
यूरोपीय संघ ने चीन पर रूसी सैनिकों को प्रशिक्षण देने का आरोप लगाया, संयुक्त राष्ट्र ने विदेशी हस्तक्षेप पर चेतावनी दी
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कालस ने पुष्टि की कि चीन ने यूक्रेन युद्ध के लिए रूसी सैनिकों को प्रशिक्षित किया, जबकि चीन ने इसे ‘निराधार बदनामी’ बताया और संयुक्त राष्ट्र ने और अधिक विदेशी हस्तक्षेप के प्रति आगाह किया।
यूरोपीय संघ ने सोमवार को एक बड़ा कूटनीतिक क़दम उठाते हुए चीन पर सीधे आरोप लगाया कि उसकी सेना ने रूसी सैनिकों को यूक्रेन में युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया है। लक्ज़मबर्ग में विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कालस ने कहा कि ब्लॉक ने इन रिपोर्टों की पुष्टि कर ली है और चीन रूस के युद्ध प्रयासों को ‘निर्णायक रूप से संभव’ बना रहा है। इसी बैठक में यूरोपीय संघ ने रूस की सैन्य क्षमता को बढ़ाने में मदद करने वाली चीनी कंपनियों पर नए प्रतिबंध भी लगाए। यह पहली बार है जब ब्रसेल्स ने दोहरे उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति से आगे बढ़कर चीन पर प्रत्यक्ष सैन्य प्रशिक्षण की भूमिका का आरोप लगाया है, जिससे आर्थिक और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर गुट की सख़्ती साफ़ झलकती है।
चीन ने इस आरोप को तुरंत और कड़े शब्दों में ख़ारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि ये दावे ‘तथ्यात्मक आधार से रहित’ हैं और ‘सिर्फ़ बदनामी और कलंक लगाने’ की कोशिश है। चीनी पक्ष ने दोहराया कि वह यूक्रेन संकट का पक्षकार नहीं है और उसने हमेशा शांति वार्ता को बढ़ावा दिया है। रूसी मीडिया ने भी कालस के बयान को ‘कथित’ बताते हुए प्रमुखता से दिखाया, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित किया कि यूरोपीय संघ ने विस्तृत सबूत सार्वजनिक नहीं किए।
वैश्विक मंच पर संयुक्त राष्ट्र ने इस घटनाक्रम पर संयमित लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। महासचिव के प्रवक्ता स्टेफ़ान दुजारिक ने न्यूयॉर्क में कहा कि ‘यूक्रेन युद्ध को आख़िरी चीज़ जिसकी ज़रूरत है, वह है और अधिक सैनिक, और अधिक विदेशी हस्तक्षेप और और अधिक विदेशी भागीदारी।’ उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमें इसके विपरीत दिशा में आंदोलन देखना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र का यह बयान किसी एक पक्ष का समर्थन किए बिना संघर्ष में किसी भी नए बाहरी सैन्य योगदान के प्रति वैश्विक चिंता को रेखांकित करता है।
इस विवाद की जड़ें कुछ महीने पुरानी मीडिया रिपोर्टों में हैं। जर्मन अख़बार ‘डी वेल्ट’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने पहले ही दावा किया था कि चीन ने पिछले साल के अंत में गुप्त रूप से लगभग 200 रूसी सैन्य प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया। यूरोपीय संघ के एक सूत्र ने एएफ़पी को बताया कि यह प्रशिक्षण चीन के भीतर कई स्थानों पर हुआ और इसमें सैकड़ों रूसी सैनिक शामिल थे। हालांकि, कालस ने न तो नाम उजागर किए और न ही विस्तृत ब्यौरा दिया, जिससे आरोपों की पुष्टि का स्तर अभी भी कूटनीतिक भाषा में लिपटा हुआ है।
यह घटनाक्रम यूरोपीय संघ-चीन संबंधों में एक नए तनावपूर्ण अध्याय की शुरुआत कर सकता है। ब्रसेल्स पहले से ही चीन को रूस का ‘निर्णायक सहायक’ मानता है, और अब प्रत्यक्ष सैन्य प्रशिक्षण के आरोप प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा सकते हैं। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह स्थिति कूटनीतिक संतुलन को और जटिल बनाती है: भारत रूस का पारंपरिक रक्षा साझेदार है, यूरोपीय संघ के साथ व्यापार और प्रौद्योगिकी संबंध गहरे हो रहे हैं, और चीन के साथ सीमा तनाव बना हुआ है। यदि चीन की सैन्य भूमिका के सबूत मज़बूत होते हैं, तो पश्चिमी देशों का चीन पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ सकता है। फ़िलहाल, चीन इनकार पर अडिग है, संयुक्त राष्ट्र हस्तक्षेप घटाने की अपील कर रहा है, और यूरोपीय संघ ‘परिणामों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन’ करने की बात कहकर अगले क़दम के लिए ज़मीन तैयार कर रहा है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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यूरोपीय संघ ने चीन पर आरोप लगाया कि उसकी सेना ने यूक्रेन में लड़ने के लिए रूसी सैनिकों को प्रशिक्षित किया है, और चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए। चीन ने इन आरोपों को निराधार बताया।
चीन ने यूरोपीय संघ के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उसने रूसी सैनिकों को प्रशिक्षित किया, इसे बिना तथ्य के मानहानि बताया। चीनी विदेश मंत्रालय ने किसी भी सैन्य संलिप्तता से इनकार किया।
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