
अर्गोस की अंतिम पूँछ हिली, फिर आँखें मूंद लीं: 'द ओडिसी' में पहचान की कहानी
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' में होमर की कहानी को नया अर्थ मिला है, जहाँ अर्गोस की वफादारी, मैट डेमन का समर्पण और दुनिया भर की सिनेमाघरों की भीड़ इसे एक समकालीन अनुभव बनाती है।
इथाका के बाहरी छोर पर, खाद के ढेर पर एक बूढ़ा कुत्ता पड़ा था। कीड़ों से भरा, बिसरा हुआ, लेकिन बीस साल बाद भी जैसे ही एक भिखारी के भेष में छिपा ओडीसियस पास से गुज़रा, कुत्ते ने कान खड़े किए और पूँछ धीरे-से हिला दी। अर्गोस ने अपने मालिक को पहचान लिया था। ओडीसियस की आँखें भर आईं, पर हाथ बढ़ाने की हिम्मत न हुई—यह पहचान उसके गुप्त लौटने की पूरी योजना को ख़तरे में डाल देती। कुछ पलों बाद कुत्ते ने हमेशा के लिए आँखें मूंद लीं। होमर की ‘ओडिसी’ का यह प्रसंग, जो क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म में भी उतनी ही मार्मिकता से आता है, कथा के खुरदरे यथार्थ और कोमल भावना के बीच एक सेतु बनाता है।
नोलन के ओडीसियस बने मैट डेमन ने इस भूमिका के लिए अपनी देह को तराश दिया। उन्होंने ग्लूटन युक्त सब कुछ छोड़ दिया और वज़न घटाकर 76 किलो पर ले आए—इतना कि वे कहते हैं, ‘हाई स्कूल के बाद इतना दुबला कभी नहीं था।’ बीयर तक छोड़नी पड़ी, और जब ग्लूटन-फ्री बीयर चखी तो पता ही नहीं चला कि वह अच्छी है या ख़राब—इसे वे एक अच्छा संकेत मानते हैं। निर्देशक का निर्देश था: ‘दुबला-पतला और तगड़ा, ऐसा जो ट्रॉय युद्ध का पुराना सिपाही लगे और भूखा भी।’ परिणामस्वरूप, डेमन का ओडीसियस कोई अलौकिक नायक नहीं, बल्कि एक थका हुआ, अपराधबोध से ग्रस्त इंसान है जो घर लौटने की ललक में बार-बार टूटता और जुड़ता है।
फिल्म ने होमर के कथानक में बाइबिल जैसी गूँज भर दी है। यहाँ ओडीसियस बदला नहीं, पश्चाताप चाहता है। ट्रॉय को धोखे से हराने के बाद वह पेनेलोपे से स्वीकार करता है, ‘हमने इंसानों के बीच सबसे पवित्र रिश्ते तोड़े।’ ज़ीउस का नियम ‘दूसरों के साथ वैसा ही करो जैसा अपने साथ चाहते हो’ सुनहरे ईसाई नियम की याद दिलाता है। नोलन ने इस आत्मपरक यात्रा को तकनीकी महत्त्वाकांक्षा से भी सींचा: पूरी फिल्म आईमैक्स 70 मिमी कैमरों से शूट हुई, जिससे भूमध्यसागर की लहरें, साइक्लॉप्स की कंदरा और हेडीज़ का अंधकार दर्शकों को अपने भीतर समेट लेते हैं।
वैश्विक दर्शकों ने इस आमंत्रण को हाथोंहाथ लिया। दूसरे सप्ताहांत में फिल्म ने उत्तरी अमेरिका में 8.7 करोड़ डॉलर कमाए—पहले सप्ताहांत की तुलना में मात्र 30 प्रतिशत की गिरावट, जो इतनी बड़ी शुरुआत वाली फिल्म के लिए दुर्लभ है। मेक्सिको में दर्शक पूछ रहे हैं कि अगर वे आईमैक्स में नहीं देखते तो तस्वीर का कितना हिस्सा खो देते हैं; अमेरिका की उन 41 स्क्रीनों के लिए अक्टूबर तक टिकट बिक चुके हैं जहाँ 70 मिमी फिल्म प्रक्षेपित हो रही है। दूसरी ओर, स्वीडन के एक तिरपाल थिएटर में बच्चों के लिए खेले जा रहे नाटक ‘मॉन्स्टर ऐंड गॉड्स’ में ज़ीउस सुनहरे जूतों में पानी के गड्ढे में फिसल रहा है। और अमेरिकी मल्टीप्लेक्स में 70 डॉलर के ट्रॉजन हॉर्स आकार के पॉपकॉर्न बकेट्स बिक रहे हैं—इतने कि एएमसी को इस साल ऐसे बकेट्स से 10 करोड़ डॉलर की आमद की उम्मीद है।
फ्रैंकफर्ट में लोहे के एक पुल पर ग्रीक अक्षरों में एक पंक्ति खुदी है: ‘अंगूर-स्याह समुद्रों पर, विदेशी ज़बान बोलने वालों के बीच नौकायन।’ यह उसी यात्रा की ओर इशारा है जो नोलन ने पर्दे पर उतारी—एक ऐसी यात्रा जो सिर्फ घर लौटने की नहीं, बल्कि बार-बार पहचाने जाने और अपनाए जाने की है। अर्गोस की अंतिम पूँछ की तरह, हर यात्रा का अंत किसी अनदेखे इशारे में ही पूरा होता है।
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