोड़ डॉलर है। भारत की आकाश प्रणाली को कम उन्नत मानते हुए ब्राजील ने वार्ता स्थगित कर दी थी, जबकि ईएमएडीएस सौदे में एम्ब्रेयर द्वारा स्थानीय रडार निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी शामिल है।

स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (सिपरी) के आंकड़ों के अनुसार, 2021-25 के बीच पश्चिम एशिया में अमेरिका 54 प्रतिशत हथियार आयात का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है, लेकिन यूएई अब आपूर्तिकर्ता आधार में विविधता लाना चाहता है। भारत के लिए यह सौदा सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते के प्रति रणनीतिक संकेत भी है। इंडोनेशिया में ब्रह्मोस की प्रभावशीलता पर प्रश्न इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि नौसेना के पास पहले से 200 किलोमीटर मारक क्षमता वाली फ्रांसीसी एक्सोसेट मिसाइलें मौजूद हैं। अमेरिकी पैकेज के तहत बोइंग और लॉकहीड मार्टिन अपाचे के लिए, जबकि ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स एम777 के लिए मुख्य ठेकेदार होंगी। भारत-यूएई वार्ता तेजी से आगे बढ़ रही है, बांग्लादेश अगस्त तक जे-10सीई समझौते पर हस्ताक्षर की आशा कर रहा है, और ब्राजील की ईएमएडीएस खरीद पर अंतिम निर्णय आने वाले महीनों में अपेक्षित है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

28%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेसरूसी और सीआईएस प्रेस
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताविजय

भारत एक प्रमुख रक्षा साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, वाशिंगटन ने अपाचे हेलीकॉप्टरों और M777 हॉवित्जरों के लिए 482 मिलियन डॉलर के सहायता पैकेज को मंजूरी दी है, जबकि नई दिल्ली संयुक्त अरब अमीरात को ब्रह्मोस मिसाइलों और आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली की बिक्री पर बातचीत कर रहा है। इसी समय, बांग्लादेश की 24 चीनी J-10CE लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना बीजिंग की ओर झुकाव का संकेत देती है, जो क्षेत्रीय गठबंधनों का नक्शा बदल रही है।

रूसी और सीआईएस प्रेस/ व्यापार
विजयव्यावहारिकता

ब्रह्मोस मिसाइल, एक रूसी-भारतीय संयुक्त उद्यम, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई गति पकड़ रही है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद चौथा ग्राहक बनने के लिए बातचीत कर रहा है। यह विस्तार सिस्टम की बढ़ती व्यावसायिक अपील और मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में इसकी रणनीतिक पहुंच को उजागर करता है।

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मैनचेस्टर से मॉन्ट्रियल तक: स्टेडियम और कोचिंग के बड़े फैसलों का सप्ताह·ईरान का दावा: हॉरमुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बरकरार, अमेरिका से बातचीत के बाद भी पूर्व-युद्ध स्थिति में वापसी से इनकार·यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति ऊंची बनी रह सकती है, शांति समझौते के बावजूद: ईसीबी अधिकारी·अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू का स्वतंत्र रक्षा उत्पादन पर जोर·Oracle ने एक साल में 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की, AI पर 70 अरब डॉलर खर्च की योजना·हालैंड की दोहरी मार से नॉर्वे ने सेनेगल को हराया, 28 साल बाद नॉकआउट में जगह बनाई·संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने को नरसंहार करार दिया·हार के बाद जीत की ज़रूरत: पनामा और क्रोएशिया के लिए टोरंटो में करो या मरो का मुक़ाबला·मैनचेस्टर से मॉन्ट्रियल तक: स्टेडियम और कोचिंग के बड़े फैसलों का सप्ताह·ईरान का दावा: हॉरमुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बरकरार, अमेरिका से बातचीत के बाद भी पूर्व-युद्ध स्थिति में वापसी से इनकार·यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति ऊंची बनी रह सकती है, शांति समझौते के बावजूद: ईसीबी अधिकारी·अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू का स्वतंत्र रक्षा उत्पादन पर जोर·Oracle ने एक साल में 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की, AI पर 70 अरब डॉलर खर्च की योजना·हालैंड की दोहरी मार से नॉर्वे ने सेनेगल को हराया, 28 साल बाद नॉकआउट में जगह बनाई·संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने गाजा में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने को नरसंहार करार दिया·हार के बाद जीत की ज़रूरत: पनामा और क्रोएशिया के लिए टोरंटो में करो या मरो का मुक़ाबला·
अपडेट 03:45 am3 भाषाएँ · 3 स्रोत
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सोमवार, 22 जून 2026

अमेरिका ने भारत को 482 मिलियन डॉलर के रक्षा समर्थन की अधिसूचना दी, यूएई से ब्रह्मोस सौदे पर बातचीत तेज

भारत एक ओर अमेरिकी सैन्य सहायता प्राप्त कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों को स्वदेशी हथियार निर्यात करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जबकि बांग्लादेश चीनी लड़ाकू विमानों और ब्राजील यूरोपीय वायु रक्षा प्रणाली की ओर झुक रहा है।

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) ने 17 जून को भारत के अपाचे हेलीकॉप्टरों और एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के लिए 48.22 करोड़ डॉलर के रखरखाव सहायता पैकेज की औपचारिक अधिसूचना जारी की। इसके समानांतर, भारत सरकार के चार सूत्रों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली बेचने के लिए बातचीत प्रारंभिक चरण में तेजी से आगे बढ़ रही है। यह दोहरी भूमिका भारत की बढ़ती रक्षा कूटनीति को रेखांकित करती है, जहां वह एक प्रमुख खरीदार के साथ-साथ उभरता निर्यातक भी है।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह प्रस्तावित बिक्री भारत की वर्तमान और भविष्य की खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाएगी तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साझेदार को मजबूत करेगी। वहीं यूएई की रुचि के पीछे पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ईरानी हमलों का अनुभव और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की आवश्यकता बताई जाती है। भारतीय सूत्रों का कहना है कि ब्रह्मोस के लिए रूस की मंजूरी आवश्यक है, परंतु मॉस्को और अबू धाबी के घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए इसमें बाधा आने की संभावना कम है। दूसरी ओर, इंडोनेशिया में भारत से 45 करोड़ डॉलर की ब्रह्मोस खरीद की योजना को लेकर संदेह उठ रहे हैं। जनरल अचमद यानी विश्वविद्यालय के रक्षा विशेषज्ञ योहानेस सुलेमान ने राजकोषीय दबाव और मिसाइल की 290 किलोमीटर से कम सीमित मारक क्षमता का हवाला देते हुए सौदा रद्द करने की मांग की है।

इन घटनाक्रमों से वैश्विक हथियार बाजार में पुनर्संरेखण के संकेत मिलते हैं। बांग्लादेश अपने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान 24 चीनी जे-10सीई लड़ाकू विमानों की खरीद को अंतिम रूप देने की उम्मीद कर रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 4 करोड़ डॉलर प्रति विमान है। ढाका और बीजिंग के बीच 17 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर अपेक्षित हैं, जिनमें रक्षा सहयोग के अलावा तीस्ता परियोजना और शी जिनपिंग की चार प्रमुख पहलें शामिल हैं। ब्राजील में, सेना इतालवी कंपनी एमबीडीए से उन्नत मॉड्यूलर वायु रक्षा प्रणाली ईएमएडीएस की खरीद के अंतिम चरण में है, जिसकी कीमत लगभग 60 करोड़ डॉलर है। भारत की आकाश प्रणाली को कम उन्नत मानते हुए ब्राजील ने वार्ता स्थगित कर दी थी, जबकि ईएमएडीएस सौदे में एम्ब्रेयर द्वारा स्थानीय रडार निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी शामिल है।

स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (सिपरी) के आंकड़ों के अनुसार, 2021-25 के बीच पश्चिम एशिया में अमेरिका 54 प्रतिशत हथियार आयात का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है, लेकिन यूएई अब आपूर्तिकर्ता आधार में विविधता लाना चाहता है। भारत के लिए यह सौदा सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते के प्रति रणनीतिक संकेत भी है। इंडोनेशिया में ब्रह्मोस की प्रभावशीलता पर प्रश्न इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि नौसेना के पास पहले से 200 किलोमीटर मारक क्षमता वाली फ्रांसीसी एक्सोसेट मिसाइलें मौजूद हैं। अमेरिकी पैकेज के तहत बोइंग और लॉकहीड मार्टिन अपाचे के लिए, जबकि ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स एम777 के लिए मुख्य ठेकेदार होंगी। भारत-यूएई वार्ता तेजी से आगे बढ़ रही है, बांग्लादेश अगस्त तक जे-10सीई समझौते पर हस्ताक्षर की आशा कर रहा है, और ब्राजील की ईएमएडीएस खरीद पर अंतिम निर्णय आने वाले महीनों में अपेक्षित है।

स्रोतों में मतभेद

रक्षा एवं सुरक्षा · 3 स्रोत · 3 भाषाएँ

28%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक83%
निंदक17%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेसरूसी और सीआईएस प्रेस
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताविजय

भारत एक प्रमुख रक्षा साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, वाशिंगटन ने अपाचे हेलीकॉप्टरों और M777 हॉवित्जरों के लिए 482 मिलियन डॉलर के सहायता पैकेज को मंजूरी दी है, जबकि नई दिल्ली संयुक्त अरब अमीरात को ब्रह्मोस मिसाइलों और आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली की बिक्री पर बातचीत कर रहा है। इसी समय, बांग्लादेश की 24 चीनी J-10CE लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना बीजिंग की ओर झुकाव का संकेत देती है, जो क्षेत्रीय गठबंधनों का नक्शा बदल रही है।

रूसी और सीआईएस प्रेस/ व्यापार
विजयव्यावहारिकता

ब्रह्मोस मिसाइल, एक रूसी-भारतीय संयुक्त उद्यम, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई गति पकड़ रही है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद चौथा ग्राहक बनने के लिए बातचीत कर रहा है। यह विस्तार सिस्टम की बढ़ती व्यावसायिक अपील और मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में इसकी रणनीतिक पहुंच को उजागर करता है।

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