
AI डेटा सेंटरों की बिजली खपत अधिकांश देशों से अधिक: संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने लंदन जलवायु कार्रवाई सप्ताह में AI कंपनियों से ऊर्जा, जल और भूमि उपयोग का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने और 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने का आह्वान किया।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा जून 2025 में जारी एक अध्ययन के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को संचालित करने वाले डेटा सेंटरों ने 2025 में 448 टेरावाट-घंटे (TWh) बिजली की खपत की, जो फ्रांस (468 TWh) के बाद विश्व का 11वां सबसे बड़ा उपभोक्ता होने के बराबर है। अनुमान है कि 2030 तक ये केंद्र केवल पाँच देशों को छोड़कर शेष सभी से अधिक ऊर्जा का उपयोग करेंगे, और इतना जल लेंगे जो उप-सहारा अफ्रीका की 1.3 अरब आबादी की वार्षिक मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कर सके। इसी पृष्ठभूमि में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने लंदन जलवायु कार्रवाई सप्ताह में ‘AI पर्यावरणीय पारदर्शिता पहल’ शुरू की, जिसके तहत AI कंपनियों से कार्बन उत्सर्जन, जल उपयोग और भूमि प्रभाव का मानकीकृत सार्वजनिक खुलासा करने को कहा गया।
गुटेरेस ने कहा कि AI का विकास समाधान खोजने में सहायक हो सकता है, लेकिन इसकी वास्तविक पर्यावरणीय लागत को छिपाना स्वीकार्य नहीं है। यूरोप में जारी भीषण गर्मी की लहर और ऊर्जा संकट का हवाला देते हुए उन्होंने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को ‘विनाशकारी उत्पत्ति’ बताया। उन्होंने AI उद्योग से 2030 तक सभी डेटा सेंटरों को सौर, पवन या अन्य नवीकरणीय स्रोतों से संचालित करने की प्रतिबद्धता की मांग की। वर्तमान में AI कंपनियाँ स्वैच्छिक नेट-ज़ीरो लक्ष्यों और नवीकरणीय बिजली खरीद समझौतों पर निर्भर हैं, जबकि कई नई परियोजनाओं के लिए गैस या परमाणु ऊर्जा की ओर रुख कर रही हैं।
इसके साथ ही महासचिव ने मीथेन उत्सर्जन पर वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने जीवाश्म ईंधन कंपनियों से रिसाव की मरम्मत, नियमित फ्लेयरिंग बंद करने और विज्ञान-आधारित मानक अपनाने को कहा। मीथेन वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग के लगभग एक-तिहाई के लिए जिम्मेदार है, और 2025 में लगभग 167 अरब घन मीटर गैस बिना उपयोग के जला दी गई—जो अफ्रीका की वार्षिक खपत के बराबर है। गुटेरेस ने सरकारों से जीवाश्म ईंधन कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर कर लगाकर उसे स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और संवेदनशील समुदायों की सहायता में लगाने का भी आग्रह किया।
दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत में डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ रही है, और यहाँ AI अवसंरचना का विस्तार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र की पारदर्शिता पहल से ऐसे मानक बन सकते हैं जिनका पालन भारतीय कंपनियों को भी करना होगा, विशेषकर यदि वे वैश्विक बाजारों में सेवाएँ देना चाहती हैं। गुटेरेस ने घोषणा की कि वे सितंबर में तुर्की में होने वाली COP31 जलवायु वार्ता से पहले विश्व नेताओं को बुलाएँगे, ताकि जीवाश्म ईंधन से ‘न्यायसंगत संक्रमण’ को गति दी जा सके। अगला ठोस कदम सितंबर की यह उच्च-स्तरीय बैठक होगी, जहाँ AI पारदर्शिता और मीथेन कटौती पर ठोस रूपरेखा सामने आ सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि AI डेटा सेंटर अधिकांश देशों से अधिक बिजली की खपत करते हैं और कंपनियों से पूरी पर्यावरणीय लागत का खुलासा करने तथा छिपी लागतों को समाप्त करने का आग्रह किया है। पूरी सच्चाई बताने का समय आ गया है और 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा पर स्विच करना होगा, जबकि यूरोप गर्मी की लहरों से जूझ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने AI दिग्गजों से अपने डेटा सेंटरों की वास्तविक जलवायु लागत का खुलासा करने की मांग की है, और जीवाश्म ईंधन को ऊर्जा और जलवायु संकटों के लिए दोषी ठहराया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बोझ अब सबसे कमजोर लोगों पर नहीं डाला जाना चाहिए और छिपी लागतों का समय समाप्त हो गया है, जबकि यूरोप भीषण गर्मी की चपेट में है।
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