
सीजेपी का प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा रुख, वांगचुक ने आश्वासनों पर तोड़ा अनशन, बातचीत जारी
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर केंद्र और छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी के बीच बातचीत जारी, सोनम वांगचुक ने सरकारी लिखित आश्वासनों के बाद 26 दिनों का अनशन समाप्त किया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले डेढ़ महीने से चल रहे नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों ने शुक्रवार को एक नया मोड़ ले लिया। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और केंद्र सरकार के बीच दूसरे दौर की बातचीत में सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी वापस लेने और मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा देने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी, लेकिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शनिवार तक का समय मांगा। कुछ घंटे पहले, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना 26 दिनों का आमरण अनशन तोड़ दिया, जिसके बाद सरकार ने लिखित आश्वासन दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा और संसद में शिक्षा सुधारों पर चर्चा होगी।
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने बैठक के बाद बताया कि सरकार ने दो मांगों—प्रदर्शनकारियों पर कानूनी कार्रवाई न करने और नीट पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा—पर सहमति जता दी है, लेकिन प्रधान के इस्तीफे पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद होगा। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट किया कि प्रधान का इस्तीफा ‘गैर-परक्राम्य’ है और इसे वापस लिए बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा। दूसरी ओर, सरकारी सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि मंत्री के इस्तीफे का ‘कोई सवाल ही नहीं’ है और यह जिम्मेदारी से भागने जैसा होगा। लोकसभा में विपक्ष ने ‘इस्तीफा दो’ के नारों के साथ सदन की कार्यवाही बाधित की, जिसके बाद सदन सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने युवा असंतोष को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। दिल्ली पुलिस द्वारा 20 जुलाई को संसद मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की व्यापक निंदा हुई, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे एक छात्र की आंख की रोशनी जा सकती है। सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में व्यवस्थागत विफलता और बेरोजगारी से उपजा यह आंदोलन जाति-वर्ग से परे युवाओं की आकांक्षाओं से जुड़ा है, जो भाजपा के लिए एक अलग किस्म की राजनीतिक चुनौती पेश कर रहा है। बीबीसी की एक रिपोर्ट में सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के राहुल वर्मा के हवाले से कहा गया कि यह आंदोलन प्रशासनिक विफलता पर केंद्रित है, जिससे भाजपा के लिए अपने समर्थकों को लामबंद करना कठिन हो गया है।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात एक वीडियो संदेश में परीक्षा पेपर लीक से निपटने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों और सख्त कानून की घोषणा की, और शुक्रवार को कैबिनेट में संबंधित विधेयक पर चर्चा की गई। हालांकि, सोशल मीडिया पर युवाओं ने प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए मीम्स और व्यंग्य के जरिए सरकार की आलोचना जारी रखी। फिलहाल, शनिवार दोपहर को फिर से बातचीत होनी है, जिसमें प्रधान के इस्तीफे पर सरकार का जवाब अपेक्षित है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और 18 मेट्रो स्टेशन बंद हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
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