
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अंतिम दौर की वार्ता, भारत को प्रतिस्पर्धी बढ़त की उम्मीद
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर की दिल्ली यात्रा के बीच भारत एशियाई निर्यातकों पर शुल्क लाभ चाहता है, जबकि 24 जुलाई की समयसीमा नजदीक है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर मंगलवार से दो दिवसीय वार्ता के लिए नई दिल्ली में हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत एक ऐसे अंतरिम व्यापार समझौते पर जोर दे रहा है जो उसे वियतनाम, बांग्लादेश जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पर तुलनात्मक शुल्क लाभ दे। यूएसटीआर कार्यालय ने वार्ता का उद्देश्य "निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक व्यापार" बताया है। फरवरी में दोनों पक्ष भारतीय निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क की रूपरेखा पर सहमत हुए थे, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्यापक पारस्परिक शुल्कों को अमान्य करार दिए जाने के बाद अंतिम समझौता लटक गया। अब 24 जुलाई को अस्थायी 10 प्रतिशत शुल्क की समयसीमा समाप्त हो रही है, जिससे बातचीत में तेजी आई है।
हालांकि, यूएसटीआर की धारा 301 जांच के तहत अतिरिक्त शुल्कों का प्रस्ताव जटिलता बढ़ा रहा है। इस जांच में भारत, चीन, वियतनाम समेत कई देशों पर अत्यधिक औद्योगिक क्षमता और बंधुआ श्रम के आरोप लगाए गए हैं। प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत तक के शुल्क से भारतीय परिधान निर्यातकों के मार्जिन पर 8-10 प्रतिशत तक का दबाव पड़ सकता है, जबकि उन्हें चीन पर कोई प्रतिस्पर्धी बढ़त नहीं मिलेगी। उद्योग सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी खरीदार अतिरिक्त लागत वहन करने को तैयार नहीं हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों पर बोझ बढ़ेगा।
वैश्विक स्तर पर, कई देश अमेरिकी संरक्षणवाद और आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के बीच व्यापार विविधीकरण की कोशिशों में जुटे हैं। ब्राजील सरकार मर्कोसुर-ईयू, ईएफटीए और कनाडा, मैक्सिको, जापान के साथ समझौतों के जरिये अमेरिका और चीन पर निर्भरता घटाना चाहती है। इंडोनेशियाई चैंबर ऑफ कॉमर्स चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए बीजिंग में सक्रिय है, क्योंकि उसका चीन-व्यापार वियतनाम और मलेशिया से काफी पीछे है। मोरक्को के निवेश मंत्री ने चीनी कंपनियों को अफ्रीकी बाजार तक पहुंच का प्रस्ताव देते हुए निवेश आकर्षित करने की पहल की है। ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि विकासशील अर्थव्यवस्थाएं नए व्यापार गठजोड़ और निवेश स्रोतों की तलाश में हैं।
भारत के लिए, अमेरिकी बाजार में निर्यात बढ़त बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। धारा 301 जांच के नतीजे और शुल्क ढांचे पर अंतिम निर्णय आगामी सप्ताहों में अपेक्षित हैं। गोयल ने कहा है कि यदि समझौता 24 जुलाई से पहले हो जाए तो "जितनी जल्दी, उतना बेहतर"। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देश समझौते के "बहुत करीब" हैं। अब वार्ता का केंद्र यह है कि क्या भारत को आश्वासन मिलता है कि समझौते के बाद नए शुल्क नहीं लगाए जाएंगे और क्या शुल्क दरें प्रतिस्पर्धी बढ़त सुनिश्चित करेंगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ
भारत अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है, जो उसे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे एशियाई प्रतिस्पर्धियों पर टैरिफ लाभ दे। नई दिल्ली यह गारंटी भी चाहता है कि समझौते के बाद वाशिंगटन नए शुल्क नहीं लगाएगा, जबकि घरेलू परिधान निर्यातकों को चिंता है कि प्रस्तावित श्रम शुल्क उनके पहले से ही कम मार्जिन को और घटा सकते हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की नई दिल्ली यात्रा एक अंतरिम व्यापार समझौते को पूरा करने की अंतिम कोशिश है, जिसमें भारत अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर टैरिफ शर्तें चाहता है। दोनों पक्ष तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं, हाल के उच्च-स्तरीय बैठकों और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाओं की पृष्ठभूमि में।
संबंधित लेख
मेस्सी का ऐतिहासिक दोहरा रिकॉर्ड: विश्व कप के सर्वकालिक शीर्ष गोलस्कोरर बने, अर्जेंटीना अगले दौर में
9 भाषाएँ · 56 स्रोत
अपराध एवं आपदाफ्रांस में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी: कार में दो बच्चे मृत, तीन बुजुर्गों की मौत, 13 डूबे
11 भाषाएँ · 37 स्रोत
भू-राजनीति और राजनीतिअमेरिका ने ईरानी तेल पर 60 दिन के लिए प्रतिबंध हटाए, शांति वार्ता में अहम कदम
9 भाषाएँ · 36 स्रोत