
बिजली संकट से निपटने को उद्योगों ने थामा सौर ऊर्जा का दामन, खनन से लेकर स्कूलों तक फैला असर
ईरान, नाइजीरिया और इंडोनेशिया में ऊर्जा सुरक्षा के लिए नवीकरणीय परियोजनाओं की लहर, वैश्विक खनन कंपनियाँ भी डीजल छोड़ सौर बिजली की ओर मुड़ीं।
दुनिया भर में उद्योगों के लिए बिजली आपूर्ति की अनिश्चितता अब परिचालन जोखिम से आगे बढ़कर सीधे निर्यात प्रतिस्पर्धा और ब्रांड विश्वसनीयता को प्रभावित कर रही है। इसका ताजा प्रमाण ईरान की खाद्य प्रसंस्करण कंपनी तलाचिन का कदम है, जिसने 44,000 वर्ग मीटर छत पर 6.9 मेगावाट का सौर संयंत्र लगाकर न केवल बिजली कटौती से बचाव किया, बल्कि कोल्ड स्टोरेज का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस घटाकर ऊर्जा दक्षता भी बढ़ाई। यह रुझान वैश्विक खनन उद्योग में भी स्पष्ट है: ग्लोबलडेटा के विश्लेषण के अनुसार, सक्रिय खदानों में 11 प्रतिशत अब स्थल पर सौर ऊर्जा उत्पादन कर रही हैं, जबकि नई परियोजनाओं में यह हिस्सेदारी 41 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यूरोप में तो 87 प्रतिशत नई खनन विद्युत क्षमता सौर से आ रही है, जबकि उत्तरी अमेरिका अब भी गैस पर निर्भर है।
इस बदलाव के पीछे सरकारी प्रोत्साहन और गिरती लागत का संयोजन काम कर रहा है। ईरान के नवीकरणीय ऊर्जा संगठन (सातबा) ने 10,000 मेगावाट घरेलू सौर ऊर्जा का लक्ष्य रखा है और 12,000 स्कूलों पर 5 किलोवाट के संयंत्र लगाने की योजना है। साथ ही, बांधों के जलाशयों पर तैरते सौर संयंत्रों के लिए 200 मेगावाट की मंजूरी मांगी जा रही है। नाइजीरिया में संघीय सरकार के 75 करोड़ डॉलर के नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम के तहत पठार राज्य में 1.5 मेगावाट का हाइब्रिड सौर मिनी-ग्रिड शुरू हुआ, जिससे राज्य दो वर्षों में बिजली का शुद्ध निर्यातक बनने की उम्मीद कर रहा है। इंडोनेशिया में सरकार ने 93 हाइड्रोजन परियोजनाओं की पहचान की है, जिनमें 32 खरब रुपिये का निवेश होगा, और सुंबा द्वीप पर डीजल विस्थापन परियोजना 2028 तक चालू होने की उम्मीद है।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी इस रूपांतरण की रीढ़ है। इंडोनेशिया की राज्य विद्युत कंपनी पीएलएन और पेर्तामिना ने मिलकर हाइड्रोजन ईंधन स्टेशन तो बना लिया, लेकिन वाहनों की अनुपलब्धता के कारण जापान, चीन और जर्मनी की बस निर्माताओं को आकर्षित करने का प्रयास चल रहा है। पीएलएन के अनुसार, इंडोनेशिया में प्रतिवर्ष 125 टन हाइड्रोजन अधिशेष है, जिसका उपयोग ट्रांसजकार्ता बसों में किया जा सकता है। ईरान में सातबा जल्द ही 500 मेगावाट की परियोजना निधि के लिए सार्वजनिक अभिदान शुरू करेगा, जिसमें आम नागरिक निवेश कर सकेंगे। वैश्विक खनन क्षेत्र में बीएचपी, रियो टिंटो और एंग्लो अमेरिकन जैसी कंपनियाँ दीर्घकालिक विद्युत क्रय अनुबंधों के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा खरीद रही हैं, जिससे लागत में स्थिरता आती है।
अगला पड़ाव कई मोर्चों पर दिख रहा है: ईरान में 500 मेगावाट की निधि का अभिदान और तैरते सौर संयंत्रों की मंजूरी, नाइजीरिया में वर्षांत तक मिनी-ग्रिड का पूरा होना, और इंडोनेशिया में हाइड्रोजन बसों का पायलट संचालन तथा सुंबा परियोजना का 2028 का लक्ष्य। ये सभी पहल इस बात की ओर इशारा करती हैं कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि उद्योगों की प्रतिस्पर्धा रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बन चुकी है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.60 | aligned |
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| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | +0.50 | aligned |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.20 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.50 | aligned |
ईरान सरकार के नेतृत्व में सौर ऊर्जा के माध्यम से अपनी ऊर्जा स्वतंत्रता का निर्माण कर रहा है, और उद्योग इसका अनुसरण कर रहे हैं।
राज्य को परिवर्तन के प्राथमिक एजेंट के रूप में प्रस्तुत करके, सफलता को सरकारी योजना और राष्ट्रीय इच्छाशक्ति के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि निजी क्षेत्र द्वारा संचालित नवाचार को कम किया जाता है।
ईरानी ब्लॉक हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक नवीकरणीय स्रोतों का उल्लेख नहीं करता है, और न ही अंतर्राष्ट्रीय वित्तपोषण या साझेदारी पर चर्चा करता है, जो अन्य ब्लॉकों में मौजूद हैं।
राज्यपाल मुटफवांग ने घोषणा की कि पठार संघीय कार्यक्रम और स्थानीय इच्छाशक्ति की बदौलत ऊर्जा निर्यातक बन जाएगा।
एक एकल परियोजना का उपयोग करके व्यापक राष्ट्रीय सफलता का प्रतीक बनाया जाता है, जो अपरिहार्य प्रगति और राज्य-स्तरीय उपलब्धि की कहानी बनाता है।
अफ्रीकी ब्लॉक नाइजीरिया को प्रभावित करने वाले व्यापक बिजली संकट का कोई उल्लेख नहीं करता है, केवल एक राज्य की परियोजना पर ध्यान केंद्रित करता है, ग्रिड विश्वसनीयता या ऊर्जा पहुंच के मुद्दों पर चर्चा नहीं करता है।
रोसनेफ्ट रिकॉर्ड निवेश के माध्यम से स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, खुद को पर्यावरणीय नेता के रूप में स्थापित करता है।
एक एकल कॉर्पोरेट स्थिरता मीट्रिक पर ध्यान केंद्रित करके, ब्लॉक व्यापक ऊर्जा संकट से ध्यान हटाता है और पर्यावरणीय कार्रवाई को एक व्यावसायिक सफलता की कहानी के रूप में प्रस्तुत करता है।
रूसी ब्लॉक सौर या हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की किसी भी चर्चा को छोड़ देता है, और बिजली संकट को संबोधित नहीं करता है जो कहानी का केंद्रीय विषय है।
इंडोनेशिया खुद को क्षेत्रीय हाइड्रोजन केंद्र के रूप में पेश करता है, अधिशेष और साझेदारी का लाभ उठाकर ऊर्जा संक्रमण का नेतृत्व करता है।
भविष्य की क्षमता और बड़े पैमाने की परियोजनाओं पर जोर देकर, ब्लॉक अपरिहार्यता और नेतृत्व की भावना पैदा करता है, जबकि वर्तमान चुनौतियों और तत्काल बिजली संकट को कम करता है।
दक्षिण पूर्व एशियाई ब्लॉक सौर ऊर्जा या बिजली संकट का कोई उल्लेख नहीं करता है, केवल हाइड्रोजन को समाधान के रूप में केंद्रित करता है।
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