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Defense & Securityगुरुवार, 18 जून 2026

मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला: तेल रिफाइनरी धधकी, ज़ेलेंस्की की चेतावनी

यूक्रेन ने एक सप्ताह में दूसरी बार मॉस्को की प्रमुख तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया, जिससे राजधानी में भीषण आग और उड़ानें बाधित हुईं; ज़ेलेंस्की ने कहा, 'अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा'।

रूस की राजधानी मॉस्को पर बृहस्पतिवार तड़के यूक्रेन ने अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमले से सीधे हमला किया, जिसमें शहर के दक्षिण-पूर्वी कपोतन्या ज़िले में स्थित गज़प्रोम नेफ़्त की विशाल तेल रिफाइनरी कई विस्फोटों से धधक उठी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ईंधन टैंक का ढक्कन आसमान में उड़ता और काला धुआँ राजधानी के क्षितिज पर छाता दिखा। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रात भर में 555 ड्रोन मार गिराए गए, जबकि मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि लगभग 180 ड्रोन राजधानी की ओर आते हुए नष्ट किए गए, फिर भी कई रिफाइनरी तक पहुँचने में सफल रहे। यह एक सप्ताह के भीतर उसी संयंत्र पर दूसरा हमला था, जिसके चलते शेरेमेत्येवो, वनुकोवो, दोमोदेदोवो और ज़ुकोवस्की सहित चारों प्रमुख हवाई अड्डों से उड़ानें अस्थायी रूप से रोकनी पड़ीं और कम से कम 17 लोग घायल हुए। आवासीय इमारतों और एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लगने की ख़बरें आईं, जिससे आम मस्कोवाइट्स पहली बार युद्ध की गर्मी को इतने नज़दीक से महसूस कर रहे थे।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इस हमले को सोमवार को कीव के ऐतिहासिक पेचेर्स्क लावरा मठ पर हुए रूसी हमले का 'पूरी तरह न्यायोचित जवाब' बताया, जिसमें कम से कम दस लोग मारे गए थे और अंतरराष्ट्रीय निंदा हुई थी। उन्होंने पत्रकारों को भेजे एक वॉइस संदेश में चेतावनी दी, 'हम यह युद्ध नहीं चाहते, कभी नहीं चाहा था, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो आपका मॉस्को भी जलेगा।' ज़ेलेंस्की ने इसे 'दूरगामी प्रतिबंधों' की रणनीति का हिस्सा बताया, जिसका लक्ष्य रूस की युद्ध मशीन को ईंधन देने वाली ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाना है। यह हमला ऐसे समय हुआ जब ज़ेलेंस्की ने जी7 शिखर सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ 'महत्वपूर्ण समन्वय कॉल' की थी, और नाटो रक्षा संपर्क समूह की बैठक में हवाई सुरक्षा प्रणालियों की आपूर्ति पर ज़ोर दिया जा रहा था।

रूसी पक्ष ने इसे उकसाने वाला क़दम बताते हुए जवाबी कार्रवाई की कसम खाई। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूक्रेन पर 'बड़े पैमाने पर' पलटवार करने की बात कही। दिलचस्प बात यह रही कि यह हमला ठीक उस वक़्त हुआ जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से 700 किलोमीटर दूर कज़ान में दक्षिण-पूर्व एशियाई नेताओं के साथ आसियान-रूस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहे थे। पुतिन ने दिन भर में कई प्रेस वक्तव्य दिए, लेकिन हमले पर सीधे टिप्पणी नहीं की। स्थानीय मीडिया ने बताया कि कुछ इलाकों में 'तेल की बारिश' हुई और ज़ुकोवस्की में एक 20 मंज़िला आवासीय इमारत ख़ाली करानी पड़ी। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने इसे 'पिछले दो सालों में मॉस्को पर सबसे बड़ा हमला' क़रार दिया, जो यूक्रेन की लंबी दूरी तक मार करने की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करता है।

वैश्विक स्तर पर इस हमले ने ऊर्जा बाज़ारों में हलचल पैदा कर दी। रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, और मॉस्को रिफाइनरी राजधानी क्षेत्र की तीन-चौथाई ईंधन ज़रूरत पूरी करती है। दक्षिण एशिया, ख़ासकर भारत, जो रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, के लिए ऐसे हमले आपूर्ति शृंखला में बाधा और मूल्य अस्थिरता का संकेत हैं। भारत ने लगातार बातचीत से समाधान की वकालत की है, लेकिन यह बढ़ता टकराव कूटनीतिक संतुलन को और कठिन बना देता है। साथ ही, यूक्रेन का यह कदम पश्चिमी सहयोगियों को यह संदेश देता है कि कीव केवल बचाव नहीं कर रहा, बल्कि रूसी क्षेत्र में गहराई तक प्रहार करने में सक्षम है, जिससे आगामी शांति वार्ताओं में उसकी सौदेबाज़ी की स्थिति मज़बूत हो सकती है।

आगे का रास्ता अनिश्चित है। एक ओर ज़ेलेंस्की ने कहा कि 'युद्ध ख़त्म करने का समय आ गया है और रूस को कूटनीति के ज़रूरी क़दम उठाने चाहिए', वहीं दूसरी ओर मॉस्को पर सीधा प्रहार रूसी जनता के बीच युद्ध की वास्तविकता को घर तक ले आया है, जिससे पुतिन पर घरेलू दबाव बढ़ सकता है। हालाँकि, रूस की ओर से जवाबी हमले लगभग तय हैं, जिससे संघर्ष के और भड़कने का ख़तरा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें भारत जैसे उभरते मध्यस्थ शामिल हैं, को ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इस उभरते हवाई युद्ध के आयामों पर गहरी नज़र रखनी होगी।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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यूक्रेनी ड्रोनों ने मॉस्को पर बड़े पैमाने पर हमला किया, जिससे एक तेल रिफाइनरी में आग लग गई, यह कुछ ही दिनों में दूसरी बार हुआ। रूसी वायु रक्षा ने दर्जनों ड्रोन मार गिराए, लेकिन कुछ लक्ष्य तक पहुँच गए, जिससे शहर में विस्फोट और आग की लपटें दिखाई दीं। यह घटना संघर्ष में चिंताजनक वृद्धि को दर्शाती है।

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यूक्रेनी ड्रोनों ने मॉस्को की एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया, जबकि रूस ने कीव पर मिसाइलें दागीं, यह जवाबी हमलों का सिलसिला था। ये हमले ऐसे समय हुए जब राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की शांति समझौते के लिए अमेरिका और यूरोप से समर्थन मांग रहे थे। मॉस्को ने पाँच दर्जन से अधिक ड्रोन मार गिराने का दावा किया, फिर भी रिफाइनरी क्षतिग्रस्त हुई, जो लगातार हमलों और कूटनीतिक प्रयासों के चक्र को दर्शाता है।

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मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला: तेल रिफाइनरी धधकी, ज़ेलेंस्की की चेतावनी

यूक्रेन ने एक सप्ताह में दूसरी बार मॉस्को की प्रमुख तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया, जिससे राजधानी में भीषण आग और उड़ानें बाधित हुईं; ज़ेलेंस्की ने कहा, 'अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा'।

रूस की राजधानी मॉस्को पर बृहस्पतिवार तड़के यूक्रेन ने अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमले से सीधे हमला किया, जिसमें शहर के दक्षिण-पूर्वी कपोतन्या ज़िले में स्थित गज़प्रोम नेफ़्त की विशाल तेल रिफाइनरी कई विस्फोटों से धधक उठी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ईंधन टैंक का ढक्कन आसमान में उड़ता और काला धुआँ राजधानी के क्षितिज पर छाता दिखा। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रात भर में 555 ड्रोन मार गिराए गए, जबकि मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि लगभग 180 ड्रोन राजधानी की ओर आते हुए नष्ट किए गए, फिर भी कई रिफाइनरी तक पहुँचने में सफल रहे। यह एक सप्ताह के भीतर उसी संयंत्र पर दूसरा हमला था, जिसके चलते शेरेमेत्येवो, वनुकोवो, दोमोदेदोवो और ज़ुकोवस्की सहित चारों प्रमुख हवाई अड्डों से उड़ानें अस्थायी रूप से रोकनी पड़ीं और कम से कम 17 लोग घायल हुए। आवासीय इमारतों और एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लगने की ख़बरें आईं, जिससे आम मस्कोवाइट्स पहली बार युद्ध की गर्मी को इतने नज़दीक से महसूस कर रहे थे।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इस हमले को सोमवार को कीव के ऐतिहासिक पेचेर्स्क लावरा मठ पर हुए रूसी हमले का 'पूरी तरह न्यायोचित जवाब' बताया, जिसमें कम से कम दस लोग मारे गए थे और अंतरराष्ट्रीय निंदा हुई थी। उन्होंने पत्रकारों को भेजे एक वॉइस संदेश में चेतावनी दी, 'हम यह युद्ध नहीं चाहते, कभी नहीं चाहा था, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो आपका मॉस्को भी जलेगा।' ज़ेलेंस्की ने इसे 'दूरगामी प्रतिबंधों' की रणनीति का हिस्सा बताया, जिसका लक्ष्य रूस की युद्ध मशीन को ईंधन देने वाली ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाना है। यह हमला ऐसे समय हुआ जब ज़ेलेंस्की ने जी7 शिखर सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ 'महत्वपूर्ण समन्वय कॉल' की थी, और नाटो रक्षा संपर्क समूह की बैठक में हवाई सुरक्षा प्रणालियों की आपूर्ति पर ज़ोर दिया जा रहा था।

रूसी पक्ष ने इसे उकसाने वाला क़दम बताते हुए जवाबी कार्रवाई की कसम खाई। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूक्रेन पर 'बड़े पैमाने पर' पलटवार करने की बात कही। दिलचस्प बात यह रही कि यह हमला ठीक उस वक़्त हुआ जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से 700 किलोमीटर दूर कज़ान में दक्षिण-पूर्व एशियाई नेताओं के साथ आसियान-रूस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहे थे। पुतिन ने दिन भर में कई प्रेस वक्तव्य दिए, लेकिन हमले पर सीधे टिप्पणी नहीं की। स्थानीय मीडिया ने बताया कि कुछ इलाकों में 'तेल की बारिश' हुई और ज़ुकोवस्की में एक 20 मंज़िला आवासीय इमारत ख़ाली करानी पड़ी। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने इसे 'पिछले दो सालों में मॉस्को पर सबसे बड़ा हमला' क़रार दिया, जो यूक्रेन की लंबी दूरी तक मार करने की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करता है।

वैश्विक स्तर पर इस हमले ने ऊर्जा बाज़ारों में हलचल पैदा कर दी। रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, और मॉस्को रिफाइनरी राजधानी क्षेत्र की तीन-चौथाई ईंधन ज़रूरत पूरी करती है। दक्षिण एशिया, ख़ासकर भारत, जो रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, के लिए ऐसे हमले आपूर्ति शृंखला में बाधा और मूल्य अस्थिरता का संकेत हैं। भारत ने लगातार बातचीत से समाधान की वकालत की है, लेकिन यह बढ़ता टकराव कूटनीतिक संतुलन को और कठिन बना देता है। साथ ही, यूक्रेन का यह कदम पश्चिमी सहयोगियों को यह संदेश देता है कि कीव केवल बचाव नहीं कर रहा, बल्कि रूसी क्षेत्र में गहराई तक प्रहार करने में सक्षम है, जिससे आगामी शांति वार्ताओं में उसकी सौदेबाज़ी की स्थिति मज़बूत हो सकती है।

आगे का रास्ता अनिश्चित है। एक ओर ज़ेलेंस्की ने कहा कि 'युद्ध ख़त्म करने का समय आ गया है और रूस को कूटनीति के ज़रूरी क़दम उठाने चाहिए', वहीं दूसरी ओर मॉस्को पर सीधा प्रहार रूसी जनता के बीच युद्ध की वास्तविकता को घर तक ले आया है, जिससे पुतिन पर घरेलू दबाव बढ़ सकता है। हालाँकि, रूस की ओर से जवाबी हमले लगभग तय हैं, जिससे संघर्ष के और भड़कने का ख़तरा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें भारत जैसे उभरते मध्यस्थ शामिल हैं, को ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इस उभरते हवाई युद्ध के आयामों पर गहरी नज़र रखनी होगी।

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