
फलों और आहार संबंधी पारंपरिक मान्यताओं को तोड़ रहे नए पोषण विज्ञान के निष्कर्ष
हार्वर्ड, मेयो क्लिनिक और वैश्विक स्वास्थ्य संस्थानों के हालिया अध्ययन बताते हैं कि आम, अंगूर और पपीता जैसे फल वज़न घटाने, पाचन और हृदय स्वास्थ्य में सहायक हो सकते हैं।
पोषण विज्ञान में हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है, जो फलों के सेवन को लेकर कई पुरानी धारणाओं को चुनौती दे रहा है। हार्वर्ड स्कूल ऑफ न्यूट्रिशन, मेयो क्लिनिक और मैक्सिकन सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थाओं के विशेषज्ञ अब इस बात पर ज़ोर देते हैं कि आम, अंगूर और पपीता जैसे मीठे फल, जिन्हें अक्सर मधुमेह या वज़न घटाने के दौरान वर्जित माना जाता था, दरअसल सही मात्रा और संयोजन में सेवन करने पर चयापचय को सुधार सकते हैं। इस दृष्टिकोण का आधार फलों में मौजूद फाइबर, पॉलीफेनॉल और प्राकृतिक शर्करा का संतुलन है, जो रक्त शर्करा के अवशोषण को धीमा करता है और तृप्ति बढ़ाता है।
इन निष्कर्षों के पीछे क्रियाविधि स्पष्ट है: घुलनशील फाइबर जैसे पेक्टिन (सेब, आम) और पपीते में मौजूद पपेन एंजाइम पाचन को सुगम बनाते हैं, जबकि अंगूर और ब्लूबेरी में पाए जाने वाले रेस्वेराट्रॉल और एंथोसायनिन सूजन कम करने और रक्त वाहिकाओं के लचीलेपन में सुधार लाने में सहायक होते हैं। न्यूट्रिएंट्स पत्रिका में प्रकाशित एक समीक्षा, जिसमें दर्जनों मानव अध्ययनों का विश्लेषण किया गया, बताती है कि प्रतिदिन लगभग एक कप ब्लूबेरी का छह महीने तक सेवन हृदय रोग के जोखिम को 12 से 15 प्रतिशत तक कम कर सकता है। इसी तरह, इंडोनेशियाई पोषण विशेषज्ञ सेब और अंगूर की तुलना में सेब को उसके उच्च फाइबर के कारण रक्त शर्करा स्थिरता के लिए थोड़ा बेहतर मानते हैं, लेकिन अंगूर के पॉलीफेनॉल हृदय के लिए अलग लाभ प्रदान करते हैं।
दैनिक आदतों पर प्रभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट सुबह गुनगुने पानी से दिन की शुरुआत करने, फाइबर युक्त नाश्ता लेने और शौच के लिए स्क्वाटिंग मुद्रा अपनाने की सलाह देते हैं, जो आंतों की नियमितता को बढ़ावा देता है। मैक्सिकन स्वास्थ्य सचिवालय अंडे और नोपालेस (कैक्टस) के पारंपरिक नाश्ते को कोलेस्ट्रॉल और शर्करा नियंत्रण के लिए प्रभावी बताता है, जबकि ईरानी शोधकर्ता हृदय सुरक्षा के लिए अंगूर और ब्लूबेरी को दैनिक आहार में शामिल करने पर बल देते हैं। वज़न घटाने के लिए ग्रीक योगर्ट और कॉटेज चीज़ के बीच तुलना में प्रोटीन की मात्रा और प्रोबायोटिक लाभों के आधार पर दोनों को ही उपयुक्त पाया गया है, बशर्ते इनका सेवन बिना अतिरिक्त शर्करा के किया जाए।
इन सबका निहितार्थ यह है कि संपूर्ण खाद्य पदार्थों पर आधारित आहार, जिसमें विविध फल, सब्ज़ियाँ, प्रोटीन और स्वस्थ वसा शामिल हों, बिना किसी लैक्सेटिव या सप्लीमेंट के पाचन और चयापचय स्वास्थ्य को बनाए रख सकता है। अगला वैज्ञानिक पड़ाव विशिष्ट पॉलीफेनॉल के दीर्घकालिक हृदय संबंधी प्रभावों पर अधिक नियंत्रित क्लिनिकल परीक्षणों का आना होगा, जो इन सिफारिशों को और पुख्ता करेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पोषण विज्ञान पुरानी मान्यताओं को तोड़ रहा है: दलिया ही एकमात्र संतोषजनक नाश्ता नहीं है, और आम व पपीते जैसे फल पाचन और विटामिन के ऐसे लाभ देते हैं जिन्हें अक्सर अनदेखा किया जाता है। दैनिक दिनचर्या में छोटे बदलाव बिना जुलाब या सप्लीमेंट के आंतों की गति को नियमित कर सकते हैं। विशेषज्ञ किसी एक चमत्कारी भोजन के बजाय प्रोटीन, फाइबर और स्वस्थ वसा के संतुलन पर जोर देते हैं।
आम खाद्य पदार्थों की सीधी तुलना आम धारणाओं को गलत साबित करती है: रक्त शर्करा नियंत्रण के लिए फलों से परहेज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव फाइबर, पानी और कार्बोहाइड्रेट के संयोजन पर निर्भर करता है। आम का छिलका, जिसे आमतौर पर कड़वे स्वाद के कारण फेंक दिया जाता है, में भी लाभकारी यौगिक होते हैं। वजन घटाने के लिए ग्रीक योगर्ट और पनीर के बीच चयन करते समय, प्रोटीन प्रोफाइल और पोषक घनत्व मौजूदा रुझानों से अधिक मायने रखते हैं।
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