
रूस-चीन के नौसैनिक अभ्यासों से ब्रिटेन और जापान में चिंता, समुद्री सीमाओं पर तनाव
एक सप्ताहांत में दो अलग-अलग घटनाओं में रूसी और चीनी युद्धपोतों ने ब्रिटेन और जापान के निकट लाइव-फायर अभ्यास किए, जिससे कूटनीतिक विरोध और निगरानी बढ़ी।
रविवार तड़के, चीनी नौसेना के एक लुयांग-III श्रेणी के विध्वंसक ने जापान के सबसे दक्षिणी द्वीप ओकिनोटोरी से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में प्रशांत महासागर में लाइव-फायर अभ्यास किया। जापानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह क्षेत्र जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में आता है। इसी दौरान, पास में एक रूसी स्टेरेगुश्ची-श्रेणी का युद्धपोत भी मौजूद था। इससे एक दिन पहले, सोमवार को, रूसी युद्धपोत नेउस्त्राशिमी ने ब्रिटेन के प्लायमाउथ तट से 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जल में तोपखाने का अभ्यास किया, जिस पर रॉयल नेवी के गश्ती पोत एचएमएस टाइन ने कड़ी निगरानी रखी। दोनों घटनाओं ने एक साथ पश्चिमी और पूर्वी एशियाई समुद्री सीमाओं पर रूस और चीन की सैन्य सक्रियता को रेखांकित किया।
जापानी सरकार ने मंगलवार को चीन के खिलाफ कूटनीतिक माध्यम से औपचारिक विरोध दर्ज कराया। मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने कहा कि इस अभ्यास से आसपास के जहाजों के लिए खतरा पैदा हो सकता था, हालांकि चीनी युद्धपोत ने अभ्यास से ठीक पहले रेडियो द्वारा सूचना जारी की थी। जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी, जो उस समय ब्रिटेन के एक एयर शो में भाग ले रहे थे, ने इस घटना को चीन और रूस के बीच गहराते सैन्य सहयोग का प्रमाण बताया। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि रूसी अभ्यास अंतरराष्ट्रीय जल में हुआ और रॉयल नेवी ने पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए तैयार है। ब्रिटेन ने कोई विरोध नहीं जताया, लेकिन यह घटना रूसी नौसेना की नियमित चैनल पारगमन गतिविधियों का हिस्सा है।
चीन ओकिनोटोरी को एक चट्टान मानता है, द्वीप नहीं, और इस आधार पर जापान के EEZ दावे को खारिज करता है। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने पिछले सप्ताह कहा था कि चीन-रूस सैन्य सहयोग दोनों देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय शांति की रक्षा करता है, और किसी भी निराधार अटकलबाजी से बचने का आग्रह किया। रूसी पक्ष ने सीधे कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन रूसी मीडिया ने जापान की शिकायत को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे अभ्यास नियमित हैं और टोक्यो इन्हें शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखता है। जापानी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि यह पहली बार है जब उसने अपने EEZ में चीनी लाइव-फायर अभ्यास का सार्वजनिक खुलासा किया है, हालांकि यह गतिविधि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करती।
ये घटनाएं ऐसे समय में हुई हैं जब जापान-चीन संबंध ताइवान और विवादित द्वीपों को लेकर तनावपूर्ण हैं। जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के ताइवान पर बयानों के बाद से द्विपक्षीय संबंध खराब हुए हैं। वहीं, ब्रिटेन-रूस संबंध यूक्रेन युद्ध के कारण निचले स्तर पर हैं। जापान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और अमेरिका व यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई है, जिसमें 2027 तक सैन्य खर्च को जीडीपी के 2% तक ले जाना शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, रूस और चीन के संयुक्त गश्ती और अभ्यासों का बढ़ता क्रम समुद्री मानदंडों की परीक्षा ले रहा है और यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, जापान और ब्रिटेन निगरानी जारी रखे हुए हैं और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।
| चीनी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| जापानी-कोरियाई प्रेस | −0.70 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.30 | aligned |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
चीन इस अभ्यास को रूस के साथ एक नियमित संयुक्त अभियान मानता है, जापानी विरोध को निराधार बताते हुए क्योंकि ओकिनोटोरी एक चट्टान है, द्वीप नहीं।
चीन क्षेत्र को जापान के 'दावा किए गए EEZ' के रूप में संदर्भित करके कार्रवाई को सामान्य बनाता है, एक पूर्व-मौजूदा कानूनी विवाद के माध्यम से विरोध को अवैध ठहराता है।
यह नहीं बताता कि जापान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस तरह के अभ्यास को स्वीकार किया, और यह कि राजनयिक विरोध अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित है।
जापान इस अभ्यास को अपनी आर्थिक संप्रभुता के खतरनाक उल्लंघन के रूप में निंदा करता है, इसकी दुर्लभता और नेविगेशन के लिए खतरे पर जोर देता है।
घटना की नवीनता ('पहली बार') और छवियों की रिहाई का उपयोग तात्कालिकता की भावना पैदा करने और विरोध को वैध बनाने के लिए करता है।
चीनी स्थिति को छोड़ देता है कि ओकिनोटोरी एक चट्टान है और द्वीप नहीं है, इसलिए EEZ उत्पन्न नहीं करता है।
रूस अभ्यास को चीन के साथ सैन्य सहयोग को मजबूत करने के रूप में फ्रेम करता है, जापानी विरोध को नियमित राजनयिक प्रतिक्रियाओं के रूप में कम करता है।
घटना को दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के हिस्से के रूप में पुनर्परिभाषित करता है, कथित उल्लंघन से ध्यान हटाकर द्विपक्षीय सहयोग पर केंद्रित करता है।
यह विवरण छोड़ देता है कि अभ्यास टोक्यो की परिभाषा के अनुसार जापान के EEZ के भीतर हुआ, और जापान ने राजनयिक माध्यमों से बीजिंग से संपर्क किया।
यूरोप जापानी स्रोतों का हवाला देते हुए और घटनाओं के अनुक्रम का वर्णन करते हुए, बिना पक्ष लिए तथ्यों की रिपोर्ट करता है।
एक अलग, तकनीकी स्वर अपनाता है, जानकारी को वस्तुनिष्ठ समाचार के रूप में प्रस्तुत करता है, जो जापानी विरोध को एक निर्विवाद तथ्य बनाता है।
ओकिनोटोरी की स्थिति पर कानूनी विवाद को छोड़ देता है, जो चीन की चुनौती के लिए केंद्रीय है।
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