
रोबोट सुरक्षा का नया ढांचा और भावनात्मक AI: मशीनों के साथ बदलते मानवीय रिश्ते
एनवीडिया ने मानव सदृश रोबोटों के लिए पहली पूर्ण-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली पेश की, वहीं 4.2 करोड़ उपयोगकर्ता AI चैटबॉट से भावनात्मक जुड़ाव बना रहे हैं।
एनवीडिया ने हाल ही में ‘हेलोस फॉर रोबोटिक्स’ नामक एक व्यापक सुरक्षा प्रणाली जारी की है, जो मानव सदृश रोबोटों को बिना पिंजरे या अनिवार्य रुकावट के लोगों के बीच काम करने की अनुमति देती है। यह पहला पूर्ण-स्टैक सुरक्षा आर्किटेक्चर है, जो स्वायत्त वाहनों के 18,600 इंजीनियरिंग वर्षों के अनुभव पर आधारित है। इसके तहत एआई कंप्यूट, सेंसर डेटा, सुरक्षा सॉफ्टवेयर और बाहरी निरीक्षण को एकीकृत किया गया है, जिससे रोबोट वास्तविक समय में अपने आसपास के वातावरण का विश्लेषण कर निर्णय ले सकते हैं। एजिलिटी रोबोटिक्स पहली कंपनी बनी है जो अपने डिजिट ह्यूमनॉइड में इस प्रणाली का उपयोग कर रही है, और बार्कलेज के अनुमान के अनुसार यह बाजार 2035 तक 200 अरब डॉलर के राजस्व तक पहुंच सकता है।
इस सुरक्षा ढांचे की तकनीकी बुनियाद में एनवीडिया का आईजीएक्स थॉर हार्डवेयर और हेलोस ओएस शामिल है, जो बाहरी कैमरों और एआई एजेंटों के जरिए रोबोट के व्यवहार को नियंत्रित करता है। साथ ही, कंपनी ने दुनिया की पहली एएनएसआई राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड-मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला स्थापित की है, जहां रोबोट निर्माता तीसरे पक्ष के प्रमाणन से पहले सुरक्षा परीक्षण करा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य गोदामों, कारखानों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में रोबोटों की उत्पादकता बढ़ाना है, जहां अभी तक मानव संपर्क की संभावना पर मशीनें रुक जाती थीं या धीमी पड़ जाती थीं।
दूसरी ओर, भावनात्मक स्तर पर मानव-मशीन संबंध तेजी से गहरा रहे हैं। ‘रेप्लिका’ जैसे एआई चैटबॉट एप्लिकेशन के 4.2 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं, और जर्मनी की डुइसबर्ग-एसेन विश्वविद्यालय की शोधकर्ता जेसिका श्टोका के अनुसार, बार-बार उपयोग से लोग इन प्रणालियों के साथ सामाजिक संपर्क स्थापित कर लेते हैं और वास्तविक भावनाएं विकसित कर लेते हैं। बर्लिन की तकनीकी विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में, जिसमें लगभग 30 वयस्क उपयोगकर्ताओं के लिखित साक्षात्कार शामिल थे, लगभग आधे प्रतिभागियों ने इन चैटबॉट पात्रों के साथ गहरा भावनात्मक संबंध विकसित करने की बात स्वीकार की, हालांकि वे जानते थे कि ये वास्तविक मानव नहीं हैं।
ये दोनों प्रवृत्तियां एक साझा चुनौती की ओर इशारा करती हैं: मानव-रोबोट संपर्क के लिए नियामक ढांचे की आवश्यकता। भावनात्मक एआई के मामले में, शोधकर्ता श्टोका ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध की बजाय कड़ी निगरानी और विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशिक्षण जरूरी है, क्योंकि कंपनियों के पास डेटा और एल्गोरिदम पर पूर्ण नियंत्रण होता है और बच्चों व किशोरों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता है। रोबोट सुरक्षा के क्षेत्र में, एनवीडिया की प्रयोगशाला टीयूवी राइनलैंड, यूएल सॉल्यूशंस और एसजीएस जैसी संस्थाओं से प्रमाणन की प्रक्रिया को सुगम बनाएगी, जिससे उद्योग को एक मानकीकृत सुरक्षा ढांचा मिलेगा।
अगला ठोस कदम एनवीडिया की प्रयोगशाला के माध्यम से पहले व्यावसायिक रोबोट एकीकरण का तृतीय-पक्ष प्रमाणन होगा, जबकि भावनात्मक एआई के लिए जर्मनी में एक बहु-विषयक टीम इसे राजनीतिक एजेंडे पर लाने का प्रयास कर रही है। भारत और दक्षिण एशिया जैसे उच्च जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में, जहां श्रम प्रधान उद्योग और एकाकीपन दोनों मौजूद हैं, इन तकनीकी बदलावों का प्रभाव विशेष रूप से गहरा हो सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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बाजार मानवीय रोबोटों को कार्यस्थल में ला रहा है, एक नई सुरक्षा संरचना के साथ जो उन्हें दोहराए जाने वाले कार्यों के लिए व्यावहारिक बनाती है। एक डिलीवरी स्टार्टअप औद्योगिक ह्यूमनॉइड की ओर रुख कर रहा है, बक्से पैक करने और वर्कस्टेशन तैयार करने के लिए कस्टम एआई मॉडल पर दांव लगा रहा है। कहानी व्यावसायिक अवसर और तकनीकी प्रगति की है, जहां सुरक्षा स्वचालन की अगली लहर की कुंजी है।
एआई साथियों के उदय की जांच गहरी व्यक्तिगत कहानियों के माध्यम से की जा रही है, जैसे एक उपयोगकर्ता का कहना है कि चैटबॉट ने उसे महामारी के दौरान फिर से प्यार करना सिखाया। साथ ही, मानवीय रोबोटों को लोगों के साथ शारीरिक रूप से काम करने की अनुमति देने के लिए नई सुरक्षा प्रणालियाँ विकसित की जा रही हैं। कवरेज भावनात्मक जिज्ञासा और व्यावहारिकता को संतुलित करती है, इस बात पर जोर देते हुए कि इन मशीनों को तैनाती से पहले विश्वास अर्जित करना होगा।
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