
नशे में वाहन चलाने के ख़िलाफ़ वैश्विक कार्रवाई: ताइवान में मृत्युदंड, ब्राज़ील में नए नियम, और अमेरिका-कनाडा में गिरफ़्तारियाँ
एटोमिडेट को श्रेणी-1 मादक पदार्थ घोषित करने से लेकर पहली बार लाइसेंस लेने वालों के लिए अनिवार्य टॉक्सिकोलॉजिकल जांच तक, दुनिया भर में नशे में गाड़ी चलाने के ख़िलाफ़ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
ताइवान ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एटोमिडेट को श्रेणी-1 मादक पदार्थों में शामिल करने का निर्णय लिया है। न्याय मंत्रालय की नारकोटिक्स समीक्षा समिति की सिफारिश पर लिए गए इस फ़ैसले के तहत, जिसे ‘ज़ॉम्बी वेप’ के नाम से जाना जाने वाला यह पदार्थ अब सबसे ख़तरनाक श्रेणी में आएगा। कैबिनेट की औपचारिक मंज़ूरी के बाद एटोमिडेट के निर्माण, परिवहन या बिक्री पर मृत्युदंड तक की सज़ा संभव होगी, जबकि इसे रखने मात्र पर तीन साल की क़ैद का प्रावधान है। यह सख्ती ऐसे समय में आई है जब पूरे द्वीप में नशे में गाड़ी चलाने से जुड़ी घातक दुर्घटनाओं ने जनता और प्रशासन को चिंता में डाल दिया है।
उत्तरी अमेरिका से आई ख़बरें इस चिंता को और गहराती हैं। अमेरिका के फ़्लोरिडा में एक व्यक्ति को राजमार्ग पर 90 मील प्रति घंटे से अधिक की रफ़्तार से भागने के बाद गिरफ़्तार किया गया; जाँच में उसकी कार से 34 खुली हुई व्हाइट क्लॉ बियर की कैन बरामद हुईं। कनाडा के ओंटारियो प्रांत में भी एक चालक रात के अंधेरे में बिना हेडलाइट जलाए 60 किमी प्रति घंटे की सीमा वाली सड़क पर 146 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से गाड़ी दौड़ाता पकड़ा गया। पुलिस ने उस पर नशे में वाहन चलाने, ख़तरनाक ड्राइविंग और अन्य आरोप लगाए हैं। ये दोनों मामले दिखाते हैं कि शराब और नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना केवल एशिया तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि विकसित देशों में भी लगातार जानलेवा बना हुआ है।
दक्षिण अमेरिका से एक निवारक पहल सामने आई है। ब्राज़ील का यातायात विभाग (डेट्रान) 29 जून से मोटरसाइकिल और कार श्रेणियों के लिए पहली बार लाइसेंस लेने वाले सभी आवेदकों के लिए टॉक्सिकोलॉजिकल परीक्षण अनिवार्य कर रहा है। नियम के अनुसार, शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन से पहले आवेदक को पिछले 90 दिनों के भीतर का नकारात्मक परिणाम प्रस्तुत करना होगा, अन्यथा प्रक्रिया रोक दी जाएगी। यह क़दम नए चालकों के बीच नशे की प्रवृत्ति को शुरुआत में ही रोकने की सोच को दर्शाता है, जो दंडात्मक कार्रवाई के बजाय रोकथाम पर ज़ोर देता है।
ये घटनाक्रम एक व्यापक वैश्विक रुझान की ओर इशारा करते हैं जिसमें नशे में वाहन चलाने के ख़िलाफ़ क़ानूनी और प्रशासनिक हथियार तेज़ किए जा रहे हैं। एशिया में ताइवान का मृत्युदंड का प्रावधान अत्यंत कठोर दंड की परंपरा को आगे बढ़ाता है, जबकि उत्तरी अमेरिका में प्रवर्तन एजेंसियाँ सड़क पर सक्रिय निगरानी से मामले पकड़ रही हैं। दक्षिण एशिया, ख़ासकर भारत, के लिए यह संदर्भ महत्वपूर्ण है। भारत में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत पहले से ही कठोर दंड मौजूद हैं, लेकिन एटोमिडेट जैसे नए मादक पदार्थों का वर्गीकरण अभी स्पष्ट नहीं है और नए चालकों के लिए टॉक्सिकोलॉजिकल जाँच अनिवार्य नहीं है। ब्राज़ील का निवारक मॉडल और ताइवान की सख़्ती भारत जैसे देशों को नीतिगत सबक दे सकती है, जहाँ सड़क हादसों में नशे की भूमिका लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या अन्य देश भी एटोमिडेट को शीर्ष श्रेणी में रखते हैं और क्या लाइसेंस-पूर्व जाँच वैश्विक मानक बन पाती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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From June 29, first-time license applicants for cars and motorcycles in Brazil must provide a negative drug test. The traffic authority warns that physical and psychological exams will only proceed after a negative result issued within 90 days; otherwise, the process is halted. The measure aims to prevent drug-impaired driving from the very start of a driver's career.
A Barrie, Ontario man was arrested for driving 146 km/h in a 60 zone, without headlights, while impaired. Provincial police stress the extreme danger and multiple charges. The incident underscores ongoing enforcement against drunk and drugged driving.
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