
जापान में संसदीय गतिरोध और पेरू में चुनावी वैधता पर सवाल, दोनों देशों में राजनीतिक तनाव
जापान में विपक्ष के विरोध से विधेयक अटके, वहीं पेरू में पराजित वामपंथी उम्मीदवार ने नई सरकार को अवैध करार देते हुए लोकतंत्र बहाली का मोर्चा बनाने की घोषणा की।
जापान की संसद का वर्तमान सत्र दो सप्ताह से भी कम समय में समाप्त होने वाला है, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा सरकारी विधेयकों पर चर्चा से इनकार करने के कारण यह गतिरोध में फंस गया है। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के प्रशासन ने 64 विधेयक प्रस्तुत किए थे, जिनमें से 17 अभी भी लंबित हैं, जिनमें शाही परिवार कानून में संशोधन और आपदा रोकथाम एजेंसी की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के पास उच्च सदन में बहुमत नहीं है, जिससे विपक्ष के सहयोग के बिना विधेयकों का पारित होना असंभव है। जापानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार और एलडीपी सत्र को महीने के अंत तक बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, जो विशेष सत्र होने के कारण दो बार बढ़ाया जा सकता है।
इस बीच, पेरू में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में हार का सामना करने वाले वामपंथी उम्मीदवार रॉबर्टो सांचेज़ ने केइको फुजीमोरी की आगामी सरकार को "गहरी अवैधता" वाला बताया है और लोकतंत्र की बहाली के लिए एक देशभक्तिपूर्ण मोर्चा बनाने की घोषणा की है। सांचेज़ ने आरोप लगाया कि चुनाव में पारदर्शिता नहीं थी और विदेशी मतों की गिनती के नियम अंतिम समय में बदल दिए गए। उन्होंने दावा किया कि घरेलू क्षेत्र में उन्हें 50.08% वोट मिले, लेकिन वैश्विक गणना में फुजीमोरी 50.13% के साथ विजयी रहीं। सांचेज़ ने अमेरिकी राजदूत बर्नी नवारो पर चुनाव में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि राजदूत ने चुनाव आयोग के सदस्यों से मुलाकात की और पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया, जो तटस्थता का उल्लंघन है। उन्होंने अंतर-अमेरिकी मानवाधिकार आयोग (CIDH) में याचिका दायर कर चुनाव परिणामों को चुनौती देने की बात कही।
जापान में विपक्षी दलों ने ताकाइची सरकार के खिलाफ एक अलग मोर्चा खोल रखा है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने एक चुनावी वीडियो विवाद में अपने सहयोगी के स्पष्टीकरण का दस्तावेज संसद में प्रस्तुत करने की योजना को सवालों से बचने का प्रयास बताए जाने से इनकार किया। उन्होंने उच्च सदन की लेखा समिति में कहा कि दस्तावेज जमा करने से प्रश्नकर्ताओं और जनता को पूरी तस्वीर समझने में मदद मिलेगी। वहीं, शाही परिवार कानून संशोधन पर विपक्षी सांसद ने आरोप लगाया कि इससे पूर्व शाही शाखाओं के पुरुष वंशजों को गोद लेकर सिंहासन का उत्तराधिकारी बनाने का रास्ता खुल सकता है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनी। ताकाइची ने जवाब दिया कि विधेयक का उद्देश्य भविष्य की संसदीय चर्चाओं को बाधित करना नहीं है और यह दोनों सदनों के नेताओं की "विधायी सहमति" के अनुरूप है।
पेरू में सांचेज़ ने फुजीमोरी सरकार से बातचीत के लिए कई शर्तें रखी हैं, जिनमें 2022-23 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई 50 मौतों की जांच, "बल के असंगत प्रयोग" के लिए राजनीतिक अधिकारियों को दंडित करना, कांग्रेस द्वारा पारित तथाकथित "अपराध समर्थक कानूनों" को निरस्त करना और पूर्व राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो की रिहाई शामिल है। उन्होंने कहा कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी और उनकी पार्टी जनता के साथ सड़कों पर उतरने को तैयार है। दूसरी ओर, फुजीमोरी को आधिकारिक रूप से निर्वाचित घोषित किया जा चुका है, और उनके समर्थक चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर जोर देते हैं।
दोनों देशों में राजनीतिक अनिश्चितता के ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। जापान में विधायी गतिरोध से आपदा प्रबंधन और न्यायिक सुधार जैसे नीतिगत मामले लटक गए हैं, जबकि एलडीपी सोमवार को विपक्ष के साथ कामकाज सामान्य करने पर चर्चा करेगी। यदि सहमति नहीं बनी, तो सत्र विस्तार का निर्णय लिया जाएगा। पेरू में सांचेज़ की अंतरराष्ट्रीय अपील और सड़क आंदोलन की धमकी से नई सरकार के सामने शुरुआती दिनों में ही वैधता का संकट खड़ा हो सकता है, जो देश के हालिया राजनीतिक इतिहास में बार-बार उभरा है। दोनों ही मामलों में संस्थागत प्रक्रियाओं पर भरोसा बहाल करना आगे की राह तय करेगा।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −1.00 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
जापान एक आंतरिक घोटाले को प्रक्रियात्मक पारदर्शिता से संभालता है और पेरू के चुनावी परिणाम को मान्यता देता है, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री के कार्यों को सामान्य संसदीय और कूटनीतिक प्रक्रियाओं के रूप में प्रस्तुत करके, यह जापानी राजनीतिक स्थिति को सामान्य करता है और फुजीमोरी की जीत को वैध ठहराता है।
यह पेरू के विपक्ष की आपत्ति को छोड़ देता है, जो धोखाधड़ी और अवैधता की निंदा करता है, और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को भी छोड़ता है।
पेरू का वामपंथ फुजीमोरी की वैधता को अस्वीकार करता है, अमेरिकी हस्तक्षेप का आरोप लगाता है, और 'लोकतंत्र को पुनः प्राप्त करने' के लिए जुटता है।
धोखाधड़ी और विदेशी साजिश की कथा बनाकर, एक चुनावी हार को लोकतंत्र के लिए नैतिक संघर्ष में बदल दिया जाता है, समर्थकों को जुटाया जाता है।
यह फुजीमोरी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को छोड़ता है, जैसे जापान का बधाई पत्र, और जापानी घोटाले के विवरण जो एक अलग प्रकार के लोकतांत्रिक तनाव को दर्शाते हैं।
रूस जापान में संसदीय गतिरोध को एक प्रक्रियात्मक समस्या के रूप में देखता है, बिना किसी पक्ष के बारे में रुख अपनाए।
भावनात्मक टिप्पणी के बिना तथ्यों की रिपोर्ट करके, स्थिति को एक सामान्य विधायी कठिनाई के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, दोषारोपण से बचा जाता है।
यह पेरू के संकट को पूरी तरह से छोड़ देता है, कहानी को एक देश तक सीमित कर देता है और पेरू में विवादित चुनावों के समानांतर को अनदेखा करता है।
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