
G7 ने लेबनान में तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया, अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत
एवियन-ले-बैंस शिखर सम्मेलन में G7 नेताओं ने हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण और लेबनान की संप्रभुता की रक्षा पर जोर देते हुए अमेरिका-ईरान युद्धविराम का समर्थन किया।
फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में संपन्न जी7 शिखर सम्मेलन ने पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए लेबनान में तत्काल और मजबूत युद्धविराम की मांग की। बुधवार को जारी संयुक्त वक्तव्य में नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम समझौते का स्वागत किया, जिसके तहत हिजबुल्लाह और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष को भी रोकने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और युद्धविराम को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके औपचारिक विवरण शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में सार्वजनिक होने की उम्मीद है।
जी7 के नेताओं ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि लेबनान में तत्काल और प्रभावी संघर्ष विराम के जरिए हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण और हथियारों पर राज्य के एकाधिकार को सुनिश्चित करने के प्रयासों का समर्थन किया जाएगा। उन्होंने लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए उचित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटियों की आवश्यकता पर भी बल दिया। यह रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पहल के अनुरूप है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और क्षेत्रीय खतरों से निपटने के लिए एक व्यापक समाधान की नींव रखती है। जी7 ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक अवसर बताया, जो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक सकता है।
यह कूटनीतिक सफलता ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी हिंसा ने सात हजार से अधिक लोगों की जान ले ली है, जिनमें अधिकांश ईरान और लेबनान में मारे गए। जी7 नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में विविधता लाने की भी घोषणा की, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है और संघर्ष के दौरान बाधित हुआ था। यह कदम भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए विशेष रूप से राहत की खबर है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता सीधे कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करती है।
हालांकि अमेरिका में इस समझौते को लेकर संदेह बना हुआ है, जी7 का सामूहिक समर्थन ट्रंप प्रशासन को एक मजबूत कूटनीतिक जनादेश प्रदान करता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि शुक्रवार को अपेक्षित औपचारिक घोषणा के बाद सभी पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं पर कायम रहते हैं, तो यह न केवल लेबनान और इज़राइल के बीच स्थायी शांति का मार्ग खोल सकता है, बल्कि ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को नियंत्रित करने में भी सहायक होगा। आने वाले सप्ताह इस बात की परीक्षा लेंगे कि क्या हिजबुल्लाह वास्तव में निरस्त्रीकरण की राह पर चलेगा और क्या अंतरराष्ट्रीय गारंटियां लेबनान की संप्रभुता को बहाल कर पाएंगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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G7 इजराइल पर लेबनान में तत्काल युद्धविराम स्वीकार करने का दबाव डाल रहा है, जबकि अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत कर रहा है। हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण और लेबनानी संप्रभुता की रक्षा पर जोर दिया गया है, लेकिन यह भी कहा गया कि अधिकांश नेताओं ने कभी युद्ध का समर्थन नहीं किया।
G7 नेताओं ने लेबनान में तत्काल युद्धविराम की मांग की और अमेरिका-ईरान के अंतरिम समझौते का स्वागत किया। संयुक्त वक्तव्य में होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में विविधता लाने की आवश्यकता पर बल दिया गया, जबकि नए सिरे से लड़ाई समझौते को खतरे में डाल रही है।
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