
हालांड के दो गोलों से ब्राज़ील बाहर, एन्सेलोटी ने 'नए चक्र' का संकल्प लिया
न्यू जर्सी के मेटलाइफ़ स्टेडियम में नॉर्वे ने ब्राज़ील को 2-1 से हराकर 1990 के बाद पहली बार सेलेसाओ को अंतिम-16 से बाहर किया।
एर्लिंग हालांड के दो देर के गोलों ने ब्राज़ील के छठे विश्व कप ख़िताब के सपने को तोड़ दिया। रविवार को अंतिम-16 के मुक़ाबले में नॉर्वे ने 2-1 की जीत दर्ज की, जहाँ ब्राज़ील को 34 प्रतिशत गेंद पर नियंत्रण मिला—1966 के बाद सेलेसाओ का किसी विश्व कप मैच में सबसे कम। नॉर्वे ने 680 पास खेले जबकि ब्राज़ील केवल 329 ही बना सका। पहले हाफ़ में ब्रूनो गिमाराएश का पेनल्टी बचा लिया गया, और हालांड ने 70वें मिनट के बाद दो मौक़ों को गोल में बदलकर स्कैंडिनेवियाई टीम को पहली बार विश्व कप क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँचा दिया। नेमार के चोट-समय के पेनल्टी से स्कोर केवल सांत्वना बन सका।
यह हार ब्राज़ील के लिए 1990 के बाद सबसे ख़राब विश्व कप प्रदर्शन है, जब वह भी इसी चरण में अर्जेंटीना से हारा था। कोच कार्लो एन्सेलोटी ने तुरंत स्पष्ट किया कि वह पद नहीं छोड़ेंगे: “यह अंत नहीं, एक नए चक्र की शुरुआत है।” इतालवी कोच का अनुबंध 2030 तक है और ब्राज़ील फ़ुटबॉल महासंघ (सीबीएफ़) के समन्वयक रोड्रिगो काएतानो ने भी कहा कि “हम 2030 विश्व कप तक कोच के साथ काम जारी रखना चाहते हैं।” पूर्व कप्तान काफ़ू ने भी भरोसा जताया कि एन्सेलोटी को आग से बुझाने के बजाय अब शुरू से टीम गढ़ने का मौक़ा मिलेगा।
पेनल्टी के फ़ैसले पर ब्राज़ीलियाई मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया हुई। ओ ग्लोबो जैसे अख़बारों ने एन्सेलोटी की रणनीति पर सवाल उठाए। कोच ने बताया कि एक साल के आँकड़ों के अनुसार राफ़िन्हा सबसे अच्छे पेनल्टी लेने वाले थे, लेकिन मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों में गिमाराएश को चुना गया। नेमार, जो विकल्प के रूप में उतरे, ने मैच के बाद अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल से संन्यास की घोषणा कर दी। एन्सेलोटी ने मिडफ़ील्ड में युवा प्रतिभाओं की ज़रूरत बताई और कहा कि कासेमीरो व फ़ाबिन्हो के भी हटने की संभावना है।
नॉर्वे अब मियामी में क्वार्टर फ़ाइनल में इंग्लैंड या मेक्सिको से भिड़ेगा। ब्राज़ील की 2002 के बाद ख़िताब की प्रतीक्षा अब कम-से-कम 28 साल तक बढ़ गई है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | +0.20 | neutral |
Ancelotti has let Brazil down, and his apologies are not enough to silence the critics.
The focus is on the coach's personal responsibility, ignoring the match context and player performances.
Ancelotti's contract extension is not mentioned, nor his intention to continue.
Ancelotti looks ahead, confident that Brazil will bounce back and that this defeat is just the start of a new cycle.
The defeat is projected into a narrative of future growth, minimizing the severity of the elimination.
The criticism from fans and Ancelotti's absence from the post-match interview are omitted.
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