
यूक्रेन का 40-दिवसीय गुप्त अभियान: रूस पर दबाव की नई रणनीति
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने रूस को युद्ध समाप्त करने के लिए प्रभावित करने हेतु सुरक्षा सेवा के विशेष अभियान को मंज़ूरी दी, जिसके तहत दूरगामी हमलों से ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रूस के विरुद्ध एक नई 40-दिवसीय 'प्रभाव अभियान' की घोषणा की है, जिसे सुरक्षा सेवा (एसबीयू) अंजाम देगी। ज़ेलेंस्की के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य 'आक्रामक देश को युद्ध समाप्त करने के लिए बाध्य करना' है। यह क़दम ऐसे समय उठाया गया है जब यूक्रेनी बलों ने रूसी क्षेत्र में मध्यम और लंबी दूरी के हमलों को तेज़ कर दिया है, विशेषकर तेल रिफ़ाइनरियों और ईंधन डिपो को निशाना बनाकर।
यूक्रेनी सुरक्षा सेवा के प्रमुख येवहेन ख़मारा से मिली रिपोर्ट के बाद ज़ेलेंस्की ने यह निर्णय लिया। यूक्रेनी पक्ष के अनुसार, एसबीयू ने विभिन्न प्रकार के ड्रोनों के इस्तेमाल से मोर्चे पर स्थिति की रक्षा में 'सर्वोच्च प्रदर्शन' किया है। हालांकि, अभियान के ठोस स्वरूप का खुलासा नहीं किया गया है। पश्चिमी सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान संभवतः रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ड्रोन हमलों को और व्यवस्थित रूप से तेज़ करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे मॉस्को पर आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़े।
रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेनी हमलों के कारण रूस के 20 से अधिक क्षेत्रों में ईंधन की कमी हो गई है और कई जगह प्रशासनिक स्तर पर पेट्रोल की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। क्रास्नोदर क्षेत्र और ऊफ़ा शहर में तेल डिपो और रिफ़ाइनरियों पर हालिया हमलों ने इस संकट को और गहरा दिया है। वहीं, मोर्चे पर स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है और ज़मीनी स्तर पर बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। यूक्रेनी अधिकारियों का दावा है कि मई में पहली बार 2023 के बाद उन्होंने खोए क्षेत्र से अधिक क्षेत्र वापस लिया, लेकिन स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
राजनीतिक मोर्चे पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने कीव को कुछ राहत दी है। पश्चिमी राजनयिक सूत्रों के अनुसार, जी7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि पुतिन शांति नहीं चाहते, जो पहले के अमेरिकी रुख़ से भिन्न है। इसके बाद रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्पष्टीकरण की माँग की। इससे पहले अमेरिका द्वारा कराई गई कई युद्धविराम पहल क्रेमलिन के इनकार के कारण विफल रही हैं। साथ ही, यूरोपीय संघ में यूक्रेन की सदस्यता की प्रक्रिया में भी कठिनाइयाँ बनी हुई हैं, जिसका ज़िक्र कीव के पूर्व अधिकारियों ने आंतरिक चुनौती के रूप में किया है।
फ़िलहाल इस 40-दिवसीय अभियान का विवरण अज्ञात है और न ही इसकी सफलता की कोई गारंटी है। यूक्रेनी नेतृत्व इसे युद्ध समाप्त करने के दबाव के एक औज़ार के रूप में देखता है, जबकि रूसी पक्ष इसे उकसाने वाला क़दम मान सकता है। आने वाले दिनों में इस अभियान के तहत होने वाली कार्रवाइयों और उनके प्रभाव पर ही इसकी प्रभावशीलता का आकलन संभव होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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घोषित 40-दिवसीय अभियान ज़ेलेंस्की द्वारा भ्रष्टाचार के घोटालों से ध्यान हटाने और अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने खुद को मज़बूत दिखाने की एक राजनीतिक चाल से अधिक कुछ नहीं है। यह एक सफलता की कहानी गढ़ने का बेताब प्रयास है, न कि शांति का गंभीर प्रयास।
यूक्रेन ने रूस को बातचीत की मेज़ पर लाने के लिए एक गुप्त 40-दिवसीय प्रभाव अभियान को मंज़ूरी दे दी है। ज़ेलेंस्की द्वारा व्यक्तिगत रूप से अनुमोदित यह योजना, कीव के अपनी शर्तों पर युद्ध समाप्त करने के प्रयास में एक नए, आक्रामक चरण का संकेत देती है।
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