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भू-राजनीति और राजनीतिसोमवार, 29 जून 2026

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी समयसीमा से पहले हजारों का पलायन, अफ्रीकी देशों में निकासी की होड़

30 जून की अनाधिकारिक समयसीमा से पहले हिंसा की आशंका के बीच युगांडा, नाइजीरिया, मलावी समेत कई देश अपने नागरिकों को निकाल रहे हैं, जबकि रामाफोसा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है।

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी समूहों द्वारा अवैध प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए 30 जून की निर्धारित अनाधिकारिक समयसीमा से ठीक पहले 25,000 से अधिक विदेशी नागरिकों को स्वदेश भेजा जा चुका है। राष्ट्रीय संयुक्त परिचालन एवं खुफिया संरचना (नैटजॉइंट्स) के अनुसार, हाल के सप्ताहों में हुई हिंसा और धमकियों के कारण यह पलायन तेज़ हुआ है, जिसमें अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मोज़ाम्बिक, मलावी, इथियोपिया और युगांडा के नागरिक मृतकों में शामिल हैं, जबकि डरबन, जोहान्सबर्ग और केप टाउन में हज़ारों प्रवासी अस्थायी शिविरों में सुरक्षित निकासी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अवैध आप्रवासन पर नागरिकों की चिंताओं को वैध बताते हुए सीमा प्रबंधन, वीज़ा प्रणाली और शरण प्रक्रियाओं में व्यापक सुधारों की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा, धमकी या स्वयंसेवी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार शांतिपूर्ण तरीके से ही प्रयोग किया जाना चाहिए। सरकारी बयानों में कहा गया है कि आप्रवासन कानूनों का प्रवर्तन केवल राज्य के अधिकारियों का काम है, निजी व्यक्तियों का नहीं। इसके बावजूद, 'मार्च एंड मार्च मूवमेंट' जैसे समूहों ने अवैध प्रवासियों को निकल जाने की अंतिम चेतावनी दी है और मंगलवार को राष्ट्रव्यापी मार्च की योजना बनाई है।

अफ्रीकी देशों की प्रतिक्रिया तीव्र रही है। युगांडा सरकार ने 746 नागरिकों के पंजीकरण के बाद सरकारी खर्च पर विशेष चार्टर उड़ानों की व्यवस्था की है। नाइजीरिया ने अब तक दो उड़ानों के ज़रिए सैकड़ों नागरिकों को स्वदेश पहुँचाया है और तीसरी उड़ान मंगलवार सुबह लागोस पहुँचने वाली है। मलावी ने 15,000 से अधिक नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जबकि घाना, ज़िम्बाब्वे और मोज़ाम्बिक भी बसों और विमानों के माध्यम से निकासी करा रहे हैं। नाइजीरिया के विश्वविद्यालय छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर स्थिति नहीं सुधरी तो वे नाइजीरिया में दक्षिण अफ्रीकी कारोबारों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

विश्लेषकों के अनुसार, यह संकट दक्षिण अफ्रीका की 30 प्रतिशत से अधिक बेरोज़गारी और आर्थिक असमानता से उपजे सामाजिक तनाव को दर्शाता है। अफ्रीकी प्रवासन अध्ययन केंद्र (एसीएमएस) के आँकड़े बताते हैं कि 2008 में इसी तरह की हिंसा में 60 से अधिक लोग मारे गए थे। घाना (1969) और युगांडा (1972) के ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि अचानक सामूहिक निष्कासन से आपूर्ति शृंखला बाधित होती है, कारोबार बंद होते हैं और दीर्घकालिक आर्थिक क्षति होती है। रामाफोसा सरकार ने श्रम बाज़ार में विदेशी नागरिकों के लिए कोटा तय करने और कुछ क्षेत्रों को केवल नागरिकों के लिए आरक्षित करने जैसे मध्यम अवधि के प्रस्ताव भी रखे हैं, जिन पर क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।

दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह घटनाक्रम प्रवासन प्रशासन की जटिलताओं को रेखांकित करता है, जहाँ आर्थिक अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में लोग सीमाएँ पार करते हैं। भारत का दक्षिण अफ्रीका में एक बड़ा प्रवासी समुदाय है, हालाँकि इस बार के विवाद में वह प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं दिखता। फिर भी, क्षेत्रीय सहयोग और कूटनीतिक संवाद के बिना ऐसे संकट व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। फ़िलहाल, 30 जून के प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा स्थिति पर सबकी निगाहें हैं, और अफ्रीकी सरकारें अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

28%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेसइज़राइली प्रेस
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस/ दक्षिण अफ़्रीकी
व्यावहारिकतासंदेह

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने अवैध आप्रवासन पर वैध सार्वजनिक चिंताओं को स्वीकार किया, लेकिन जोर देकर कहा कि हिंसा और भीड़तंत्र का संवैधानिक लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। सरकार ने शांतिपूर्ण विरोध का आह्वान करते हुए चेतावनी दी कि आपराधिक कृत्यों से कानून की पूरी सख्ती से निपटा जाएगा। हज़ारों विदेशी नागरिकों की निकासी विदेशी-विरोधी बयानबाजी की मानवीय कीमत और दीर्घकालिक प्रवासन समाधानों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

इज़राइली प्रेस/ सुरक्षा
चेतावनीअत्यावश्यकता

अफ्रीकी देश दक्षिण अफ्रीका में आप्रवासी-विरोधी समूहों द्वारा तय की गई समय-सीमा के नज़दीक आने पर हज़ारों नागरिकों को निकालने में जुटे हैं। बढ़ती हिंसा में कम से कम दो लोग मारे गए और कई विस्थापित हुए, जबकि युगांडा ने अपने सैकड़ों नागरिकों के लिए आपातकालीन हवाई निकासी शुरू कर दी। अधिकारियों को डर है कि 30 जून के विरोध प्रदर्शन विदेशी-विरोधी हमलों का व्यापक विस्फोट भड़का सकते हैं।

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लेबनान-इज़राइल समझौता: अमेरिकी कूटनीति के दोहरे मानक और बेरूत में आंतरिक टकराव की आशंका·फ्रांस, इटली और अर्जेंटीना में जून में मुद्रास्फीति में गिरावट, ऊर्जा कीमतों में नरमी से राहत·रोज़मर्रा के आहार में छिपा सेहत का राज: फाइबर, प्रोटीन और हाइड्रेशन से मेटाबॉलिज्म पर नियंत्रण·रूसी फिगर स्केटर्स की तटस्थ दर्जे के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वापसी·रूस ने 419 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए, मॉस्को क्षेत्र में शिशु की मौत·गुलाबी पर्सनैलिटी और पीले मिनियंस: जुलाई 2026 में दो आइकॉनिक किरदारों की वापसी·मार्टिनेली का अंतिम क्षणों में गोल: ब्राजील ने जापान को हराकर 88 साल बाद नॉकआउट में पिछड़ने के बाद जीत दर्ज की·ब्राजील के प्रतिद्वंद्वी का फैसला: कोस्टा डि आइवरी और नॉर्वे आमने-सामने, फ्रांस की स्वीडन से कड़ी टक्कर·लेबनान-इज़राइल समझौता: अमेरिकी कूटनीति के दोहरे मानक और बेरूत में आंतरिक टकराव की आशंका·फ्रांस, इटली और अर्जेंटीना में जून में मुद्रास्फीति में गिरावट, ऊर्जा कीमतों में नरमी से राहत·रोज़मर्रा के आहार में छिपा सेहत का राज: फाइबर, प्रोटीन और हाइड्रेशन से मेटाबॉलिज्म पर नियंत्रण·रूसी फिगर स्केटर्स की तटस्थ दर्जे के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वापसी·रूस ने 419 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए, मॉस्को क्षेत्र में शिशु की मौत·गुलाबी पर्सनैलिटी और पीले मिनियंस: जुलाई 2026 में दो आइकॉनिक किरदारों की वापसी·मार्टिनेली का अंतिम क्षणों में गोल: ब्राजील ने जापान को हराकर 88 साल बाद नॉकआउट में पिछड़ने के बाद जीत दर्ज की·ब्राजील के प्रतिद्वंद्वी का फैसला: कोस्टा डि आइवरी और नॉर्वे आमने-सामने, फ्रांस की स्वीडन से कड़ी टक्कर·
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सोमवार, 29 जून 2026

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी समयसीमा से पहले हजारों का पलायन, अफ्रीकी देशों में निकासी की होड़

30 जून की अनाधिकारिक समयसीमा से पहले हिंसा की आशंका के बीच युगांडा, नाइजीरिया, मलावी समेत कई देश अपने नागरिकों को निकाल रहे हैं, जबकि रामाफोसा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है।

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी समूहों द्वारा अवैध प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए 30 जून की निर्धारित अनाधिकारिक समयसीमा से ठीक पहले 25,000 से अधिक विदेशी नागरिकों को स्वदेश भेजा जा चुका है। राष्ट्रीय संयुक्त परिचालन एवं खुफिया संरचना (नैटजॉइंट्स) के अनुसार, हाल के सप्ताहों में हुई हिंसा और धमकियों के कारण यह पलायन तेज़ हुआ है, जिसमें अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मोज़ाम्बिक, मलावी, इथियोपिया और युगांडा के नागरिक मृतकों में शामिल हैं, जबकि डरबन, जोहान्सबर्ग और केप टाउन में हज़ारों प्रवासी अस्थायी शिविरों में सुरक्षित निकासी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अवैध आप्रवासन पर नागरिकों की चिंताओं को वैध बताते हुए सीमा प्रबंधन, वीज़ा प्रणाली और शरण प्रक्रियाओं में व्यापक सुधारों की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा, धमकी या स्वयंसेवी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार शांतिपूर्ण तरीके से ही प्रयोग किया जाना चाहिए। सरकारी बयानों में कहा गया है कि आप्रवासन कानूनों का प्रवर्तन केवल राज्य के अधिकारियों का काम है, निजी व्यक्तियों का नहीं। इसके बावजूद, 'मार्च एंड मार्च मूवमेंट' जैसे समूहों ने अवैध प्रवासियों को निकल जाने की अंतिम चेतावनी दी है और मंगलवार को राष्ट्रव्यापी मार्च की योजना बनाई है।

अफ्रीकी देशों की प्रतिक्रिया तीव्र रही है। युगांडा सरकार ने 746 नागरिकों के पंजीकरण के बाद सरकारी खर्च पर विशेष चार्टर उड़ानों की व्यवस्था की है। नाइजीरिया ने अब तक दो उड़ानों के ज़रिए सैकड़ों नागरिकों को स्वदेश पहुँचाया है और तीसरी उड़ान मंगलवार सुबह लागोस पहुँचने वाली है। मलावी ने 15,000 से अधिक नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जबकि घाना, ज़िम्बाब्वे और मोज़ाम्बिक भी बसों और विमानों के माध्यम से निकासी करा रहे हैं। नाइजीरिया के विश्वविद्यालय छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर स्थिति नहीं सुधरी तो वे नाइजीरिया में दक्षिण अफ्रीकी कारोबारों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

विश्लेषकों के अनुसार, यह संकट दक्षिण अफ्रीका की 30 प्रतिशत से अधिक बेरोज़गारी और आर्थिक असमानता से उपजे सामाजिक तनाव को दर्शाता है। अफ्रीकी प्रवासन अध्ययन केंद्र (एसीएमएस) के आँकड़े बताते हैं कि 2008 में इसी तरह की हिंसा में 60 से अधिक लोग मारे गए थे। घाना (1969) और युगांडा (1972) के ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि अचानक सामूहिक निष्कासन से आपूर्ति शृंखला बाधित होती है, कारोबार बंद होते हैं और दीर्घकालिक आर्थिक क्षति होती है। रामाफोसा सरकार ने श्रम बाज़ार में विदेशी नागरिकों के लिए कोटा तय करने और कुछ क्षेत्रों को केवल नागरिकों के लिए आरक्षित करने जैसे मध्यम अवधि के प्रस्ताव भी रखे हैं, जिन पर क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।

दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह घटनाक्रम प्रवासन प्रशासन की जटिलताओं को रेखांकित करता है, जहाँ आर्थिक अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में लोग सीमाएँ पार करते हैं। भारत का दक्षिण अफ्रीका में एक बड़ा प्रवासी समुदाय है, हालाँकि इस बार के विवाद में वह प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं दिखता। फिर भी, क्षेत्रीय सहयोग और कूटनीतिक संवाद के बिना ऐसे संकट व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। फ़िलहाल, 30 जून के प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा स्थिति पर सबकी निगाहें हैं, और अफ्रीकी सरकारें अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 16 स्रोत · 5 भाषाएँ

28%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र83%
निंदक17%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेसइज़राइली प्रेस
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस/ दक्षिण अफ़्रीकी
व्यावहारिकतासंदेह

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने अवैध आप्रवासन पर वैध सार्वजनिक चिंताओं को स्वीकार किया, लेकिन जोर देकर कहा कि हिंसा और भीड़तंत्र का संवैधानिक लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। सरकार ने शांतिपूर्ण विरोध का आह्वान करते हुए चेतावनी दी कि आपराधिक कृत्यों से कानून की पूरी सख्ती से निपटा जाएगा। हज़ारों विदेशी नागरिकों की निकासी विदेशी-विरोधी बयानबाजी की मानवीय कीमत और दीर्घकालिक प्रवासन समाधानों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

इज़राइली प्रेस/ सुरक्षा
चेतावनीअत्यावश्यकता

अफ्रीकी देश दक्षिण अफ्रीका में आप्रवासी-विरोधी समूहों द्वारा तय की गई समय-सीमा के नज़दीक आने पर हज़ारों नागरिकों को निकालने में जुटे हैं। बढ़ती हिंसा में कम से कम दो लोग मारे गए और कई विस्थापित हुए, जबकि युगांडा ने अपने सैकड़ों नागरिकों के लिए आपातकालीन हवाई निकासी शुरू कर दी। अधिकारियों को डर है कि 30 जून के विरोध प्रदर्शन विदेशी-विरोधी हमलों का व्यापक विस्फोट भड़का सकते हैं।

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