
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए फ्रांस-ब्रिटेन की अगुवाई में यूरोपीय मिशन तैयार, G7 में ऊर्जा के वैकल्पिक मार्गों पर जोर
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने दो से तीन दिनों के भीतर होर्मुज में नौसैनिक तैनाती का संकेत देते हुए कहा कि बिना शुल्क के पुनः खोलना क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य शर्त है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक मिशन होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार हो जाएगा। उन्होंने TF1 चैनल पर स्पष्ट किया कि यह मिशन केवल दो से तीन दिनों के भीतर तैनात किया जा सकता है, जिसमें इटली और नीदरलैंड जैसे अन्य यूरोपीय देश भी भागीदारी के लिए तैयार हैं। मैक्रों ने यह भी बताया कि ओमान की सल्तनत ने इस रणनीतिक जलमार्ग में अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति पर कोई आपत्ति नहीं जताई है, जिससे इसकी भौगोलिक स्वीकार्यता को बल मिला है।
यह घोषणा 15 जून की रात अमेरिका और ईरान द्वारा युद्धविराम और शांति की रूपरेखा पर सहमति के बाद आई, जिसका औपचारिक ज्ञापन 19 जून को जिनेवा में हस्ताक्षरित होना है। मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान में समझौते के “तेज और पूर्ण क्रियान्वयन” का आह्वान करते हुए कहा कि होर्मुज को बिना किसी प्रतिबंध या पारगमन शुल्क के तत्काल और बिना शर्त खोलना अनिवार्य है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इसे व्यापक वार्ता का प्रस्थान बिंदु भी बताया, जिसमें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने की उसकी नीति को संबोधित किया जाना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के कच्चे तेल के एक बड़े हिस्से का पारगमन मार्ग है, भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैक्रों ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ किसी भी समझौते का वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर वास्तविक प्रभाव दिखने में कई सप्ताह लगेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि फ्रांस जी-7 शिखर सम्मेलन के ढांचे में खाड़ी देशों के साथ मिलकर होर्मुज से हटकर वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति मार्ग विकसित करने पर काम करेगा, जो ऊर्जा आयातक राष्ट्रों के लिए विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल है।
विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो यह मिशन केवल नौसैनिक सुरक्षा से आगे बढ़कर यूरोप की रणनीतिक स्वायत्तता को रेखांकित करता है। फ्रांसीसी विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल और उसके सहयोगी बेड़े की संभावित तैनाती इस बात का संकेत है कि यूरोप इस बार कूटनीतिक पटल पर केवल अमेरिकी कंधे पर बंदूक रखकर नहीं, बल्कि अपनी क्षमता से उपस्थिति दर्ज करा रहा है। जी-7 शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे पर मिलने वाला समर्थन तय करेगा कि क्या यह प्रयास एक स्थायी बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचे में बदलेगा, जो हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया के ऊर्जा परिदृश्य के लिए नई रूपरेखा गढ़ सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त नौवहन सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय नौसैनिक मिशन अमेरिका-ईरान शांति समझौते के कुछ दिनों के भीतर तैनात होने को तैयार है, जिसका नेतृत्व फ्रांस और ब्रिटेन कर रहे हैं। ओमान ने अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति का विरोध न करने का संकेत दिया है, जबकि पेरिस इस बात पर जोर दे रहा है कि रास्ता किसी भी शुल्क से मुक्त होना चाहिए। इस पुनः उद्घाटन को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है।
यूरोपीय संघ हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक नौसैनिक अभियान अमेरिका-ईरान शांति समझौते के दो से तीन दिनों के भीतर बहुत तेज़ी से शुरू करने के लिए तैयार है, जिसका नेतृत्व फ्रांस और ब्रिटेन करेंगे और इटली व नीदरलैंड का समर्थन होगा। राष्ट्रपति मैक्रों के अनुसार एक प्रमुख लक्ष्य व्यापारिक जहाज़ों से किसी भी प्रकार के पारगमन शुल्क को रोकना है। यह घोषणा टेलीविजन साक्षात्कार में की गई, जो यूरोपीय पहल की तत्परता को रेखांकित करती है।
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