
अमेरिका-ईरान समझौते से गैसोलीन की कीमतों में गिरावट, चार डॉलर के नीचे पहुंची
होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर खुलने की उम्मीदों और कच्चे तेल के दाम घटने से अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत मार्च के बाद पहली बार चार डॉलर प्रति गैलन से नीचे आई, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध-पूर्व स्तर पर लौटने में वर्षों लग सकते हैं।
अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत बृहस्पतिवार को गिरकर 3.999 डॉलर प्रति गैलन पर आ गई, जो मार्च के अंत के बाद पहली बार चार डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे है। यह गिरावट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद दर्ज की गई, जिसके तहत तेहरान अपने उच्च-संवर्धित यूरेनियम भंडार को पतला करेगा और अमेरिकी समर्थित प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी। अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (एएए) के आंकड़ों के अनुसार, यह 30 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है, जबकि मई में कीमतें 4.56 डॉलर के शिखर तक पहुंच गई थीं।
इस राहत की मुख्य वजह वैश्विक तेल बाजारों में आया बदलाव है। फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य—जिससे दुनिया की पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति गुजरती है—व्यावहारिक रूप से बंद हो गया था, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं और एक ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हुआ। अब समझौते के बाद जलडमरूमध्य के फिर से खुलने और ईरानी तेल निर्यात की वापसी की उम्मीदों ने कच्चे तेल के दाम को 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे धकेल दिया है, जिसका सीधा असर पंप कीमतों पर पड़ा।
भौगोलिक रूप से देखें तो अमेरिका के भीतर भी कीमतों में भारी अंतर बना हुआ है। इंडियाना जैसे राज्यों में औसत कीमत 3.40 डॉलर तक गिर चुकी है और कुल 28 राज्यों में पेट्रोल चार डॉलर से नीचे बिक रहा है, जबकि कैलिफोर्निया जैसे पश्चिमी तटीय इलाकों में कीमतें अब भी काफी ऊंची हैं। वैश्विक स्तर पर, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर मिश्रित प्रभाव देखने को मिला है—आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन महीनों में भारत में पेट्रोल की कीमतों में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू कर ढांचे और मुद्रास्फीति के दबाव को दर्शाता है।
हालांकि, विशेषज्ञ तत्काल बड़ी राहत की संभावना से इनकार कर रहे हैं। ऊर्जा परामर्श फर्म रैपिडन एनर्जी ग्रुप का अनुमान है कि युद्ध-पूर्व के तीन डॉलर प्रति गैलन के स्तर पर लौटने में 2027 तक का समय लग सकता है, क्योंकि वैश्विक भंडारण स्तर अब भी कम है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। सर्दियों में मांग घटने से कीमतों में कुछ और नरमी आने की उम्मीद जरूर है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता—विशेषकर पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की राह—और उत्पादक देशों के नीतिगत निर्णय आने वाले महीनों में तेल बाजार की दिशा तय करेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिकी ड्राइवरों को पेट्रोल पंप पर राहत मिल रही है क्योंकि नियमित गैसोलीन का राष्ट्रीय औसत मार्च के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ गया है। यह गिरावट अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते के बाद आई है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति की आशंकाएं कम हुई हैं और उपभोक्ताओं को ठोस लाभ मिला है।
जहां अमेरिका-ईरान समझौते से अमेरिकी गैसोलीन 4 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ गया है, वहीं भारत के लिए तस्वीर अलग है, जहां पेट्रोल की कीमतें केवल तीन महीनों में 7% बढ़ गई हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय पंपों पर राहत में नहीं बदली, जो भू-राजनीतिक सौदों के असमान प्रभाव को उजागर करती है।
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