
जिनेवा में वैश्विक AI संवाद: असमान विकास और शासन की चुनौतियाँ
संयुक्त राष्ट्र के पहले वैश्विक AI संवाद में वैज्ञानिक पैनल ने चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रसार तेज़ लेकिन असमान है, और मौजूदा सुरक्षा उपाय इसकी गति से पीछे हैं।
जिनेवा में 6-7 जुलाई को आयोजित संयुक्त राष्ट्र के पहले ‘वैश्विक AI शासन संवाद’ में 108 देशों ने भाग लिया, जहाँ स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार, AI क्षमताएँ मौजूदा सुरक्षा ढाँचों से कहीं तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं, और इसका लाभ-हानि दोनों ही असमान रूप से बँट रहे हैं। पैनल ने पाया कि दुनिया की 500 सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटरों में 75 प्रतिशत क्षमता अमेरिका और 15 प्रतिशत चीन के पास केंद्रित है, जिससे वैश्विक AI विकास में गहरी विषमता उजागर होती है।
श्रम बाज़ारों पर AI का प्रभाव अभी सीमित लेकिन संकेत देने वाला है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, आसियान क्षेत्र में लगभग 8 करोड़ नौकरियाँ — कुल रोज़गार का 22.9 प्रतिशत — जनरेटिव AI के प्रति कम से कम आंशिक रूप से संवेदनशील हैं, हालाँकि केवल 3.3 प्रतिशत (लगभग 1.17 करोड़) ही उच्चतम जोखिम श्रेणी में हैं। ऑस्ट्रेलिया में सरकारी आँकड़े बताते हैं कि AI के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियाँ नहीं गई हैं, लेकिन टेलीमार्केटिंग, लेखा और विज्ञापन जैसे नियमित संज्ञानात्मक कार्यों वाले पेशे सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना रखते हैं, और इनमें महिलाओं तथा विश्वविद्यालय-शिक्षित पेशेवरों की हिस्सेदारी अधिक है। अमेरिका में ‘इनडीड’ के आँकड़े दिखाते हैं कि 2022 से 2026 के बीच AI युक्त नौकरी शीर्षकों की संख्या तीन गुना हो गई है, और यह बदलाव अब तकनीकी क्षेत्र से बाहर बिक्री, शिक्षा और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी फैल रहा है।
AI के दुरुपयोग के मामले भी सामने आ रहे हैं। मैक्सिको में एक अध्ययन के अनुसार, डीपफेक और AI-जनित पहचान धोखाधड़ी अब कुल वैश्विक हमलों का 23.3 प्रतिशत है, और जनरेटिव AI उपकरणों की सुलभता ने धोखाधड़ी की लागत को 100 गुना तक कम कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात में साइबर सुरक्षा परिषद ने पाया कि 90 प्रतिशत से अधिक डिजिटल सेंध AI-संचालित फ़िशिंग से जुड़ी हैं, हालाँकि शोध यह भी बताते हैं कि प्रशिक्षित उपयोगकर्ता ऐसे परिष्कृत हमलों को पहचानने और रोकने में सक्षम हैं — एक अध्ययन में 46 प्रतिशत प्राप्तकर्ताओं ने AI-जनित फ़िशिंग ईमेल पर क्लिक नहीं किया।
वैश्विक दक्षिण के देश शासन में समावेशिता पर ज़ोर दे रहे हैं। इंडोनेशिया ने जिनेवा मंच पर बच्चों की सुरक्षा को AI नियमों का केंद्रबिंदु बनाने का प्रस्ताव रखा और अपने राष्ट्रीय नियमन ‘PP TUNAS’ का उदाहरण दिया। केन्या जैसे देशों में डिजिटल विश्वास और ‘डिज़ाइन द्वारा गोपनीयता’ की माँग उठ रही है, जहाँ AI सहायकों को सौंपी गई व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा एक बड़ा प्रश्न है। ‘ग्लोबल इंडेक्स ऑन रिस्पॉन्सिबल AI’ के दूसरे संस्करण के अनुसार, 135 देशों में ज़िम्मेदार AI शासन का विस्तार हो रहा है, लेकिन बाध्यकारी कानूनी सुरक्षा उपायों और स्वतंत्र निगरानी संस्थानों का अभाव बना हुआ है, विशेषकर ग्लोबल साउथ में।
अगला ठोस कदम वैज्ञानिक पैनल की अंतिम रिपोर्ट होगी, जो 2026 के अंत तक अपेक्षित है, और इसके आधार पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में AI शासन पर एक वैश्विक समझौते की रूपरेखा पर चर्चा हो सकती है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.50 | aligned |
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