
अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरान पर तीसरी रात हमले कर जहाजरानी सुरक्षा का हवाला दिया, तेहरान ने आक्रामकता बताया
अमेरिकी सेना ने बुशहर, चाबहार समेत कई स्थानों पर पांच घंटे तक हमले कर ईरान की समुद्री क्षमता कमजोर करने का दावा किया, जबकि ईरानी मीडिया ने इसे 'संगठित आतंकवाद' करार दिया।
अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) ने 13 जुलाई की रात ईरान के खिलाफ तीसरी लगातार रात सैन्य कार्रवाई पूरी करने की घोषणा की। सेंटकॉम के बयान के अनुसार, पाँच घंटे चले इस अभियान में बुशहर, चाबहार, जास्क, कनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी कमान ने दावा किया कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की वाणिज्यिक जहाजरानी पर हमला करने की क्षमता को कम करना है, और इसके लिए सटीक गोला-बारूद से तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइल व ड्रोन साइटों तथा नौसैनिक क्षमताओं को लक्षित किया गया।
वाशिंगटन के रुख को स्पष्ट करते हुए सेंटकॉम ने बताया कि इस समय पूरे मध्य-पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और बल पूर्ण सतर्कता व युद्ध-तत्परता की स्थिति में रहेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका ईरान को 'ज़ोरदार तरीके से मारेगा' और ईरानी नेतृत्व को 'पूरी तरह अविश्वसनीय' बताया। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के बदले 20 प्रतिशत शुल्क वसूलने का प्रस्ताव भी दोहराया। सेंटकॉम के अनुसार, ये हमले ईरानी बलों पर 'भारी लागत' थोपने और निर्दोष नागरिकों व व्यावसायिक जहाजों पर हमले की क्षमता घटाने के लिए जारी रहेंगे।
तेहरान से जुड़े मीडिया स्रोतों ने इन कार्रवाइयों को 'सैन्य आक्रमण' और सेंटकॉम को 'आतंकवादी संगठन' बताया। हमशहरी ऑनलाइन के अनुसार, ईरानी पक्ष ने इस्लामाबाद समझौते का हवाला देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ईरान की है और वह ओमान के साथ समन्वय में यह कार्य करेगा। ईरानी सैन्य कमान ने स्पष्ट किया कि इस जलमार्ग के भविष्य में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं होगी और उसे हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरानी मीडिया ने ट्रंप के उस दावे की ओर भी इशारा किया जिसमें वे पहले ही ईरानी नौसेना के 'पूर्ण विनाश' की बात कह चुके हैं, इसे विरोधाभासी बताया।
यह सैन्य बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब ईरान ने सप्ताह के आरंभ में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद करने की घोषणा की थी और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी थी। दोनों पक्षों के बीच पिछले सप्ताह फिर शुरू हुई वार्ता के बावजूद तनाव कम होने के संकेत नहीं हैं। क्षेत्रीय विश्लेषकों के हवाले से कहा जा रहा है कि होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर यह टकराव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
फिलहाल अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह सतर्क बनी हुई है और ट्रंप ने आगे भी हमलों के संकेत दिए हैं। ईरानी पक्ष ने किसी सैन्य प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कूटनीतिक माध्यमों से अमेरिकी भूमिका को खारिज किया है। इस मामले में अगला ठोस कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद या क्षेत्रीय मध्यस्थों की ओर से उठाए जाने की संभावना है, हालांकि अभी कोई औपचारिक बैठक निर्धारित नहीं है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.90 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.10 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
We Iranians reject the American aggression and assert our sovereign right over the Gulf. The armed forces are ready to defend the Strait of Hormuz and punish the aggressors.
The 'heroic victimization' technique turns Iran into the target of an unjust attack, while the threat of retaliation (revenge squads) reverses the power asymmetry, presenting Iran as an actor capable of inflicting costs.
Iranian outlets omit the US justification of protecting commercial shipping and the limited nature of the strikes to military targets.
We, the Atlantic coalition, act to protect freedom of navigation and deter Iran from further aggression. Our operations are targeted and proportionate.
The 'selective normalization' technique presents military actions as standard responses to a threat, omitting the broader context of tensions and international criticism.
Atlantic media omit the Iranian perspective of aggression and threats of retaliation, as well as any criticism of the legality of the strikes.
We Gulf observers record events with concern for regional stability. Freedom of navigation is crucial, but diplomacy must prevail.
The 'apparent balancing' technique presents both sides without judgment, but the choice to include operational details and the threat to navigation implicitly favors the US position.
Gulf media omit the Iranian characterization of the US as terrorists and the threats of retaliation, as well as US domestic criticism.
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