
फ्रांस ने फिर रोका मोरक्को का सपना, लेकिन ‘एटलस शेरों’ का भविष्य उज्ज्वल
क्वार्टर फाइनल में 2-0 की हार के बावजूद, मोरक्को लगातार दो विश्व कप में अंतिम-8 में पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी टीम बनकर 2030 की सह-मेजबानी की ओर देख रहा है।
बोस्टन के जिलेट स्टेडियम में गुरुवार रात किलियन एम्बाप्पे का एक पल मोरक्को के लिए सबकुछ बदल गया। 28वें मिनट में यासीन बूनू ने एम्बाप्पे का पेनल्टी बचाकर उम्मीद जगाई, लेकिन दूसरे हाफ में फ्रांसीसी कप्तान ने बॉक्स के बाहर से शानदार गोल दागा। इससे पहले मोरक्को के डिफेंडरों ने एड्रियन राबियो के हैंडबॉल की अपील करते हुए खेल रोक दिया था, पर रेफरी ने सीटी नहीं बजाई और एम्बाप्पे ने मौका भुनाया। छह मिनट बाद ही उन्होंने ओस्मान डेम्बेले को दूसरा गोल करवाकर मैच 2-0 से फ्रांस के पक्ष में कर दिया। मोरक्को पूरे मैच में सिर्फ पांच शॉट लगा सका, जबकि फ्रांस ने 22 प्रयास किए।
यह हार एक ऐतिहासिक सफर का अंत थी। मोरक्को ने ग्रुप चरण में ब्राजील से 1-1 ड्रॉ खेला, फिर नीदरलैंड्स को पेनल्टी शूटआउट में हराया और कनाडा को 3-0 से रौंदा। इसके साथ ही वह लगातार दो विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी टीम बन गया। मार्च में कोच मोहम्मद ओहाबी ने महज तीन महीने पहले टीम संभाली थी, लेकिन उन्होंने टीम की शैली को अधिक आक्रामक और कब्जे वाला बना दिया। 18 वर्षीय मिडफील्डर अय्यूब बौआद्दी, जिन्होंने फ्रांस की युवा टीमों का प्रतिनिधित्व करने के बाद मोरक्को चुना, इस टूर्नामेंट के सितारों में से एक रहे।
मोरक्को के घरेलू मीडिया ने हार के बावजूद सकारात्मक रुख अपनाया। ‘ले मातां’ ने इसे ‘उल्लेखनीय सफर’ बताया, जबकि ‘ले360 स्पोर्ट’ ने टीम को ‘बहादुर’ कहा। हालांकि, कुछ अरबी विश्लेषकों ने ओहाबी की रणनीति पर सवाल उठाए। हेस्प्रेस के एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ने नुसैर मजरावी को सेंटर-बैक में खिलाने और आक्रमण में स्पष्ट भूमिका न होने की आलोचना की। दूसरी ओर, वैश्विक मीडिया ने मोरक्को की ऐतिहासिक उपलब्धि पर जोर दिया। प्रीमियम टाइम्स और सिटीजन टीवी ने इसे अफ्रीकी फुटबॉल के लिए एक और मील का पत्थर बताया, जबकि द हिंदू ने ओहाबी के इस बयान को रेखांकित किया कि टीम में ‘विचारों की कमी’ रही।
हार के बाद ओहाबी ने कहा, “हमने सबकुछ झोंक दिया, लेकिन फ्रांस बहुत मजबूत था। हमें इस अनुभव से सीखकर और मजबूत होकर लौटना है।” बौआद्दी ने भी मोरक्को चुनने पर कोई पछतावा न होने की बात दोहराई। अब मोरक्को का ध्यान सितंबर में शुरू होने वाले अफ्रीका कप ऑफ नेशंस क्वालीफायर पर है, जहां उसे गैबॉन, लेसोथो और नाइजर से भिड़ना है। इसके बाद 2030 विश्व कप की तैयारी है, जिसकी वह स्पेन और पुर्तगाल के साथ सह-मेजबानी करेगा। युवा प्रतिभाओं से भरी इस टीम के लिए यह हार एक पड़ाव भर है, मंजिल अभी बाकी है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +0.30 | aligned |
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| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | +0.20 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.40 | aligned |
मोरक्को गर्व और दृढ़ संकल्प के साथ आगे देखता है, हार को 2030 की ओर एक स्प्रिंगबोर्ड में बदल देता है।
कहानी तत्काल मैच परिणाम से ध्यान हटाकर दीर्घकालिक परियोजना पर केंद्रित करती है, कोच के बयानों का उपयोग करके भविष्य में विश्वास को स्थिर करती है।
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मोरक्को गरिमा के साथ हार स्वीकार करता है और मजबूत होकर वापसी का वादा करते हुए भविष्य की ओर देखता है।
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मोरक्को हार नहीं मानता: हार फ्रांस के खिलाफ भविष्य के बदले का ईंधन बन जाती है।
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