
एक दशक पुरानी 'गोबलिन' की लहरें, ईरानी पर्दे की दस्तक और एक माँ-बेटे का साझा आगाज़
गोंग यू के लौटते लम्हे से लेकर सुनीता आहूजा के बेटे के साथ डेब्यू और ईरानी सिनेमा-रंगमंच की तैयारियों तक, दृश्य-श्रव्य दुनिया एक साथ अतीत और भविष्य को जी रही है।
एक पुराने ब्रेकवाटर पर, जहाँ समुद्र की लहरें पिछले दस सालों से उन्हीं पत्थरों से टकरा रही हैं, गोंग यू ने वही लाल दुपट्टा और अनाज के फूल वाला दृश्य दोहराया जिसने करोड़ों दिलों में 'गोबलिन' को अमर कर दिया था। टीवीएन के विशेष कार्यक्रम 'गोबलिन टेंथ एनिवर्सरी ट्रिप' के दौरान उन्होंने सह-कलाकार किम गो-यून की ओर मुड़कर दस साल पुराना संवाद दोहराया—‘क्या तुम इस गोरियो आदमी की दुल्हन बनोगी?’—जिस पर सेट हँसी और आँसुओं से भर गया। यह कोई सामान्य शूट नहीं था, बल्कि उन पात्रों का पुनर्मिलन था जिन्होंने कोरियाई नाटकों को दक्षिण एशिया से लेकर लातिन अमेरिका तक लिविंग रूम का हिस्सा बना दिया। पास ही खड़े ली डोंग-वूक और यू इन-ना की आँखें भी नम थीं, और जब दूर मौजूद सहयोगियों के वीडियो संदेश आए तो रुलाई थम नहीं पाई।
यह पुरानी यादों का मौसम एक साथ कई भौगोलिक छोरों पर नई शुरुआतों को जन्म दे रहा है। मुंबई में, दिग्गज अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा अपने बेटे यश आहूजा के साथ एक फ़िल्म में पर्दे पर उतरने की तैयारी कर रही हैं, जो एकता कपूर के बैनर तले सितंबर में रिलीज़ होगी। सुनीता ने एक साक्षात्कार में बताया कि फ़िल्म में वह यश की माँ का ही किरदार निभाएंगी और इसे ‘उद्योग में ऐसा पहला मौका बताया जब माँ-बेटा एक साथ लॉन्च हो रहे हों।’ उन्होंने दर्शकों से अपील भी की कि जो प्यार उन्होंने ख़ुद को दिया, वही आशीर्वाद उनके बेटे पर बरसाएँ। यह दृश्य बॉलीवुड के पारिवारिक विस्तार और 'द हस्बैंड' जैसे कोरियाई नाटकों में दिख रहे तनावपूर्ण पारिवारिक संबंधों के बीच एक सेतु बनाता है, जहाँ नामकूंग मिन का किरदार अपनी अगवा पत्नी को बचाने के लिए एक अपराधी से भिड़ता है और नए एपिसोड में अनजान पारिवारिक सच्चाइयाँ उभरती हैं।
तेहरान में, फ़िल्मकार सोरूश सहत की ‘एस्तख़्र’ (स्वीमिंग पूल) के पोस्टर ने अमीन हयाई, सहर दौलतशाही और मेहरान मोदिरी जैसे चेहरों को एक साथ लाकर ईरानी सिनेमा की व्यस्त गर्मियों का आगाज़ कर दिया। फ़िल्म २४ तीर (जुलाई मध्य) से प्रदर्शित होगी, और इसके समानांतर फ़रशाद लोत्फ़ी का मंच-नाटक ‘दस्तान-ए-ऊ’ भी दर्शकों के सामने आने को तैयार है। नाटक की कहानी सत्ता, अपराध और छुपे अतीत के साये में जीते लोगों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल करती है—एक ऐसा विषय जो ‘लव इन सिंक’ के उस दृश्य से कम गहरा नहीं है जहाँ किम म्युंग-सू का किरदार अपनी बहन के सामने टूटता है, या ‘ड्रीम टू यू’ में ली यूल-इउम की नायिका सितारों भरी ज़िंदगी के भीतर अपने सपनों की असलियत तलाशती है। इन सबके बीच, पूर्व एक्सआईडी सदस्य हानी तीन साल बाद ‘लव ऑन द मेन्यू’ से अभिनय में लौट रही हैं, जहाँ उन्हें एक ऐसी माँ की भूमिका निभानी है जो अपने भीतर छुपे बचपन को भी सहेजे हुए है।
यह तमाम कथाएँ एक ही भावनात्मक गुरुत्वाकर्षण की ओर खिंचती हैं—जहाँ पर्दा केवल मनोरंजन नहीं, सामूहिक स्मृति और पारिवारिक बंधनों का दर्पण बन जाता है। 'गोबलिन' का वह ब्रेकवाटर आज भी प्रशंसकों के लिए तीर्थ बना हुआ है, जहाँ लाल दुपट्टे के साथ तस्वीरें खिंचवाई जाती हैं। और सुनीता आहूजा की विनती—‘मेरे बेटे यश को भी वही प्यार और आशीर्वाद दीजिए’—पीढ़ियों के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाती है, जिसमें हर नया चेहरा किसी न किसी पुरानी कहानी का वारिस होता है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.60 | aligned |
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| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.65 | aligned |
The Goblin cast revisits its most beloved locations, reaffirming the drama's timeless charm and fan devotion.
By focusing on the actors' personal memories and reenacting iconic moments, the narrative creates a sense of shared nostalgia that validates the drama's lasting impact.
The drama's most iconic moment is brought back to life on the very set, proving that Goblin's magic remains intact after a decade.
By highlighting the exact reenactment of a famous scene, the coverage transforms a simple anniversary event into a proof of the drama's undiminished appeal.
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