
अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुरू: ईरान की शक्ति प्रदर्शन की कोशिश, नए नेतृत्व पर सवाल
तेहरान में पूर्व सर्वोच्च नेता की अंत्येष्टि में करोड़ों लोगों के जुटने का अनुमान, विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी और मोजतबा ख़ामेनेई की ग़ैरमौजूदगी ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और ईरान के आंतरिक सत्ता समीकरणों पर बहस तेज़ कर दी है।
ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुक्रवार से शुरू हुआ, जिनकी मृत्यु 28 फ़रवरी को अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में युद्ध के पहले ही दिन हो गई थी। तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला में पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहाँ ईरानी अधिकारियों के अनुसार अगले तीन दिनों में अकेले राजधानी में डेढ़ से दो करोड़ शोकाकुल नागरिकों के शामिल होने का अनुमान है। यह आयोजन चार महीने की देरी के बाद हो रहा है, जिसे ईरानी सरकार ने युद्ध की तीव्रता और सुरक्षा कारणों से टाला था।
इस अवसर पर ईरानी नेतृत्व ने इसे राष्ट्रीय एकता और प्रतिरोध का प्रदर्शन बताया। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने कहा कि “राष्ट्र की प्रतिशोध की पुकार पूरी दुनिया को सुनाई देनी चाहिए,” जबकि सेना प्रमुख ने अमेरिका और इज़राइल से ख़ून का बदला लेने की कसम खाई। वहीं, ईरानी मीडिया के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक गोपनीय निर्देश जारी कर सभी राजनयिक मिशनों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया था कि मेज़बान देशों की भागीदारी को “अमित्रतापूर्ण कार्य” माना जाएगा। इस दबाव के चलते कम से कम 13 देशों ने अपनी भागीदारी वापस ले ली या स्तर घटा दिया, जिनमें पूर्वी यूरोप, अफ़्रीका और खाड़ी के कुछ अरब देश शामिल बताए जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, रूसी सुरक्षा परिषद के उपप्रमुख दिमित्री मेदवेदेव, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, तुर्की के उपराष्ट्रपति, चीनी संसद के उपाध्यक्ष, तथा भारत से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन सहित लगभग 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यूरोपीय देशों को आमंत्रित नहीं किया गया। पाकिस्तान, जिसने युद्धविराम और समझौता ज्ञापन में मध्यस्थता की थी, की उपस्थिति को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री की भागीदारी ने भी क्षेत्रीय कूटनीति में बदलाव के संकेत दिए।
इस आयोजन की सबसे बड़ी अनिश्चितता नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति है, जो पिता की मृत्यु के एक सप्ताह बाद पद पर नियुक्त हुए थे लेकिन अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ईरानी सूत्रों के अनुसार वे उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और इज़राइल की ओर से लगातार हत्या की धमकियों के कारण सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। इसके विपरीत, इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रमुख अहमद वहीदी युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से नज़र आए, जिसे विश्लेषक गार्ड की बढ़ी हुई राजनीतिक भूमिका का संकेत मान रहे हैं। अंतिम संस्कार की रस्में 6 जुलाई को तेहरान में जुलूस, 7 जुलाई को क़ोम, 8 जुलाई को इराक़ के नजफ़ और करबला, तथा 9 जुलाई को मशहद में दफ़न के साथ संपन्न होंगी। इसके बाद अमेरिका के साथ स्थायी शांति समझौते के लिए क़तर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +1.00 | aligned |
|---|---|---|
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.30 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
Iran celebrates its 'martyred leader' with a mass turnout that demonstrates national unity and determination to resist enemy attacks.
The narrative turns violent death into an act of martyrdom that legitimizes the regime and mobilizes consent, presenting the crowd as spontaneous proof of loyalty.
Omits any mention of state pressure to attend or prior protests.
India views the mass mourning spectacle with skepticism, questioning whether it is truly spontaneous after anti-regime protests.
The contrast between recent protests and the current crowd creates a dissonance that casts doubt on the legitimacy of the participation.
Omits the Iranian government's perspective on the legitimacy of the mourning and the presence of foreign delegations.
The West analyzes the funeral as a political staging by the Iranian regime to consolidate domestic power and send a message to enemies.
The use of quotation marks and terms like 'show of strength' and 'public devotion' maintains critical distance without direct judgment.
Omits the religious significance and genuine emotion for many Iranians.
Europe frames the funeral as a show of force by the regime, but questions its popular representativeness.
The inclusion of critical voices and analysis of the political context allows the official narrative to be dismantled without denying the event's scale.
Omits the religious devotion and genuine grief of many participants.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
सेमाग्लूटाइड बाजार में दोहरा झटका: डॉ. रेड्डीज की आपूर्ति रुकी, बड़े अध्ययन ने सीमित लाभ बताए
4 भाषाएँ · 9 स्रोत
Technology सेरूस में ईंधन संकट गहराया: सीमा चौकसी, नंबर प्लेट राशनिंग और AI नक्शों का सहारा
2 भाषाएँ · 9 स्रोत
Science & Health सेसऊदी अरब की इज़राइल को दरकिनार करने की योजना, कनाडा का व्यापारिक रुख और खाड़ी में स्वास्थ्य-तकनीकी विस्तार
2 भाषाएँ · 5 स्रोत