
अमेरिका ने ईरान पर हमले तेज किए, समुद्री नाकाबंदी दोबारा लागू; हरमुज जलडमरूमध्य पर तनाव चरम पर
सेंटकॉम ने 90 मिनट के अभियान में ग्रेटर तुनब द्वीप पर सटीक हमले किए, वहीं ईरानी सूत्रों ने दक्षिणी प्रांतों में विस्फोटों और क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की सूचना दी।
अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने बुधवार को ईरान के खिलाफ नए हवाई हमलों की पुष्टि की और ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री नाकाबंदी फिर से शुरू करने की घोषणा की। सेंटकॉम के बयानों के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 90 मिनट तक चले एक ऑपरेशन में ग्रेटर तुनब द्वीप पर तटीय रक्षा प्रणालियों, क्रूज मिसाइल भंडारण और प्रक्षेपण स्थलों को सटीक-निर्देशित हथियारों से निशाना बनाया गया। इससे पहले, रात भर चले सात घंटे के हमलों में हरमुज जलडमरूमध्य के निकट दर्जनों सैन्य ठिकानों को लक्षित किया गया। अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि नाकाबंदी के दौरान दो वाणिज्यिक जहाजों को अपना मार्ग बदलने पर मजबूर किया गया।
वाशिंगटन और तेहरान ने इन कार्रवाइयों को भिन्न-भिन्न रूप में प्रस्तुत किया। सेंटकॉम के अनुसार, हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका इस्तेमाल हरमुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजरानी पर हमले के लिए किया जा रहा है, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। वहीं, ईरानी सशस्त्र बलों और सरकारी प्रवक्ताओं ने इसे ‘आक्रामकता’ बताते हुए दावा किया कि जवाब में पश्चिम एशिया में अमेरिकी कमांड सेंटरों, रसद केंद्रों और वायु रक्षा ठिकानों पर कई लहरों में मिसाइल व ड्रोन हमले किए गए। ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि अमेरिकी कार्रवाई इस्लामाबाद समझौते का उल्लंघन है, जिसके तहत हरमुज में नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ईरान और ओमान को दी गई थी।
इस टकराव के ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया गया कि नवीनतम हवाई हमलों में 260 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जबकि सेना ने दक्षिण-पूर्वी ईरान के बमपुर स्थित एक बेस पर हमले में सात सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि चाबहार बंदरगाह का समुद्री यातायात नियंत्रण केंद्र क्षतिग्रस्त हुआ, हालांकि घाट और उपकरण सुरक्षित हैं। क्षेत्रीय स्तर पर, ईरानी मीडिया ने कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की रिपोर्ट दी, जिससे संघर्ष के व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है।
यह सैन्य वृद्धि उस समय हुई है जब जून 2026 में हुए एक नाजुक युद्धविराम के बाद तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं बचा है और युद्धविराम समाप्त हो चुका है। उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में चेतावनी दी कि यदि तेहरान कोई समझौता नहीं करता तो अगले सप्ताह हमलों का दायरा बिजली संयंत्रों और पुलों तक बढ़ाया जाएगा। इस बीच, पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि युद्ध के दौरान ईरान के तेल निर्यात और राजस्व में वृद्धि हुई है, जो सैन्य दबाव के बावजूद आर्थिक लचीलेपन का संकेत देता है।
फिलहाल, सेंटकॉम ने बुधवार दोपहर बाद दूसरी लहर के हमले शुरू करने की घोषणा की है, जबकि ईरानी पक्ष ने ‘कड़े जवाब’ की चेतावनी दी है। हरमुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, और आने वाले दिनों में अमेरिकी हमलों के विस्तार तथा ईरान की संभावित प्रतिक्रिया पर वैश्विक नजरें टिकी हैं।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −1.00 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.70 | aligned |
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.20 | neutral |
Iran denounces American aggression as a violation of international law and presents itself as a victim of an unjustified attack.
Iranian press uses the term 'ادعا' (claim) to cast doubt on the veracity of US statements, turning facts into baseless accusations.
The context of Iranian provocations that led to the blockade, such as attacks on commercial shipping, is omitted, which is present in Atlantic reports.
The United States acts to defend freedom of navigation and respond to Iranian aggression, restoring order in the Gulf.
Atlantic press presents US actions as reactive and proportionate, emphasizing Iranian threats and collateral victims to legitimize the use of force.
The Iranian perspective on the causes of the conflict, such as the perception of an economic siege, is omitted, and Iranian civilian casualties are downplayed.
Gulf countries observe the escalation cautiously, recording facts without openly taking sides, but emphasizing the importance of regional stability.
Gulf Arab press adopts a detached tone and focuses on numbers and official statements, avoiding moral judgments to maintain a diplomatic position.
Explicit criticism of either Iranian or US actions is omitted, as well as the role of Gulf states in the conflict, to avoid compromising relations.
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