
रूसी मिसाइल हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत, भारत ने रूसी राजनयिक को तलब किया
यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हो रहे मालवाहक जहाज पर हुए हमले के बाद भारत ने कड़ी निंदा की और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले अस्वीकार्य बताए।
19 जुलाई 2026 को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर निकल रहे गिनी-बिसाऊ ध्वज वाले मालवाहक जहाज एमवी गोल्डन लियो पर रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला हुआ, जिसमें चार भारतीय नागरिकों सहित दस लोगों की मौत हो गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 21 जुलाई को रूसी प्रभारी व्लादिमीर लादानोव को तलब कर इस हमले की “गंभीर चिंता और स्पष्ट निंदा” दर्ज कराई और कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और निर्दोष नागरिकों की जान लेना अस्वीकार्य है।
यूक्रेनी नौसेना और बंदरगाह प्राधिकरण के अनुसार, जहाज ओडेसा के समुद्री गलियारे से गुजर रहा था और उस पर तीन मिसाइलें दागी गईं, जिससे आग लग गई और दस शव बरामद हुए। यूक्रेनी पक्ष ने बताया कि जहाज पर भारतीय और सीरियाई चालक दल के अलावा एक यूक्रेनी पायलट भी सवार था, और यह पूरी तरह नागरिक अभियान था। वहीं रूसी रक्षा मंत्रालय ने 19 और 20 जुलाई को जारी बयानों में कहा कि उसने ओडेसा और चेर्नोमोर्स्क बंदरगाहों पर सैन्य आपूर्ति से जुड़े जहाजों और बुनियादी ढांचे को उच्च-सटीकता वाले हथियारों और ड्रोनों से निशाना बनाया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि रूसी सेना “कीव शासन के लिए गोला-बारूद और हथियार ढोने वाले जहाजों पर हमले जारी रखेगी” और भारतीय भागीदारों के साथ संपर्क में रहकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही है।
इस घटना ने भारत-रूस संबंधों में नया तनाव पैदा किया है, जो सोवियत काल से “समय-परीक्षित” माने जाते रहे हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े नाविक आपूर्तिकर्ताओं में से एक है—2025 में 3.2 लाख से अधिक सक्रिय नाविकों के साथ—ऐसे में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले सीधे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार की स्थिरता को प्रभावित करते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसी संदर्भ में कहा कि ऐसे हमले “अंतरराष्ट्रीय समुद्री वाणिज्य की सुरक्षा, संरक्षा और स्थिरता को कमजोर करते हैं।”
व्यापक भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में, जुलाई के मध्य से रूस ने यूक्रेनी बंदरगाहों और वहां पहुंचने वाले जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसे वह यूक्रेन की सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने की कार्रवाई बताता है। दूसरी ओर, यूक्रेनी सेनाएं आजोव सागर में रूसी वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रही हैं, जिससे काला सागर क्षेत्र में नागरिक नौवहन के लिए खतरा दोनों तरफ से बढ़ा है। नॉर्वे के दक्षिण-पूर्व विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ग्लेन डिसेन जैसे पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि रूस ने आजोव सागर में अपने जहाजों पर हमलों के जवाब में ओडेसा तट पर यह अभियान शुरू किया है।
फिलहाल मृतक भारतीय नाविकों में केरल के अखिल जोयान और उत्तर प्रदेश के अभिषेक निषाद की पहचान हो चुकी है, जबकि दो अन्य के शवों की फोरेंसिक जांच जारी है। भारत सरकार ने शवों की वापसी और घायल नाविक के इलाज के लिए यूक्रेन स्थित अपने मिशन को सक्रिय कर दिया है। भारत ने रूस से स्पष्ट आग्रह किया है कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने से बचा जाए, लेकिन क्रेमलिन के बयानों से संकेत मिलता है कि सैन्य आपूर्ति वाले जहाजों पर हमलों की नीति जारी रहेगी, जिससे आगे की कूटनीतिक बातचीत की दिशा तय होगी।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.10 | neutral |
|---|---|---|
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.80 | critical |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | 0.00 | neutral |
The Russian attack is described as a serious incident in the context of the conflict, without assigning explicit blame.
The report maintains a detached tone, listing facts and official statements without emphasizing Russian responsibility, thus normalizing the event as part of the ongoing conflict.
It does not delve into India's role as an international actor or the implications for navigation safety in the Black Sea.
India strongly condemns the Russian attack that killed its citizens, demanding respect for freedom of navigation and the lives of seafarers.
The narrative focuses on Indian victims and the official reaction, turning a war incident into a matter of national sovereignty and human rights.
The broader context of the Ukrainian conflict and the strategic reasons for the Russian attack are not mentioned, nor are the non-Indian victims.
The Russian attack is reported as a tragic event in the Black Sea, with details on rescue operations and the death toll.
The account limits itself to providing essential facts and Ukrainian statements, avoiding commentary or attribution of blame, maintaining a detached perspective.
It does not give voice to Indian reactions nor analyze implications for African maritime trade.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
26 दिन बाद सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त, सरकार ने पेपर लीक पर सख्त कानून का वादा किया
11 भाषाएँ · 28 स्रोत
Economy & Markets सेयूनिक्रेडिट ने कॉमर्जबैंक अधिग्रहण की योजना के साथ मुनाफे का लक्ष्य बढ़ाया
3 भाषाएँ · 6 स्रोत
Technology सेडॉग एजेंसी का अंत: एलन मस्क ने स्वीकारा राजनीति में अति, एआई और रोबोट पर भविष्यवाणी
3 भाषाएँ · 5 स्रोत