
दक्षिणी लेबनान में नेतन्याहू की मौजूदगी और हिज़्बुल्लाह निरस्त्रीकरण की शर्त पर अड़ा इज़राइल
एक ढाँचागत समझौते के बावजूद, इज़राइली प्रधानमंत्री ने सैनिकों से कहा कि जब तक हिज़्बुल्लाह ख़तरा बना रहेगा, वे दक्षिणी लेबनान में बने रहेंगे।
इज़राइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री यिसराइल काट्ज़ ने मंगलवार को दक्षिणी लेबनान का दौरा किया, जबकि दोनों पक्षों के बीच एक ढाँचागत समझौता हुआ है जो आपसी संप्रभुता को मान्यता देता है। इस दौरे के दौरान नेतन्याहू ने सैनिकों को निर्देश दिया कि यदि कोई ख़तरा दिखे तो तुरंत कार्रवाई करें, और कहा, "जब तक हिज़्बुल्लाह यहाँ है और हमें धमकाता है, हम यहीं रहेंगे।" यह बयान पाँच दौर की सीधी वार्ता के बाद बने समझौते की पृष्ठभूमि में आया है, जिसके तहत एक परीक्षण प्रयास के रूप में लेबनानी सैनिक दो कब्ज़े वाले इलाकों का नियंत्रण लेंगे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करता कि इज़राइल व्यापक क्षेत्रों से कब और किन शर्तों पर हटेगा।
इज़राइली सरकार के अनुसार, सैन्य अभियान ने हिज़्बुल्लाह की क्षमताओं को भारी नुकसान पहुँचाया है और उसके लगभग 150,000 रॉकेटों के भंडार का मात्र 8 प्रतिशत ही बचा है। नेतन्याहू ने हिज़्बुल्लाह को ईरान की धुरी की "सबसे अहम कड़ी" बताते हुए कहा कि सेना तब तक सीमा क्षेत्र से नहीं हटेगी जब तक हिज़्बुल्लाह पूरी तरह निरस्त्र न हो जाए और वह दोबारा ख़तरा न बन सके। इज़राइली पक्ष इसे उत्तरी इज़राइल को हिज़्बुल्लाह से अलग करने वाला एक सुरक्षा क्षेत्र स्थापित करने की उपलब्धि मानता है, और उसका कहना है कि यह क्षेत्र भविष्य के हमलों को रोकने के लिए आवश्यक है।
लेबनानी सरकार और हिज़्बुल्लाह इस एकतरफ़ा घोषित सुरक्षा क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करने वाला कब्ज़ा बताते हैं। लेबनानी मीडिया के भौगोलिक आकलन के अनुसार, इज़राइल के नियंत्रण वाला दक्षिणी लेबनान का इलाका लगभग 620 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 6 प्रतिशत है। ढाँचागत समझौते की सीमित प्रकृति—जिसमें केवल दो स्थानों पर लेबनानी सैनिकों की तैनाती शामिल है—को लेकर लेबनानी संसद अध्यक्ष ने कहा है कि वे और कई प्रतिनिधि इस समझौते को मंज़ूरी नहीं देंगे, जो घरेलू राजनीतिक अड़चनों को दर्शाता है।
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ ने मंगलवार को लेबनान में युद्ध समाप्त करने की निगरानी के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की, हालाँकि उन्होंने इसकी कार्यप्रणाली का विवरण नहीं दिया। ईरानी पक्ष लेबनान को अमेरिका के साथ अपने समझौते में शामिल करने का प्रयास कर रहा है। इस बीच, ढाँचागत समझौता इस बात की कोई समय-सीमा या शर्तें तय नहीं करता कि इज़राइल व्यापक कब्ज़े वाले इलाकों से कब पीछे हटेगा, जिससे स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। अगले कूटनीतिक क़दमों की रूपरेखा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन विभिन्न पक्षों के बयान संकेत देते हैं कि फ़िलहाल तनाव में कमी की संभावना सीमित है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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दक्षिणी लेबनान में नेतन्याहू की यात्रा को उस ढांचागत समझौते का खुला उल्लंघन बताया गया है जिसमें आपसी संप्रभुता को मान्यता दी गई थी। कब्जा करने वाले शासन के प्रधानमंत्री ने युद्ध मंत्री के साथ घोषणा की कि जब तक हिजबुल्लाह मौजूद है, वे रहेंगे और सैनिकों को किसी भी खतरे पर हमला करने का आदेश दिया। यह घटना लेबनानी संप्रभुता के प्रति अवमानना और सुरक्षा के बहाने कब्जे को लम्बा खींचने के इरादे को रेखांकित करती है।
नेतन्याहू ने सुरक्षा क्षेत्र में अपने रक्षा मंत्री के साथ दौरे के दौरान कहा कि जब तक हिजबुल्लाह खतरा बना रहेगा, इज़राइल दक्षिणी लेबनान में रहेगा। उन्होंने सैनिकों को किसी भी खतरे पर तुरंत जवाब देने का निर्देश दिया और हिजबुल्लाह को क्षेत्र छोड़ने की मांग की। यह यात्रा उस ढांचागत समझौते के बावजूद हुई है जिसका उद्देश्य दोनों पक्षों की संप्रभुता को मान्यता देना था, जिससे इज़राइल की प्रतिबद्धता पर सवाल उठते हैं।
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