
G7 शिखर सम्मेलन: ब्रिटेन ने रूसी एलएनजी टैंकरों पर पहला प्रतिबंध लगाया, कनाडा ने भी कसे शिकंजे
एवियां-ले-बैं में जुटे सात प्रमुख लोकतंत्रों ने यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए रूस की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला और छाया बेड़े पर एक साथ प्रहार किया।
फ्रांस के एवियां-ले-बैं में मंगलवार को शुरू हुए जी7 शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन ब्रिटेन और कनाडा ने रूस पर नए कड़े प्रतिबंधों की घोषणा कर यह स्पष्ट कर दिया कि मॉस्को पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ाया जाएगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने विशेष सत्र में कहा कि उनका देश रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ले जाने वाले टैंकरों पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला पश्चिमी देश बन गया है, ताकि ‘पुतिन की युद्ध मशीन’ को राजस्व से वंचित किया जा सके। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की भी इस शिखर बैठक में मौजूद रहे और उन्होंने सहयोगियों से ऊर्जा प्रणाली की रक्षा के लिए और अधिक पैट्रियट मिसाइलों की आवश्यकता पर बल दिया।
ब्रिटेन के नए पैकेज में 27 टैंकरों को सीधे निशाना बनाया गया है, जिनमें रूसी एलएनजी गैसवाहक ‘लूच’ और ‘कॉसमॉस’ के साथ-साथ तेल टैंकर ‘मर्कुरी’ भी शामिल हैं। इन जहाजों पर ब्रिटिश बंदरगाहों में प्रवेश, बीमा, तकनीकी सहायता और चालक दल सेवाओं पर रोक लगा दी गई है, और दो गैसवाहकों का ब्रिटिश शिप रजिस्टर में पंजीकरण भी रद्द किया जा सकता है। साथ ही, लंदन ने उस वित्तीय नेटवर्क पर भी प्रतिबंध लगाए हैं जो क्रेमलिन के लिए पश्चिमी सैन्य प्रौद्योगिकी की ख़रीदारी करता था। इस कार्रवाई के बाद ब्रिटेन द्वारा प्रतिबंधित रूस से जुड़े जहाजों की कुल संख्या 600 के पार पहुंच गई है। दूसरी ओर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी 162 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया, जिन्हें ‘रूसी युद्ध मशीन की सभी संपत्तियां’ बताया गया।
ज़ेलेंस्की ने कनाडा के साथ बैठक के बाद कहा कि साझेदारों ने यूक्रेन के संदेशों का समर्थन किया—विशेष रूप से ऊर्जा पैकेज, वायु रक्षा और अधिक पैट्रियट मिसाइलों की ज़रूरत। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “रूस जीत नहीं रहा है, और हमें पुतिन को यह युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर करना होगा।” यह बयान चार वर्षों से अधिक लंबे संघर्ष के बाद आया है, जब पश्चिमी गठबंधन यूक्रेन के पक्ष में संतुलन झुकाने की कोशिश कर रहा है। क्रेमलिन की ओर से प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इन प्रतिबंधों को अप्रभावी बताते हुए ख़ारिज कर दिया, हालांकि रूसी मीडिया में इस बात की पुष्टि हुई कि ब्रिटेन पहला देश है जिसने एलएनजी गैसवाहकों पर सीधा प्रतिबंध लगाया है।
विश्लेषकों का मानना है कि एलएनजी टैंकरों और छाया बेड़े पर प्रतिबंध रूस की ऊर्जा निर्यात रणनीति के लिए एक नया झटका है, क्योंकि अब तक पश्चिमी प्रतिबंध मुख्यतः तेल व्यापार पर केंद्रित थे। इस कदम से वैश्विक एलएनजी बाज़ार में आपूर्ति की चिंताएँ बढ़ सकती हैं, जिसका असर दक्षिण एशिया के ऊर्जा आयातक देशों—विशेषकर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश—पर भी पड़ सकता है, जो सस्ती रूसी गैस पर निर्भरता बढ़ा रहे थे। हालांकि, जी7 देशों का स्पष्ट संकेत है कि जब तक मॉस्को युद्ध नहीं रोकता, आर्थिक शिकंजा कसता रहेगा। आने वाले दिनों में अन्य सहयोगी देशों के भी इसी तरह के कदम उठाने की संभावना है, जिससे रूस की वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाएँ और अधिक संकट में पड़ सकती हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन ने रूस पर 70 नए प्रतिबंधों की घोषणा की, जिनमें एलएनजी टैंकर भी शामिल हैं। इन कदमों का उद्देश्य यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए मास्को पर दबाव बनाना है।
जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री स्टारमर ने घोषणा की कि ब्रिटेन रूस की युद्ध मशीनरी को रोकने के लिए एलएनजी टैंकरों को निशाना बनाकर प्रतिबंध बढ़ा रहा है। चार साल से अधिक के संघर्ष के बाद सहयोगी मास्को पर दबाव तेज कर रहे हैं।
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