
अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन: ट्रंप के दबाव में रक्षा खर्च और यूक्रेन पर केंद्रित एजेंडा
अमेरिकी राष्ट्रपति की कड़ी शर्तों के बीच गठबंधन के 32 सदस्य देश 5 प्रतिशत जीडीपी रक्षा व्यय लक्ष्य की ओर प्रगति और यूक्रेन को दीर्घकालिक सैन्य सहायता की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।
तुर्की की राजधानी अंकारा में मंगलवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय नाटो शिखर सम्मेलन का केंद्रीय मुद्दा सदस्य देशों द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5 प्रतिशत तक रक्षा खर्च बढ़ाने की प्रतिबद्धता पर अमल रहेगा। नाटो महासचिव मार्क रूटे ने सोमवार को कहा कि यूरोपीय सहयोगी और कनाडा पहले ही रक्षा और सुरक्षा पर औसतन 4 प्रतिशत जीडीपी खर्च कर रहे हैं, लेकिन उन्हें 2035 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए “स्पष्ट, ठोस और विश्वसनीय योजनाएं” प्रस्तुत करनी होंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश पीछे रहेंगे, उन्हें मनाने के “हमारे पास तरीके हैं”, हालांकि उन्होंने इसका विवरण नहीं दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शिखर सम्मेलन से पहले ही सहयोगियों पर रक्षा खर्च में ढिलाई और ईरान युद्ध में मदद न करने को लेकर नाराजगी जताई है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता और नाटो में अमेरिकी राजदूत मैथ्यू व्हिटेकर के अनुसार, ट्रंप उम्मीद करते हैं कि सभी सहयोगी “तुरंत 5 प्रतिशत की राह पर आएं” और वे व्यक्तिगत रूप से इस संदेश को दोहराएंगे। यूरोपीय सरकारों के सूत्रों के अनुसार, स्पेन और इटली जैसे देशों ने ईरान अभियान के लिए सैन्य अड्डों का उपयोग देने से इनकार किया था, जिससे वाशिंगटन में गहरी नाराजगी है। वहीं जर्मनी, पोलैंड और नॉर्डिक देश खर्च बढ़ाने में अग्रणी माने जा रहे हैं, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस और इटली को राजकोषीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
यूक्रेन को समर्थन शिखर सम्मेलन का दूसरा प्रमुख स्तंभ है। नाटो के मसौदा घोषणापत्र के अनुसार, सदस्य देश 2026 में 70 अरब यूरो की सैन्य सहायता और प्रशिक्षण देने की प्रतिबद्धता जताएंगे तथा 2027 में भी कम से कम इतनी ही राशि बनाए रखने का वादा करेंगे। रूटे ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को “तेजी से हताश” बताते हुए कहा कि यूक्रेन पिछले दो-तीन महीनों में युद्धक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन उसे वायु रक्षा प्रणालियों की सख्त जरूरत है। यूरोपीय संघ के सूत्रों के अनुसार, इस सहायता का एक हिस्सा 60 अरब यूरो की ईयू ऋण सुविधा से आएगा, जबकि अमेरिका से किसी नई वित्तीय प्रतिबद्धता की उम्मीद नहीं है।
मेज़बान तुर्की की भूमिका इस सम्मेलन में विशेष रूप से उभरकर सामने आई है। ट्रंप ने कहा है कि वे केवल राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन के प्रति “सम्मान” के कारण शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। तुर्की के सरकारी हलकों के अनुसार, एर्दोआन अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील, एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में पुनः शामिल होने और यूरोपीय सहयोगियों के साथ एसएएमपी/टी मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसे सौदों पर प्रगति चाहते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना होने और काला सागर, सीरिया तथा ईरान से लगती सीमाओं के कारण तुर्की का सामरिक महत्व बढ़ा है, जिसका लाभ एर्दोआन उठाने की स्थिति में हैं।
शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को एक रक्षा उद्योग मंच आयोजित होगा, जिसमें दसियों अरब डॉलर के नए हथियार उत्पादन अनुबंधों की घोषणा की जाएगी। नाटो अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य ट्रंप को यह दिखाना है कि बढ़ा हुआ खर्च वास्तविक सैन्य क्षमताओं में तब्दील हो रहा है। बुधवार को नेताओं की बैठक के बाद अंतिम घोषणापत्र जारी होने की उम्मीद है, जिसमें अनुच्छेद 5 के प्रति “अटूट” प्रतिबद्धता, रूस को दीर्घकालिक खतरा बताने और ईरान को परमाणु हथियार से वंचित रखने की बात दोहराई जाएगी। भारत और दक्षिण एशिया के लिए, होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर और पश्चिम एशिया में सैन्य गतिशीलता ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकती है, हालांकि इस मुद्दे पर क्षेत्रीय देशों की ओर से अभी कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
यूरोप ट्रम्प के दबावों का प्रबंधन करने और गठबंधन की एकजुटता की रक्षा करने की तैयारी करता है, ट्रान्साटलांटिक पुनर्संतुलन की आवश्यकता पर जोर देता है।
यूरोपीय स्थिति को एक तर्कसंगत अभिनेता के रूप में प्रस्तुत करके 'सार्वभौमिकरण' की तकनीक का उपयोग किया जाता है जो बहुपक्षीय व्यवस्था को संरक्षित करना चाहता है, जो अमेरिकी अप्रत्याशितता के विपरीत है।
मेज़बान के रूप में तुर्की की भूमिका और उसकी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं पर चर्चा नहीं की गई है, न ही ईरान युद्ध के प्रबंधन पर ट्रम्प की यूरोपीय आलोचनाओं पर।
संयुक्त राज्य अमेरिका स्थिति का जायजा लेता है और सहयोगियों से अधिक प्रतिबद्धता का आह्वान करता है, जबकि गठबंधन तनावों के बावजूद स्थिरता बनाए रखने का प्रयास करता है।
एक अलग, तथ्यात्मक स्वर अपनाया जाता है, जो स्पष्ट निर्णय के बिना एजेंडा आइटम सूचीबद्ध करता है, ताकि निष्पक्षता का आभास हो।
घोटाले से बचने के लिए यूरोपीय तैयारियों का उल्लेख नहीं किया गया है, न ही सहयोगियों की 'वफादारी' पर ट्रम्प की विशिष्ट आलोचनाओं का।
एशिया नाटो में अमेरिकी भूमिका के कम होने और यूरोप को अधिक जिम्मेदारी लेने की आवश्यकता को देखता है, जो एक दीर्घकालिक रणनीतिक परिवर्तन है।
एक बाहरी, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण का उपयोग किया जाता है, जो घटनाओं को गठबंधन के संरचनात्मक परिवर्तन के हिस्से के रूप में फ्रेम करता है, बिना भावनात्मक भागीदारी के।
शिखर सम्मेलन के ट्रान्साटलांटिक संबंधों पर तत्काल प्रभाव या ट्रम्प और यूरोपीय नेताओं के बीच व्यक्तिगत तनाव पर चर्चा नहीं की गई है।
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