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राजनीतिबुधवार, 17 जून 2026

G7 में ट्रंप ने रूस और चीन की तटस्थता की सराहना की

G7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने रूस और चीन की तटस्थता की सराहना की, जबकि यूरोपीय सहयोगियों पर सहायता न देने का आरोप लगाया।

फ्रांस के एवियां-ले-बैं में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के समापन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अप्रत्याशित बयान में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ईरान युद्ध में “पूरी तरह तटस्थ” रहने के लिए धन्यवाद दिया। ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं ने संघर्ष को “बहुत बेहतर” बना दिया और अमेरिकी प्रयासों को कठिन नहीं होने दिया। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने बीजिंग और मॉस्को से अनुरोध किया था कि वे ईरान को हथियार न बेचें, और दोनों देशों ने इसका पालन किया। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और ईरान के बीच एक युद्धविराम ज्ञापन पर सहमति बनी थी, जिसके तहत 60 दिनों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग शुल्क मुक्त कर दिया गया।

रूसी और चीनी पक्षों ने इस तटस्थता को पहले ही स्पष्ट कर दिया था। रूसी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच पर कहा था कि मॉस्को ने संघर्ष के दौरान तेहरान को कोई हथियार नहीं भेजा। चीन ने भी पूरी अवधि में संतुलित रुख बनाए रखा और किसी पक्ष को सैन्य सहायता नहीं दी। ट्रंप की टिप्पणी ने इस वास्तविकता को स्वीकार किया कि यदि ये दोनों शक्तियां ईरान का समर्थन करतीं तो अमेरिकी सैन्य अभियान कहीं अधिक जटिल हो सकता था।

इसके विपरीत, ट्रंप ने जापान और यूरोपीय सहयोगियों की तीखी आलोचना की, जिन पर उन्होंने संघर्ष में पर्याप्त सहायता नहीं देने का आरोप लगाया। यह रुख पारंपरिक पश्चिमी गठबंधनों में बढ़ती दरार को दर्शाता है, जहां अमेरिका अब रूस और चीन को अपेक्षाकृत अधिक भरोसेमंद भागीदार के रूप में देख रहा है। जी7 मंच पर ही यह विरोधाभास उभरा कि जिन देशों को अक्सर प्रतिद्वंद्वी माना जाता है, उन्होंने संयम दिखाया, जबकि पारंपरिक मित्र पीछे रहे।

दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए यह घटनाक्रम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। भारत की ईरान के साथ गहरी ऊर्जा निर्भरता है और चाबहार बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान व मध्य एशिया तक कनेक्टिविटी की रणनीतिक परियोजनाएं जुड़ी हैं। रूस और चीन की तटस्थता ने युद्ध को सीमित रखा, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा कम हुआ और भारत के ऊर्जा आयात व व्यापार मार्ग सुरक्षित रहे। साथ ही, अमेरिका द्वारा इन दोनों शक्तियों की सराहना यह संकेत देती है कि बहुध्रुवीय दुनिया में भारत जैसे देशों के लिए कूटनीतिक संतुलन के अवसर बढ़ सकते हैं।

आगे की राह में यह युद्धविराम और महाशक्तियों का रुख ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भविष्य की वार्ताओं की नींव रख सकता है। हालांकि, ट्रंप का यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में आ रहे बदलाव का प्रतीक है। यदि रूस और चीन आगे भी इसी तरह संयम बरतते हैं, तो पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक स्थिरता की संभावना बन सकती है, लेकिन इसके लिए यूरोपीय सहयोगियों के साथ अमेरिकी संबंधों की मरम्मत भी जरूरी होगी।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

44%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa russa e CSIStampa atlantica / anglosfera
Stampa russa e CSI/ stato
trionfopragmatismo

रूसी मीडिया रिपोर्ट करता है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान युद्ध पर तटस्थ रुख के लिए पुतिन और शी जिनपिंग को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया, यह कहते हुए कि अन्यथा वे अमेरिका के कार्य को काफी जटिल बना सकते थे। कवरेज रूस की रचनात्मक भूमिका की मान्यता और उसकी संतुलित स्थिति के महत्व पर जोर देती है।

Stampa atlantica / anglosfera/ sicurezza
scetticismoironia

एंग्लोफोन प्रेस रिपोर्ट करती है कि ट्रम्प ने शी और पुतिन को उनकी तटस्थता के लिए धन्यवाद दिया, इसे पश्चिमी सहयोगियों के प्रति उपेक्षा के रूप में पेश किया जिनका उल्लेख नहीं किया गया। कवरेज सुझाव देती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति पारंपरिक भागीदारों पर विरोधियों के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

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बुधवार, 17 जून 2026

G7 में ट्रंप ने रूस और चीन की तटस्थता की सराहना की

G7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने रूस और चीन की तटस्थता की सराहना की, जबकि यूरोपीय सहयोगियों पर सहायता न देने का आरोप लगाया।

फ्रांस के एवियां-ले-बैं में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के समापन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अप्रत्याशित बयान में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ईरान युद्ध में “पूरी तरह तटस्थ” रहने के लिए धन्यवाद दिया। ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं ने संघर्ष को “बहुत बेहतर” बना दिया और अमेरिकी प्रयासों को कठिन नहीं होने दिया। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने बीजिंग और मॉस्को से अनुरोध किया था कि वे ईरान को हथियार न बेचें, और दोनों देशों ने इसका पालन किया। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और ईरान के बीच एक युद्धविराम ज्ञापन पर सहमति बनी थी, जिसके तहत 60 दिनों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग शुल्क मुक्त कर दिया गया।

रूसी और चीनी पक्षों ने इस तटस्थता को पहले ही स्पष्ट कर दिया था। रूसी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच पर कहा था कि मॉस्को ने संघर्ष के दौरान तेहरान को कोई हथियार नहीं भेजा। चीन ने भी पूरी अवधि में संतुलित रुख बनाए रखा और किसी पक्ष को सैन्य सहायता नहीं दी। ट्रंप की टिप्पणी ने इस वास्तविकता को स्वीकार किया कि यदि ये दोनों शक्तियां ईरान का समर्थन करतीं तो अमेरिकी सैन्य अभियान कहीं अधिक जटिल हो सकता था।

इसके विपरीत, ट्रंप ने जापान और यूरोपीय सहयोगियों की तीखी आलोचना की, जिन पर उन्होंने संघर्ष में पर्याप्त सहायता नहीं देने का आरोप लगाया। यह रुख पारंपरिक पश्चिमी गठबंधनों में बढ़ती दरार को दर्शाता है, जहां अमेरिका अब रूस और चीन को अपेक्षाकृत अधिक भरोसेमंद भागीदार के रूप में देख रहा है। जी7 मंच पर ही यह विरोधाभास उभरा कि जिन देशों को अक्सर प्रतिद्वंद्वी माना जाता है, उन्होंने संयम दिखाया, जबकि पारंपरिक मित्र पीछे रहे।

दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए यह घटनाक्रम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। भारत की ईरान के साथ गहरी ऊर्जा निर्भरता है और चाबहार बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान व मध्य एशिया तक कनेक्टिविटी की रणनीतिक परियोजनाएं जुड़ी हैं। रूस और चीन की तटस्थता ने युद्ध को सीमित रखा, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा कम हुआ और भारत के ऊर्जा आयात व व्यापार मार्ग सुरक्षित रहे। साथ ही, अमेरिका द्वारा इन दोनों शक्तियों की सराहना यह संकेत देती है कि बहुध्रुवीय दुनिया में भारत जैसे देशों के लिए कूटनीतिक संतुलन के अवसर बढ़ सकते हैं।

आगे की राह में यह युद्धविराम और महाशक्तियों का रुख ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भविष्य की वार्ताओं की नींव रख सकता है। हालांकि, ट्रंप का यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में आ रहे बदलाव का प्रतीक है। यदि रूस और चीन आगे भी इसी तरह संयम बरतते हैं, तो पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक स्थिरता की संभावना बन सकती है, लेकिन इसके लिए यूरोपीय सहयोगियों के साथ अमेरिकी संबंधों की मरम्मत भी जरूरी होगी।

स्रोतों में मतभेद

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44%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक67%
निंदक33%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa russa e CSIStampa atlantica / anglosfera
Stampa russa e CSI/ stato
trionfopragmatismo

रूसी मीडिया रिपोर्ट करता है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान युद्ध पर तटस्थ रुख के लिए पुतिन और शी जिनपिंग को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया, यह कहते हुए कि अन्यथा वे अमेरिका के कार्य को काफी जटिल बना सकते थे। कवरेज रूस की रचनात्मक भूमिका की मान्यता और उसकी संतुलित स्थिति के महत्व पर जोर देती है।

Stampa atlantica / anglosfera/ sicurezza
scetticismoironia

एंग्लोफोन प्रेस रिपोर्ट करती है कि ट्रम्प ने शी और पुतिन को उनकी तटस्थता के लिए धन्यवाद दिया, इसे पश्चिमी सहयोगियों के प्रति उपेक्षा के रूप में पेश किया जिनका उल्लेख नहीं किया गया। कवरेज सुझाव देती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति पारंपरिक भागीदारों पर विरोधियों के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

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