
ताइवान ने चीन पर ख़ुफ़िया नज़र तेज़ की, बीजिंग की नई रणनीति में सैन्य प्रदर्शन से ज़्यादा कूटनीतिक घेराबंदी
ताइवान ने चीनी नागरिकों से ख़ुफ़िया सूचनाएँ जुटाने के लिए सीआईए-प्रेरित वेबसाइट लॉन्च की, जबकि चीन ने लिंक्डइन जैसे प्लेटफ़ॉर्म से जासूसी जाल बिछाने और उपग्रह शस्त्र दौड़ की चेतावनी के साथ अपनी रणनीति को और बहुआयामी बना दिया है।
ताइवान ने चीन के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक सार्वजनिक वेबसाइट शुरू करके दोनों पक्षों के बीच गुप्तचर युद्ध को नए मोड़ पर पहुँचा दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो (एनएसबी) द्वारा लॉन्च यह प्लेटफ़ॉर्म अमेरिकी सीआईए की कार्यप्रणाली से प्रेरित है और चीनी नागरिकों के साथ-साथ ताइवान में रहने वाले चीन से जुड़े लोगों को 'लोकतंत्र के मूल्यों' के नाम पर सूचनाएँ साझा करने का खुला न्योता देता है। एनएसबी के अनुसार, हाल के वर्षों में चीन की 'सर्वसत्तावादी व्यवस्था' से असंतुष्ट लोगों की संख्या बढ़ी है, जो स्वेच्छा से संवेदनशील जानकारी देने को तैयार हैं। हालाँकि चीन ने इस वेबसाइट को तुरंत ब्लॉक कर दिया, लेकिन वीपीएन के ज़रिए पहुँच संभव है, जिससे सूचना का प्रवाह रोकना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
दूसरी ओर, चीन की अपनी ख़ुफ़िया रणनीति भी कम परिष्कृत नहीं है। पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने आगाह किया है कि बीजिंग लिंक्डइन और फ्रीलांस पोर्टल जैसे रोज़गार मंचों के ज़रिए रणनीतिक जानकारी तक पहुँच रखने वाले पेशेवरों, सरकारी अधिकारियों और शोधकर्ताओं को अपने जाल में फँसा रहा है। शुरुआत में वैध नौकरी के प्रस्ताव धीरे-धीरे संवेदनशील माँगों में बदल जाते हैं, जिससे पारंपरिक जासूसी की तुलना में लागत और जोखिम कम हो जाता है। इसी कड़ी में, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के प्रति अपने रुख़ को नए सिरे से गढ़ा है: बड़े पैमाने पर सैन्य प्रदर्शनों की जगह अब कूटनीतिक अलगाव, अंतरराष्ट्रीय संदेश पर नियंत्रण और ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को आंतरिक रूप से कमज़ोर करने की कोशिशों को तरजीह दी जा रही है। यह बदलाव दबाव कम होने का नहीं, बल्कि उसे अधिक चुनिंदा और राजनीतिक रूप से प्रभावी बनाने का संकेत है।
सैन्य मोर्चे पर चीन की क्षमताएँ लगातार विस्तार ले रही हैं, जिसका असर सिर्फ़ ताइवान जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है। सिडनी स्थित लोवी इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले दशक में ऑस्ट्रेलिया पर चीन की सैन्य मारक क्षमता में नाटकीय वृद्धि होगी। नया लंबी दूरी का स्टेल्थ बमवर्षक और प्रशांत द्वीप राष्ट्रों में संभावित सैन्य अड्डे मध्य ऑस्ट्रेलिया को बमवर्षक रेंज में ला सकते हैं। फ़िलहाल सबसे तात्कालिक ख़तरा साइबर हमलों और समुद्र के नीचे संचार केबलों को काटने के रूप में है, जो पारंपरिक हथियारों के बिना भी अर्थव्यवस्था को ठप कर सकते हैं।
अंतरिक्ष में भी प्रतिस्पर्धा तेज़ हो गई है। चीन की सैन्य मुखपत्र 'पीएलए डेली' ने स्पेसएक्स के स्टारशील्ड कार्यक्रम का हवाला देते हुए निचली कक्षा के उपग्रहों के सैन्यीकरण की चेतावनी दी है। अख़बार ने कहा कि अमेरिका तेज़ी से उपग्रह समूहों को सैन्य उपयोग में ला रहा है, जिससे एक नई हथियार दौड़ शुरू हो सकती है। यह चेतावनी चीन की अपनी महत्त्वाकांक्षी अंतरिक्ष योजनाओं के संदर्भ में भी पढ़ी जानी चाहिए, जहाँ वह संचार, नेविगेशन और निगरानी के लिए सैकड़ों उपग्रह तैनात कर चुका है।
ये घटनाक्रम हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए व्यापक अस्थिरता के संकेत हैं। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह दोहरी चुनौती है: एक ओर चीन की बढ़ती सैन्य पहुँच हिंद महासागर में भी महसूस की जाएगी, दूसरी ओर साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्रों में गुप्त प्रतिस्पर्धा पारंपरिक सीमाओं को धुँधला कर रही है। ताइवान द्वारा खुली ख़ुफ़िया भर्ती और चीन की बहुआयामी जवाबी रणनीति यह दर्शाती है कि आने वाले वर्षों में टकराव केवल सैन्य नहीं, बल्कि सूचना, कूटनीति और प्रौद्योगिकी के हर मोर्चे पर गहराएगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ताइवान ने चीनी नागरिकों को लक्षित कर एक ख़ुफ़िया-सूचना वेबसाइट शुरू की, जिसमें एआई-निर्मित वीडियो के ज़रिए चीन के सत्तावादी शासन के तहत भय का माहौल दिखाया गया है। यह मंच लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वालों से मुख्य भूमि की ख़बरें देने की अपील करता है और इसे बीजिंग की जासूसी और घुसपैठ के विरुद्ध क़दम बताया गया है।
ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो ने CIA की कार्यप्रणाली पर आधारित एक सार्वजनिक सूचना केंद्र स्थापित कर मुख्य भूमि पर अपना ख़ुफ़िया नेटवर्क विस्तारित किया है। इस पहल का लक्ष्य चीनी नागरिक और द्वीप पर चीन से जुड़े निवासी हैं, जिसका घोषित उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
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