
इटली फुटबॉल महासंघ के नए अध्यक्ष मालागो: 68.58% वोटों से जीत, अब राष्ट्रीय टीम की बहाली की चुनौती
जियोवानी मालागो ने इटली की फुटबॉल फेडरेशन का चुनाव 68.58% मतों से जीता, तीसरे लगातार विश्व कप से बाहर होने के बाद उनके सामने टीम के पुनर्निर्माण और यूरो 2032 की तैयारी की बड़ी जिम्मेदारी है।
रोम के कैवलियरी वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में सोमवार 22 जून को इटली की फुटबॉल फेडरेशन (एफआईजीसी) की चुनावी सभा ने जियोवानी मालागो को भारी बहुमत से नया अध्यक्ष चुन लिया। 67 वर्षीय पूर्व ओलंपिक समिति प्रमुख को 343,084 भारित मत (68.58%) मिले, जबकि उनके एकमात्र प्रतिद्वंद्वी जियानकार्लो अबेते 145,936 मतों (29.17%) पर सिमट गए। 273 प्रतिनिधियों में से 245 मौजूद रहे, और मतदान गोपनीय इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से हुआ। यह चुनाव इटली के लगातार तीसरे विश्व कप से बाहर रहने के सदमे के बीच हुआ—2026 के टूर्नामेंट के लिए बोस्निया से प्लेऑफ हार के बाद पूर्व अध्यक्ष गैब्रिएले ग्रावीना ने इस्तीफा दे दिया था, और कोच गेनारो गात्तूसो तथा प्रतिनिधिमंडल प्रमुख जियानलुइगी बुफोन भी पद छोड़ चुके थे।
मालागो की उम्मीदवारी को सीरी ए क्लबों, विशेषकर इंटर मिलान के अध्यक्ष ज्यूसेपे मारोत्ता और नापोली के ऑरेलियो दे लौरेंतिस ने आगे बढ़ाया, और खिलाड़ी संघ (एआईसी) तथा कोच संघ (एआईएसी) ने भी समर्थन दिया। इतालवी मीडिया के एक वर्ग ने इसे 'नकली नवीनीकरण' करार दिया, क्योंकि पूरी संघीय परिषद यथावत रही और ग्रावीना युग के कई चेहरे बरकरार रहे। मालागो ने खुद को 'काला पोप' या बाहरी व्यक्ति कहलाने से इनकार किया और अपनी जड़ें रोम के कुलीन कनोत्तिएरी अनिएने क्लब तथा तीन बार के कॉनी अध्यक्ष के अनुभव में तलाशीं। उन्होंने कहा, 'अकेला मैं कुछ नहीं कर सकता, आप सबके साथ मिलकर सब कुछ कर सकता हूं।'
नए अध्यक्ष के सामने चुनौतियों का पहाड़ है। इटली की राष्ट्रीय टीम 2018, 2022 और 2026—तीनों विश्व कप से अनुपस्थित रही, जबकि कुराकाओ और केप वर्डे जैसी छोटी टीमें इस बार खेल रही हैं। युवा प्रतिभा विकास प्रणाली को दोषी ठहराया जा रहा है, और 2032 की यूरोपीय चैंपियनशिप (तुर्की के साथ सह-मेजबानी) के लिए स्टेडियमों का बुनियादी ढांचा ध्वस्त हालत में है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि मालागो को महज प्रशासनिक नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधारों की अगुवाई करनी होगी। रूसी और अरबी प्रेस ने भी इस चुनाव को इटली के फुटबॉल संकट से जोड़कर देखा, और मिलान-कोर्तिना शीतकालीन ओलंपिक की आयोजन समिति में मालागो के विवादास्पद रिकॉर्ड की याद दिलाई।
तात्कालिक खेल परिणाम की बात करें तो सबसे पहला कदम राष्ट्रीय कोच की नियुक्ति होगी। इतालवी सूत्रों के अनुसार रॉबर्टो मानचिनी की वापसी लगभग तय है, जिन्होंने 2021 की यूरो जीत दिलाई लेकिन 2022 विश्व कप क्वालीफिकेशन में नाकाम रहे और फिर सऊदी अरब चले गए। टीम को सितंबर में नेशंस लीग में बेल्जियम, तुर्की और फ्रांस से भिड़ना है—ये मुकाबले फीफा रैंकिंग और यूरो 2028 क्वालीफायर्स की सीडिंग के लिए निर्णायक होंगे। मालागो ने कहा कि वह पहले वित्तीय रिपोर्ट देखेंगे, फिर कोच चुनेंगे, लेकिन समय कम है और गलती की गुंजाइश नहीं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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मालागो का चुनाव पुराने गार्ड के एक अनुमानित फेरबदल के रूप में चित्रित किया गया है, जिसमें वही अभिजात वर्ग नवीनीकरण की आड़ में एक कुर्सी से दूसरी कुर्सी पर जा रहा है। जीत के पीछे सीरी ए, खिलाड़ियों और कोचों के बीच शीर्ष डिवीजन को बाकी से अलग करने का समझौता है, जो राष्ट्रीय टीमों और युवा विकास पर व्यवसाय को प्राथमिकता देता है। टिप्पणीकार इसे इटली की वास्तव में किनारे होने और बदलाव को अपनाने में असमर्थता का नवीनतम उदाहरण मानते हैं।
रूसी मीडिया चुनाव को सीधे, तथ्यात्मक तरीके से रिपोर्ट करता है, जिसमें मालागो की पूर्व CONI अध्यक्ष के रूप में पृष्ठभूमि और मिलान-कोर्टिना ओलंपिक में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। नेतृत्व परिवर्तन को विश्व कप विफलता के बाद ग्रेविना के इस्तीफे के बाद एक प्रशासनिक घटना के रूप में प्रस्तुत किया गया है, बिना किसी संपादकीय टिप्पणी के।
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