
ओमान तट पर जहाज पर हमले के बाद IMO ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकासी अभियान स्थगित किया
संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने सुरक्षा गारंटी की पुष्टि के लिए अभियान रोका, जबकि ईरान ने अपने निर्धारित मार्गों के अलावा किसी भी आवाजाही को खतरनाक बताया।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने 25 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य से सैकड़ों फंसे जहाजों और हजारों नाविकों को निकालने के अपने अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया। यह निर्णय ओमान की खाड़ी में सिंगापुर-ध्वज वाले कंटेनर जहाज एवर लवली पर एक प्रक्षेप्य हमले के बाद लिया गया, जिससे पुल को क्षति पहुंची लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज़ ने स्पष्ट किया कि हमला झेलने वाला जहाज एजेंसी के निकासी ढांचे के तहत यात्रा नहीं कर रहा था, फिर भी सूचीबद्ध जहाजों और क्षेत्र के सभी पोतों के लिए आवश्यक सुरक्षा गारंटी की पुनः पुष्टि होने तक अभियान स्थगित रहेगा।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने इसी दिन चेतावनी दी कि जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही केवल ईरान द्वारा निर्धारित मार्गों से ही संभव है, और अनुपालन न करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गार्ड ने IMO द्वारा सुझाए गए मार्ग की निंदा करते हुए उसे बिना पूर्व सूचना या समन्वय के घोषित बताया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खाड़ी देशों की यात्रा के दौरान कहा कि जलडमरूमध्य का जल किसी राष्ट्र राज्य की संपत्ति नहीं है और यदि ईरान जहाजों को धमकाता या रोकता है तो स्थिति गंभीर होगी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर सुरक्षा और प्रशासन शुल्क के रूप में सालाना 40 अरब डॉलर तक की आय की उम्मीद कर रहा है, जो तुर्की के डार्डेनेल्स मॉडल जैसा होगा।
इस घटनाक्रम से वैश्विक तेल बाजार में हलचल हुई और कच्चे तेल की कीमतों में लगभग एक प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार, हमले ने खाड़ी क्षेत्र से तेल प्रवाह के सामान्य होने की समय-सीमा को लेकर आशंकाएं फिर से बढ़ा दी हैं। जहाज मालिक अभी भी सतर्क हैं और आवाजाही धीमी बनी हुई है; अधिकांश जहाज केवल पहले से मौजूद माल ढुलाई कर रहे हैं, नई लोडिंग नहीं हो रही। कई जहाज ओमानी मार्ग से बाहर निकलने के बाद वापस लौट गए, जबकि हापाग लॉयड जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने पुष्टि की कि उनके सभी जहाज सुरक्षित रूप से खाड़ी से बाहर निकल चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अभी भी लगभग 11,000 नाविक जलडमरूमध्य में फंसे हो सकते हैं।
IMO का निकासी अभियान 23 जून को ईरान, ओमान और अमेरिका की निगरानी में दो मार्गों—एक ईरानी जलक्षेत्र से और दूसरा ओमानी तट के पास—के साथ शुरू हुआ था। यह पहल फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान के बाद ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से अवरुद्ध करने और बार-बार शुल्क वसूलने तथा धमकियों के बीच आई थी। हालांकि 18 जून को अमेरिका-ईरान समझौते ने मुक्त नौवहन की बहाली का मार्ग प्रशस्त किया, लेकिन यातायात प्रबंधन और कथित खदानों की सफाई जैसे प्रमुख प्रश्न अनसुलझे हैं। फिलहाल IMO सुरक्षा गारंटी की पुनर्पुष्टि में जुटा है, लेकिन जलडमरूमध्य में स्थायी सुरक्षित आवाजाही की बहाली अनिश्चित बनी हुई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ओमान के पास एक मालवाहक जहाज पर हमला, जिसके लिए अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को जिम्मेदार ठहराया, के कारण संयुक्त राष्ट्र को होर्मुज जलडमरूमध्य से निकासी स्थगित करनी पड़ी। जहाज तट से मात्र 7.5 समुद्री मील दूर स्टारबोर्ड साइड पर प्रक्षेप्य से टकराया। यह घटना ईरान के साथ चल रहे युद्ध का हिस्सा है, जिसने फरवरी से सैकड़ों जहाजों और हजारों नाविकों को फंसा रखा है, और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग एजेंसी ने सुरक्षा चिंताओं के बीच मानवीय गलियारे को रोक दिया।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने ओमान की खाड़ी में एक जहाज पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से निकासी स्थगित कर दी। ईरान, ओमान, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों के सहयोग से 23 जून को शुरू किए गए इस अभियान के तहत पहले ही कई जहाजों को निकाला जा चुका था। हमला किया गया जहाज निकासी मार्ग का अनुसरण कर रहा था; संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगभग 11,000 नाविक अभी भी क्षेत्र में जहाजों पर सवार हैं।
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