
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद करने का ईरान का ऐलान, अमेरिकी सेना का दावा- यह खुला है
ईरान ने लेबनान में इज़राइली कार्रवाइयों को समझौते का उल्लंघन बताकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद कर दिया, अमेरिका ने इसे खारिज करते हुए व्यापारिक आवाजाही जारी रहने की पुष्टि की।
ईरान के सर्वोच्च सैन्य मुख्यालय, मक़रे ख़ातम अल-अनबिया ने शनिवार को एक बयान में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सभी जहाज़ों के लिए बंद कर दिया गया है। इस फ़ैसले के पीछे दो कारण बताए गए: पहला, अमेरिका द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन की पहली धारा का पालन न करना, जिसमें सभी मोर्चों पर तत्काल युद्धविराम की बात कही गई थी; और दूसरा, दक्षिणी लेबनान में इज़राइल द्वारा किए जा रहे हमले, जिन्हें समझौते का खुला उल्लंघन बताया गया। ईरानी सेना की समुद्री शाखा, आईआरजीसी नेवी ने भी चेतावनी दी कि यदि कोई जहाज़ जलडमरूमध्य के नज़दीक आया तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी। मक़रे ख़ातम अल-अनबिया ने इसे "दुश्मन की बेवफ़ाई के ख़िलाफ़ पहला क़दम" बताया और कहा कि अगर हमले जारी रहे तो आगे और क़दम उठाए जाएंगे।
दूसरी ओर, अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने अपने बयान में दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला है और शनिवार को 55 व्यापारिक जहाज़ वहाँ से गुज़रे, जो 1.7 करोड़ बैरल से अधिक तेल लेकर वैश्विक बाज़ारों की ओर जा रहे थे। सेंटकॉम ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेनाएँ "चौकस और मुस्तैद" हैं और वे सुनिश्चित करेंगी कि ईरान के साथ हुए समझौते के सभी पहलुओं का पालन हो। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वैंस ने फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद किए जाने का कोई सबूत नहीं है। ग़ौरतलब है कि दोनों पक्षों के बीच हाल ही में हुआ समझौता ज्ञापन युद्ध की समाप्ति, होर्मुज़ को खोलने और 60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अंतिम समझौते की राह तय करता है।
लेबनान में स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। इज़राइली सेना का कहना है कि उसने दक्षिणी लेबनान में अपने सैनिकों पर हिज़बुल्लाह द्वारा 50 से अधिक प्रक्षेपास्त्र दागे जाने के जवाब में हमले किए। वहीं हिज़बुल्लाह ने दावा किया कि वह शुक्रवार शाम से युद्धविराम का पालन कर रहा है, लेकिन इज़राइली घुसपैठ की कोशिशों का मुंहतोड़ जवाब देने का उसका अधिकार बरक़रार है। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को नबातियेह क्षेत्र में हुए हवाई हमलों में 16 लोग मारे गए और 12 घायल हुए, जबकि एक अन्य हमले में 7 और लोगों की मौत हुई। इन घटनाओं के बीच, समझौते की पहली धारा के निलंबित रहने से पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
इस घटनाक्रम ने स्विट्ज़रलैंड में होने वाली निर्धारित वार्ता को पहले ही स्थगित कर दिया था, और अब ईरान ने कहा है कि वह अपनी माँगों को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, के बंद होने की आशंका ने कच्चे तेल के बाज़ार में हलचल मचा दी है। यदि तनाव बढ़ता है और जलमार्ग वास्तव में अवरुद्ध होता है, तो इसका असर दक्षिण एशिया सहित ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। फ़िलहाल, अमेरिकी और ईरानी बयानों के बीच विरोधाभास बना हुआ है, और अगला क़दम लेबनान में युद्धविराम के पालन और स्विट्ज़रलैंड में प्रस्तावित वार्ता की बहाली पर टिका है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरान ने अमेरिकी समझौतों के उल्लंघन और लेबनान में इज़राइली हमलों के जवाब में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। चेतावनी दी जाती है कि यदि आक्रामकता नहीं रुकी तो और कदम उठाए जाएंगे।
यह बंदी अमेरिका के टूटे वादों और दक्षिणी लेबनान पर इज़राइल के क्रूर हमलों के परिणाम के रूप में चित्रित की जाती है। ईरान के इस कदम को लेबनानी नागरिकों के नरसंहार और विस्थापन का अपरिहार्य जवाब माना जाता है।
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