
इंडोनेशिया में 2027 के बजट की रूपरेखा, नाइजीरिया और ब्राजील में राजकोषीय दबाव बरकरार
एक ओर जहां जकार्ता ने ऊर्जा और चुनावी तैयारियों के लिए संसाधन जुटाए, वहीं अबुजा और ब्रासीलिया में बढ़ते घाटे ने नीति-निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में राजकोषीय अनुशासन को लेकर मिले-जुले संकेत सामने आ रहे हैं। इंडोनेशिया की संसद ने वित्त वर्ष 2027 के लिए वित्त मंत्रालय का 49.8 खरब रुपिये का बजट खाका मंजूर कर लिया, जिसका अधिकांश हिस्सा प्रबंधकीय सहायता कार्यक्रमों पर खर्च होगा। इसी के साथ ऊर्जा एवं खनिज संसाधन मंत्रालय के लिए 27.33 खरब रुपिये का सांकेतिक बजट तय किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है। इस राशि का 82 प्रतिशत सामरिक बुनियादी ढांचे, खासकर घरेलू गैस पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार पर लगाया जाएगा, जिसके तहत 2028 तक लगभग 9.6 लाख नए घरेलू कनेक्शन जोड़ने की योजना है।
इंडोनेशिया की चुनावी तैयारियां भी इस बजट चक्र में शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने 2029 के आम चुनावों की प्रारंभिक प्रक्रियाओं के लिए 1.4 खरब रुपिये का आवंटन सुनिश्चित किया है, जिसमें योजना, पंजीकरण और उम्मीदवारों के नामांकन जैसे चरण शामिल हैं। दूसरी ओर, वैश्विक तनावों से उपजे अवसरों का लाभ उठाने की रणनीति भी दिखती है। अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण कोयले की कीमतों में आए उछाल को देखते हुए सरकार ने उत्पादन कोटा में नपी-तुली ढील देने की योजना बनाई है, ताकि निर्यात राजस्व बढ़ाया जा सके।
इसके विपरीत, नाइजीरिया की राजकोषीय स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नागरिक तकनीकी संस्था बडगिट ने 2026 के बजट को 'महत्वाकांक्षी लेकिन अव्यावहारिक' करार दिया है। अनुमानित राजस्व 36.9 खरब नायरा और व्यय 68.3 खरब नायरा के बीच 31.5 खरब नायरा का घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.4 प्रतिशत बैठता है, जो राजकोषीय उत्तरदायित्व कानून की 3 प्रतिशत की सीमा से दोगुना है। बडगिट के अनुसार, सरकार अपने बजट का केवल 54 प्रतिशत वास्तविक राजस्व से जुटा पाएगी, शेष 46 प्रतिशत उधारी और ऋण पर निर्भर होगा। यह संरचनात्मक असंतुलन अब नाइजीरिया की आर्थिक नीति में गहराई तक धंस चुका है।
ब्राजील में भी राजकोषीय परिदृश्य बिगड़ने के संकेत मिले हैं। वित्त मंत्रालय की आर्थिक नीति सचिवालय द्वारा जारी प्रिज्मा फिस्कल रिपोर्ट के अनुसार, बाजार विशेषज्ञों ने 2026 के लिए केंद्र सरकार के प्राथमिक घाटे का अनुमान 57.8 अरब रियाल से बढ़ाकर 59 अरब रियाल कर दिया है। 2027 के लिए भी घाटे का पूर्वानुमान पहले से अधिक नकारात्मक हो गया है, जो मुद्रास्फीति के दबाव और सार्वजनिक वित्त पर नियंत्रण की चुनौती को रेखांकित करता है।
ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि विकासशील अर्थव्यवस्थाएं अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और बाध्यताओं के बीच संतुलन साध रही हैं। इंडोनेशिया बुनियादी ढांचे और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में निवेश कर भविष्य की नींव रख रहा है, जबकि नाइजीरिया और ब्राजील को बढ़ते कर्ज और घाटे से निपटने के लिए कठोर नीतिगत विकल्प अपनाने होंगे। दक्षिण एशिया के लिए यह एक सबक है कि वैश्विक कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक झटकों के बीच राजकोषीय बफर बनाए रखना कितना आवश्यक है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इंडोनेशिया वैश्विक तनावों के बीच कोयले की बढ़ती कीमतों पर दांव लगा रहा है। सरकार उत्पादन कोटा को संतुलित ढंग से ढीला कर रही है और ऊर्जा बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रही है, जिसमें लगभग दस लाख नए घरेलू गैस कनेक्शन शामिल हैं। इस रणनीति को बाजार के अवसरों के प्रति व्यावहारिक प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया गया है।
नाइजीरिया के 2026 के बजट को महत्वाकांक्षी लेकिन अवास्तविक करार दिया गया है। सकल घरेलू उत्पाद के 6.4% के बराबर घाटा, जो कानूनी सीमा से दोगुने से भी अधिक है, सरकार अपने खर्च का केवल आधे से थोड़ा अधिक हिस्सा वास्तविक राजस्व से वित्तपोषित कर सकती है। नागरिक समाज एक अस्थिर राजकोषीय योजना और रिकॉर्ड घाटे पर चेतावनी जारी करता है।
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