
युद्धविराम के बावजूद इज़राइली हमले, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर संकट
शुक्रवार को इज़राइल-हिज़बुल्लाह युद्धविराम के बाद भी शनिवार को इज़राइली हमलों में 5 लोगों की मौत ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते की राह मुश्किल कर दी है।
इज़राइल और हिज़बुल्लाह के बीच शुक्रवार को घोषित युद्धविराम के कुछ ही घंटों बाद शनिवार तड़के दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हवाई और तोपखाने हमलों में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी (एनएनए) के अनुसार, नबातीह क्षेत्र में कई आवासीय इमारतें नष्ट हुईं और भोर तक गोलाबारी जारी रही। इससे एक दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच हुए व्यापक शांति समझौते के तहत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने की प्रतिबद्धता जताई गई थी, लेकिन शुक्रवार को हुए भीषण संघर्ष में 47 लेबनानी और 4 इज़राइली सैनिक मारे गए थे।
इज़राइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि हिज़बुल्लाह हमला नहीं करता तो उनके लिए युद्ध का समय नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में सेना के "जब तक ज़रूरी हो" बने रहने की बात दोहराई। हिज़बुल्लाह सूत्रों का दावा है कि उसके हमले इज़राइली आक्रमण की प्रतिक्रिया हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि अमेरिका समझौते के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार होगा और उसे परिणाम भुगतने होंगे। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने स्थायी युद्धविराम को वार्ता की पूर्व शर्त बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने इज़राइल से "शांत होकर दिमाग लगाने" को कहा, जिसके बाद युद्धविराम संभव हुआ। व्हाइट हाउस ने भी इज़राइल के लेबनान अभियान पर नाराजगी जताई है।
हिंसा के कारण शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान तकनीकी वार्ता स्थगित कर दी गई थी, लेकिन बाद में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री के शनिवार को स्विट्जरलैंड रवाना होने से बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद बँधी है। दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित 60-दिवसीय अंतरिम समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक, प्रतिबंधों में ढील और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसे मुद्दे शामिल हैं। भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अहम है—यहाँ से गुज़रने वाला कच्चा तेल वैश्विक आपूर्ति का पाँचवाँ हिस्सा है और खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कामगार रहते हैं। युद्धविराम की नाजुकता से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रवासियों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
यह संघर्ष फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुआ, जब अमेरिका और इज़राइल ने हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को मार गिराया। जवाब में हिज़बुल्लाह ने इज़राइल पर रॉकेट दागे, जिसके बाद इज़राइल ने बड़े पैमाने पर बमबारी और ज़मीनी आक्रमण किया। अब तक लेबनान में 3,980 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, 23-25 जून को वाशिंगटन में इज़राइल-लेबनान के बीच पाँचवें दौर की सीधी वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें हिज़बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और स्थायी शांति पर चर्चा होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वे हालात पर करीबी नज़र बनाए हुए हैं और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह कर रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष विराम शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हवाई हमलों में पांच लोग मारे गए, जिससे युद्धविराम की स्थिरता पर गंभीर संदेह पैदा हो गया। लेबनानी राज्य मीडिया की रिपोर्टों में आवासीय इमारतों के विनाश पर प्रकाश डाला गया है, जिससे क्षेत्र में संभावित पुनर्सक्रियता की आशंका बढ़ गई है। यह घटना उन तनावों को रेखांकित करती है जो हाल ही में संपन्न समझौते को तोड़ने की धमकी देते हैं।
Despite the announcement of a ceasefire between Israel and Hezbollah, new Israeli raids in southern Lebanon killed five people, raising questions about the ceasefire's viability. The reports focus on the attack in Arabsalim and overnight incursions in the Nabatieh area, while diplomatic attention shifts to US-Iran talks. The news is framed within the broader context of regional tensions and ongoing negotiations.
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